मोबाइल फोन: नींद की समस्याओं, चिंता और अवसाद का एक जोखिम कारक | Mobile phones: a risk factor for sleep problems, anxiety and depression in Hindi

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मोबाइल फोन – एक मुक हत्यारा

मोबाइल फोन आजकल हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है और कई तरह से इस्तेमाल किया जाता है। मोबाइल के बिना हमारा एक मिनट भी काटना मुश्किल है , अलार्म से खाना बनाने तक की रेसिपी हम मोबाइल से ही देख रहे हैं , हमारी सुबह भी आजकल मोबाइल से हो रही है, शाम भी मोबाइल से और रात भी मोबाइल से ही। अगर मोबाइल न हो तो हमें एक मिनट भी इसके बिना रहना मुश्किल सा लगने लगता है। मोबाइल हमारे आधुनिक जीवन के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। आज हम मोबाइल के कुछ पहलुओं पर चर्चा करेंगे और यह समझेंगे की मोबाइल क्या एक मूक हत्यारा बन सकता है?

कुछ मुख्य उपयोग मोबाइल के जो हमारी दैनिक दिनचर्या के लिए भी महत्वपूर्ण हैं (Some main uses of mobile which are also important for our daily routine):-

1.संचार (Communications) –

मोबाइल फोन का उपयोग ज्यादातर दूर रहने वाले लोगों, जैसे दोस्तों, परिवार और सहकर्मियों से बात करने और संदेश भेजने के लिए किया जाता है।

2. इंटरनेट ब्राउज़िंग (Internet browsing) –

आप अपने फ़ोन का उपयोग विभिन्न वेबसाइटें देखने, अपना ईमेल जाँचने, सोशल मीडिया का उपयोग करने और इंटरनेट पर अन्य कार्य करने के लिए कर सकते हैं।

3.स्वास्थ्य और फिटनेस (Health and Fitness)-

आपके फ़ोन पर मौजूद स्वास्थ्य और फ़िटनेस ऐप्स आपको यह ट्रैक रखने में मदद कर सकते हैं कि आप कितने स्वस्थ हैं और कितना व्यायाम करते हैं।

4.गेमिंग (Gaming) –

आप मोबाइल में घर बैठे गेम्स खेल सकते हैं, मोबाइल फोन गेम कंसोल की तरह उपयोग में आता है।

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5. कैमरा (Camera) –

पहले लोगों को फोटो खिचवाने के पैसे देने पड़ते है, अब एक बार आपने मोबाइल ले लिया तो आप जब चाहे, जहाँ चाहें, जिसकी चाहें, जब चाहें अच्छी गुणवत्ता वाली तस्वीर ले सकते हैं।

6.नेविगेशन (Navigation)-

नेविगेशन आपके फ़ोन पर एक विशेष मानचित्र होने जैसा है जो आपको नई जगहों तक जाने का रास्ता ढूंढने में मदद कर सकता है। यह आपको दिखाता है कि कहां जाना है ताकि आप खो न जाएं।

7.मनोरंजन (Entertainment)-

मोबाइल फोन का उपयोग मज़ेदार गेम खेलने, संगीत सुनने, फिल्में देखने और टीवी शो का आनंद लेने के लिए भी किया जा सकता है।

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8.खरीददारी (Shopping)-

जब हम अपने फोन का उपयोग करते हैं, तो हम इंटरनेट पर चीजें खरीद सकते हैं और बैंकिंग कार्य कर सकते हैं।

9.सुरक्षा (Security) –

हमारे मोबाइल फोन को सुरक्षित रखना भी महत्वपूर्ण है। हम दो-कारक प्रमाणीकरण का उपयोग करके ऐसा कर सकते हैं, जिसका अर्थ है कि हमें यह साबित करने के लिए दो अलग-अलग तरीकों का उपयोग करने की आवश्यकता है कि यह वास्तव में हम हैं। हम अपने फ़ोन को ख़राब चीज़ों से बचाने के लिए एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर का भी उपयोग कर सकते हैं। और हमें अपने फोन को दूसरों से सुरक्षित रखने के लिए उसमें हमेशा लॉक स्क्रीन रखनी चाहिए।

बच्चों की पढ़ाई में मोबाइल का उपयोग कोरोना से लेकर अब तक (Use of mobile in children’s education from Corona till now)-

1.ऑनलाइन क्लाससेस (Online classes) –

कोविड-19 के बाद से बच्चों की शिक्षा में मोबाइल फोन के इस्तेमाल में बदलाव आया है और इसमें कुछ बड़े बदलाव भी आए हैं। ऑनलाइन शिक्षा तब होती है जब बच्चे स्कूल जाने के बजाय अपने मोबाइल फोन या टैबलेट का उपयोग करके सीखते हैं। वे अपने शिक्षकों से बात कर सकते हैं और अपने उपकरणों पर वीडियो और ऑनलाइन कक्षाओं से सीख सकते हैं। कोरोना महामारी के कारण यह और अधिक लोकप्रिय हो गया है।

2.ऑनलाइन एजुकेशन प्लेटफॉर्म (Online education plateform) –

ऑनलाइन शिक्षा प्लेटफ़ॉर्म विशेष वेबसाइटों या ऐप्स की तरह हैं जिनका उपयोग स्कूल और शिक्षक छात्रों को इंटरनेट पर सीखने में मदद करने के लिए करते हैं। वे अपने शिक्षकों के साथ वीडियो कॉल कर सकते हैं, स्कूल का काम ऑनलाइन कर सकते हैं और स्कूल के लिए अपनी ज़रूरत की चीज़ें साझा कर सकते हैं। इन प्लेटफ़ॉर्म के कुछ उदाहरण गूगल क्लासरूम (Google classroom) , ज़ूम (Zoom)औरमाइक्रोसॉफ्ट टीम (Microsoft Teams) हैं।

3.विडियो के माध्यम से नयी चीजें सीखना (Learning new things through videos)-

बच्चे अपने फ़ोन या टैबलेट का उपयोग ऐसे वीडियो देखने के लिए करते हैं जो उन्हें नई चीज़ें सिखाते हैं या सीखने में मदद करते हैं। इसमें ऑनलाइन कक्षाएं, पाठ और शैक्षिक वीडियो शामिल हो सकते हैं।

4.डिजिटल एजुकेशन मटेरियल (Digital education material)-

डिजिटल शैक्षिक सामग्री ऐसी चीज़ें हैं जिनका उपयोग बच्चे सीखने में मदद के लिए कंप्यूटर या टैबलेट पर कर सकते हैं। इनमें अभ्यास के लिए ऐप्स, चीजों को समझाने वाले शिक्षकों के वीडियो, सीखने में मदद करने वाले मजेदार गेम और प्रौद्योगिकी का उपयोग करने वाले अन्य उपकरण जैसी चीजें शामिल हो सकती हैं।

5.ऑनलाइन स्कूल एक्टिविटीस (Online school activities)-

ऑनलाइन विद्यालयक्रियाएँ मोबाइल डेवाइसेस का उपयोग विद्यालयीय क्रियाओं जैसे कि वर्चुअल प्रायोगिकी, वीडियो प्रस्तुतिकरण, और वर्चुअल टूर्स के लिए भी किया जा सकता है ।

6.बच्चों की एक्टिविटीस पर नजर रखना (Keeping an eye on children’s activities)-

बच्चों के पैरेंट्स को बच्चों की स्क्रीन टाइम और इंटरनेट का उपयोग निगरानी करने के लिए ज़्यादा महत्वपूर्ण हो गया है, ताकि वे सुनिश्चित कर सकें कि उनके बच्चे ठीक से पढ़ाई कर रहे हैं ।

यह तो बात हुई की हम मोबाइल का उपयोग अगर इन चीजों के लिए कर रहें हैं तब तक यही मोबाइल हमारे लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध होगा, लेकिन अब हम बात करेंगे की क्यों मैंने मोबाइल को मुक हत्यारा बोला है और हमारे जीवन को कैसे खत्म कर सकता है इस पर मैं  चर्चा करूंगी –

अब हम ऐसे हो चुके हैं की अगर एक दिन खाना ना मिले तो जी सकते हैं, लेकिन एक दिन अगर किसी कारणवश मोबाइल ना मिले तो हम पागल हो जाते हैं, ऐसा क्यूँ? यह एक बहुत बड़ा सवाल है जिस पर चर्चा करनी काफी जरूरी है।

1.शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव (Bad effects on physical health)-

हम मोबाइल लेकर या तो दिन भर गेम खेलने लगते हैं, या कोई मूवी देखने लगते हैं, या वेब सीरीज। अब हमारी दुनिया मोबाइल में ही सिमट कर रह गयी है, हमारी सुबह भी मोबाइल से हो रही और रात भी। ना हम अब खाने के बाद अपने परिवार से गप-सप कर रहे ना ही सुबह मॉर्निंग वॉक पर जा रहे ना अपने परिवार के पास बैठ कर बातें कर रहे हैं। अब हर वर्ग के व्यक्ति को मोबाइल चलाने के लिए प्राइवसी (Privacy) चाहिए, कोई घर के इस कोने में मोबाइल चलाता दिखेगा तो कोई इस कोने में और यही हमारे अवसाद और बीमारियों को ओर हमें लेकर जा रहा है। अब अगर बच्चा घर में रो भी रहा हो तो माँ उसे मोबाइल थमा देती है, बच्चा भी चुप हो जाता है, ना अब माँ उसे गोदी में चुप कराती है, और हर वर्ग के बच्चे भी अब माँ-बाप से बात करने से ज्यादा तव्वजो मोबाइल को दे रहे।

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लगातार मोबाइल के उपयोग से गर्दन, स्पाइन या पॉस्चर (Posture) की तकलीफ शुरू हो सकती है और साथ ही आँखों पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है। और सबसे बड़ी दिक्कत मोटापे की और कब्ज की हो सकती है क्योंकि अधिकतर लोग एक ही जगह पर बैठ के मोबाइल उसे करते रहते हैं और अगर घूम -घूम के भी आप मोबाइल का उपयोग कर रहे हैं तो यह और भी गलत है, आपकी गर्दन झुकी रहेगी जिससे दिक्कत होगी और साथ ही आप किसी से टकरा सकते हैं और कहीं गिर भी सकते हैं। अगर सार निकालें तो मोबाइल का ज्यादा उपयोग हमें तकलीफ ही दे सकता है, चाहे अब आप दिनभर इयरफोन लगा कर बातें कर रहे, या गाने सुन रहें है या बिस्तर पर लेट के मूवी देख रहे हैं तो यह हमें बहरा और अंधा दोनों कर सकता है।

2.शिक्षा का दुश्मन मोबाइल (Mobile is the enemy of education)-

आज की सदी में मोबाइल एक ऐसा हथियार बन चुका है जिससे बच्चे बहुत सी नयी चीजें सीख रहें हैं और अपने आपको आगे ले जा रहें, जीवन में तरक्की कर रहे हैं लेकिन वही इसके विपरीत कुछ बच्चे मोबाइल पढ़ाई को छोड़ कुछ ऐसे गेम्स में फंस जाते हैं जो की कई बार उन्हें अपराधी की श्रेणी में लाकर खड़ा कर देता है। बच्चे अब समय से पहले बड़े हो रहें हैं सिर्फ इस मोबाइल के चलते , कुछ बच्चे जो पढ़ाई में अच्छे नहीं होते वह मोबाइल में कुछ गलत चीजों का उपयोग करने लगते हैं, जो उन्हें समय से बड़ा बना देता है और इसका परिणाम कई बार भयावह भी होता है।

3.रिश्तों से दूरी (Distance from relationships) –

पहले लोग छुट्टियों में लोग अपने रिशतेदारों के यहाँ जाते हैं, बच्चे अपने दादा-दादी, मामा-मामी या नाना-नानी की के यहाँ जाते थे, उनसे अच्छी-अच्छी बातें सीखा करते थे। लोगों में प्यार था , लोग एक दूसरे की तकलीफ को समझते थे उनका साथ देते थे, लेकिन आज यह सब पूरी तरह से खत्म हो चुका है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण कोरोना महामारी थी, जिनसे अपनों को भी पराया कर दिया। अब लोग अगर रिशतेदारों के यहा गलती से चले भी गए तो भी उनका अधिकतर समय अपनों के बजाय मोबाइल के साथ बीतता है। मोबाइल ने अब हर वर्ग के लोगों के बीच अंतर को बढ़ा दिया है और अब यही वजह है की अब लोगों मे रिश्ता निभाने की ललक भी नहीं बची है, ना बच्चों में रिशतेदारों के यहाँ जाने की ललक और ना अब बच्चे दादी और नानी का प्यार ले पा रहे।

4. संस्कार में कमी (lack of manners)-

क्योंकि जैसा मैंने पहले ही कहा की अब बच्चे सिर्फ मोबाइल में अपनी दुनिया बसा रखें है, अब बच्चे बचपन से गाना सुनने लगे हैं, डांस करने लगे हैं ना ही अब दादा-दादी का लाड़-दुलार है, ना नाना-नानी की कहानी और ना ही इनसे मिलने वाले अच्छे संस्कार जो बच्चों को अंत तक मिला करते थे। अब दिवाली पर लोग पूजा करके फटाके फोड़ के ही समझते हैं की यही दिवाली है लेकिन पहले लोग दिवाली के दिन भी मिलने जाते थे, प्यार था स्नेह था जो बच्चों को भारतीय संस्कार से भी जोड़ कर रखती थी अब यह सब लगभग सा लुप्त हो चुका है। अब बच्चे किसी से मिलते हैं तो ना ही पैर छूने का रिवाज है ना ही नमस्ते है, ना छोटो को प्यार ना बड़ों को इज्जत बस जो मोबाइल और टीवी से सीख रहे उसे ही अपना रहे हैं और यही हमें लगातार पतन की ओर लेकर जा रही है।

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5.ध्यान की कमी और मन का भटकाव (lack of attention and distraction) –

मोबाइल का अधिकता में उपयोग ने हमारे ध्यान में बहुत ज्यादा कमी लाने का काम किया है, जैसे अगर हम पूजा करते रहें और हमारे मोबाइल की घंटी अगर बज जाए तो हमारा ध्यान पूजा को छोड़ किसका फोन आर रहा इसमें चला जाता है जिसकी वजह से हमारी भक्ति का मोल वहाँ खत्म हो जाता है, वैसे ही अगर हम खाना खाते रहें और मोबाइल पास में है और किसी का मैसेज आया हो तो हम बिना देरी किए खाते उसे देखने लग जाते, अब तो खाना खाते-खाते मोबाइल चलाने का भी चलन सा हो गया है जो की कब्ज, मोटापे और बीमारियों की जड़ बन चुकी है। और अगर हम खाना खा रहे और हमसे दूर मोबाइल की घंटी बज रही है तो हमें लागने लगता है, अरे किसका फोन है क्यूँ कर रहा होगा, और हमारा ध्यान फिर खाने से हटकर मोबाइल में लग जाता है। और अब अगर आपको किसी से बातें करना अच्छा लगता हो तो आप कोई काम में मन नहीं लगा सकते और आपका मन तब तक भटकता रहेगा जब तक की आप मोबाइल को अपने हाथों में ना ले लें।

6.जिद से जिंदगी बर्बाद (life is ruined by stubbornness)-

कई बार हमें कोई चीज या कोई इंसान भी हो सकता जो हमें काफी पसंद आ जाता है और उसे पाने के लिए कई बार हम मोबाइल में बताए गए विडियो में, या वेब सीरीज में या किसी सिरियल के एपिसोड से प्रोत्साहित
हो कर अपनी ज़िद पूरी करने के लिए गलत कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटते हैं, और यही चीज हमें जेल तक भेजवा सकती है जो की हमारी पूरी जिंदगी खराब करने के लिए काफी है।

7. प्रकृति और भावनाओं के साथ खिलवाड़ (Playing with nature and emotions)-

आज कल हम स्टेटस अपलोड करने में माहिर हो गए हैं, इधर छींक आयी नहीं की फीलिंग ईल (Ill) का स्टेटस लग गया उसी प्रकार हमें विश्व पर्यावरण दिवस पर यह भी दिखाना होता है की हमने पौधे लगाएँ हैं और कर दी फोटो अपलोड अब इसके बाद पौधा मरे या जिये इससे हमें कोई भी मतलब नहीं होता है हमें तो बस कैमरे में फोटो चाहिए होती है और यही चीज तो हमारे संस्कार को बताती है और यह भी की हम कितने मतलबी
हो चुके हैं। ऐसे ही हम किसी गरीब व्यक्ति को कुछ देते हैं तो फोटो खिचाते हैं की हमने इस व्यक्ति की मदद की है जिससे उस व्यक्ति की भावनाओं को भी ठेस पहुँचती है बस यही है मोबाइल की ताकत जो लड़ाई भी करवा सकती है और दोस्ती भी, जो प्यार भी बढ़ा सकती है और नफरत भी जो हमारे गलत इरादों को भी अंजाम देने की ताकत रखती है और सही इरादों को भी।

मोबाइल का उपयोग करते करते इंसान अवसाद में जा रहा है , मानसिक बीमारियों से ग्रस्त हो रहा है, कोई भी गलत कदम उठाने से नहीं चूक रहा है, अपनी मर्यादा और संस्कारों को भूलता जा रहा है। पहले हम अपनी समस्याओं को अपने घरवालों से और दोस्तों से साझा किया करते थे अब हर समस्या का हल हम मोबाइल से लेते हैं जो कई बार हमें गलत रास्तों पर लेकर चला जाता है, और इसी लिए मोबाइल जल्द ही एक मुक हत्यारे की श्रेणी में आ सकता है। इसलिए मोबाइल का उपयोग अवश्य करें लेकिन दुरुपयोग नहीं।

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