October 5, 2022

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पेप्टिक अल्सर क्या है, कारण, लक्षण एवं पेप्टिक अल्सर के उपचार मे कुछ औषधीय पौधों की भूमिका | Peptic Ulcer Kya Hai Karan Lakshan Evam Peptic Ulcer Ke Upchar Mai Kuch Aushadhiya Poudho Ki Bhumika

Peptic ulcer in hindi
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Peptic Ulcer Kya Hai Karan Lakshan Evam Peptic Ulcer Ke Upchar Mai Kuch Aushadhiya Poudho Ki Bhumika

पेप्टिक अल्सर एक बहुत ही आम समस्या है जिससे एक साल के अंदर लगभग 1 मिलियन से ज्यादा लोग भारत में ग्रसित होते हैं। इस बीमारी से ग्रसित लोगों को दर्द का सामना करना पड़ता है, जो कई बार असहनीय हो जाता है।

पेप्टिक अल्सर क्या है (Peptic Ulcer Kya Hai):-

पेप्टिकअल्सर प्रायः पेट का अल्सर है , जो की पेट, ग्रहणी, आंतों या इसोफैगस (अन्न प्रणाली) के निचले हिस्से की परत पर हो सकता है। इसमें इन तीनों भाग की परतों पर दर्दनाक छाले हो जाते हैं, और इसका मुख्य कारण श्लेष्मिक कला या श्लेष्मल झिल्ली (Mucous Membrane) या (Mucosa) जो की शरीर के आन्तरिक अंगों को घेरे रहती है और सभी गुहाओं (cavities) की सबसे ऊपरी परत होती है, इसी झिल्ली को जब पाचन रस खराब कर देता है, तब इस परत पर घाव बनने लगता है जिसे हम पेप्टिक अल्सर के नाम से जानते हैं।

पेप्टिक अल्सर प्रायः तीन प्रकार के होते हैं (There are usually three types of peptic ulcers):-

1. गैस्ट्रिक अल्सर (Gastric ulcer)

2.इसोफैगल (अन्न प्रणाली) अल्सर (Esophagal ulcer)

3.ग्रहणी या डिओडिनल अल्सर (Duodenal ulcer)

1. गैस्ट्रिक अल्सर (Gastric Ulcer)  :-

इस प्रकार का अल्सर पेट के अंदर विकसित होता है।

2.इसोफैगल (अन्न प्रणाली) अल्सर :-

इस प्रकार का अल्सर इसोफैगस (अन्न प्रणाली) के के निचली परत पर विकसित होता है।

3.ग्रहणी या डिओडिनल अल्सर :-

इस प्रकार का अल्सर प्रायः छोटी आंत के ऊपरी परत में होते हैं, जिन्हें हम ग्रहणी या डिओडिनल अल्सर कहते हैं।

पेप्टिक अल्सर के कारण (Peptic Ulcer Ke Karan):-

पेप्टिक अल्सर होने के कई कारण होते हैं जैसे :-

1.बैक्टीरिया से संक्रमण:-

यह पेप्टिक अल्सर का सबसे आम कारण है, जो की एच. पायलोरी (H. Pylori) नामक बैक्टीरिया के संक्रमण की वजह से होता है।

2. लंबे समय तक नॉन-स्टेरोइडल एंटि-इंफ्लामेटरी(NSAIDs) दवाओं का उपयोग :-

लंबे समय तक नॉन-स्टेरोइडल एंटि-इंफ्लामेटरी(NSAIDs)जैसे दर्दनाशक दवाओं (Ibuprofen, naproxen) के सेवन से भी पेप्टिक अल्सर की समस्या
होती है।

3. अधिक मात्रा में धूम्रपान (सिगरेट, तंबाखू) करना।

4.एल्कोहल का अत्यधिक मात्रा में सेवन करना।

पेप्टिक अल्सर के लक्षण (Peptic Ulcer lakshan) :-

1. पेट में दर्द और जलन का बने रहना।
2.वजन का घटना।
3.जी मितलाना या उल्टी जैसा लगना।
4.खट्टी डकार आना।
5. हमेशा पेट का भरा हुआ महसूस होना।
6. सिने में जलन का महसूस करना
7. पेट का फूलना
8. खाना निगलने में दिक्कत महसूस करना।
9. भूख बिलकुल ना लगना।

पेप्टिक अल्सर के प्रकार के हिसाब से उनके लक्षण दिखाई देते हैं।

पेप्टिक अल्सर के उपचार कुछ औषधीय पौधों की भूमिका (The role of some medicinal plants in the treatment of peptic ulcer) :-

कुछ अल्सर सुरक्षात्मक औषधीय पौधे और इसके रासायनिक घटक (Chemical Constituents):-

1.मैंगिफेरा इंडिका (Mangifera indica) –

इसे हम मैंगो के नाम से भी जानते हैं, इसके पत्ते, छाल, जड़ें, फल और फूल के रासायनिक घटकों जैसे “मैंगिफेरिन (Mangiferin)”का उपयोग पेप्टिक अल्सर के उपचार में किया जाता है।

2.औसीमम सैंकटम (Ocimum sanctum)-

इसे हम तुलसी के नाम से भी जानते हैं, जिसकी पत्तियों का उपयोग अल्सर के उपचार में किया जाता है। तुलसी का पूरा पौधा ही उपयोग में लाया जाता है, जिसमें “यूजेनोल (Eugenol)” नामक तेल पाया जाता है जो उपचार में प्रयोग में लाया जाता है। ”

3.एजाडीरक्टा इंडिका (Azadirachta indica):-

इसकी पत्तियाँ जिनमें “निंबीडीन(Nimbidin)” नामक रासायनिक तत्व पाया जाता है, उपचार में उपयोग में लाया जाता है।

4.मिमोसा पुडिका (Mimosa pudica )-

इसे हम छुईमुई के नाम से जानते हैं, इसकी पत्तियों एवं बीज को हम अल्सर के उपचार में उपयोग में लाते हैं। जिसमें “मिमिओसीन (mimosine )” नामक एल्क्लोइडल (Alkaloidal) रासायनिक घटक पाया जाता है, जो अल्सर के उपचार में उपयोग होता है।

5.एनोना स्क्वामोसा (Annona squamosa ) –

इसे हम कस्टर्ड एप्पल या सीताफल के नाम से भी जानते जो की एक फल हैं। इसमें टैनिक एसिड (Tannic acid) मौजूद होता है जो अल्सर के उपचार के लिए काफी लाभदायक है।

6.टेर्मिनेलिया चेबुला (Terminalia Chebula) –

इसे हम हरड़ के नाम से भी जानते हैं, यह एक फल है जिसमें टेनिन्स (Tannins), गैलिक एसिड (gallic acid), चेबूलीनिक एसिड (chebullinic acid) और सोर्बीटोल (Sorbitol)नामक रासायनिक घटक उपस्थित होता है, जो की पेप्टिक अल्सर के उपचार में उपयोग होता है।

7.एगेल मार्मेलोस (Aegel marmelos ) –

इसे हम बेल के नाम से भी जानते हैं, इसका फल और बीज दोनों उपयोग में लाये जाते हैं, जिसमे लुवांगेटिन (Luvangetin ) नामक रासायनिक तत्व मौजूद होता है जो अल्सर के उपचार में उपयोग में लाया जाता है।

8.साइडियम गुआजावा ( Psidium guajava ) –

इसे हम अमरूद, बिही, जाम के नाम से भी जानते हैं। इसकी पत्तियाँ अल्सर के उपचार में उपयोग में लायी जाती हैं , जिसमें क्वेरसेटिन, गुइजेवेरिन नामक फ्लेवोनोइड्स (Quercetin, guaijaverin, flavonoids) घटक पाये जाते हैं जो अल्सर के उपचार में उपयोगी हैं।

9.सेस्बानिया ग्रैंडिफ्लोरा (Sesbania grandiflora ):-

इसे हम अगस्ति या गाछ मूंगा के नाम से जानते हैं। इसकी पत्तियों को अल्सर के उपचार में उपयोग में लाया जाता है, जिसमें टैनिन, सैपोनिन (Tannins, saponins ) मौजूद होता है।

10.शोरिया रोबस्टा (Shorea robusta) :-

इसे हम साल के नाम से भी जानते हैं, इसकी छाल और बीजों को हम उपयोग में लाते हैं, जिसमें उर्सोलिक एसिड और एमिरिन (Ursolic acid, amyrin) नामक रासायनिक तत्व मौजूद होते हैं जो की अल्सर के लिए लाभदायक है।

11.एलियम सटाइवम (Allium sativum):-

इसे हम लहसुन कहते हैं जिनका बल्ब वाला भाग हम उपयोग में लाते हैं, इसे हम सब्जियों में भी उपयोग में लाते हैं। इसमें एलिन, एलिसिन (Alliin, allicin) नामक तत्व उपस्थित होते हैं, जो अल्सर के उपचार में उपयोग आते हैं।

12.एलोय वीरा (Aloe veera ):-

इसे हम घृतकुमारी के नाम से भी जानते हैं, इसकी पत्तियाँ उपयोग में लाई जाती हैं। इसमें बारबेलोइन, आइसोबारबलोइन, सैपोनिन्स (Barbaloin, isobarbaloin, saponins) नामक तत्व अल्सर उपचार में उपयोग आते हैं।

यह कुछ ऐसे औषधीय पौधे हैं, जिनका उपयोग हम अल्सर के उपचार में करते हैं, इसके अलावा बकोपा मोनिएरा (Bacopa moniera) जिसे हम ब्राह्मी बोलते हैं उनकी पत्तियों, कैरिका पपाया (Carica papaya)मतलब पपीते फल और बीज, मोरिंगा ओलेफेरा (Moringa oleifera) मतलब मुनगा या सहजन के पत्ते, ईसबगोल की भूसी भी अल्सर के उपचार में उपयोगी है।

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