October 5, 2022

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सुगंधित तेलों का भाप के साथ उपयोग |Sugandhit telon ka bhap ke sath upyog

sugandhit telon ka bhap ke sath upyog-korona se wale swashan sankraman, asthma aur chronic obstructive pulmonary disease men prabhavi

सुगंधित तेलों (Essential oils) का भाप के साथ उपयोग – कोरोना से होने वाले श्वसन संक्रमण, अस्थमा और क्रोनिक ओब्सट्रकटिव पल्मोनरी डिसिस (COPD)में प्रभावी|sugandhit telon ka bhap ke sath upyog-korona se wale swashan sankraman, asthma aur chronic obstructive pulmonary disease men prabhavi

 

हम में से कई लोग प्रकृति प्रेमी होते हैं, उन्हें पौधे लगाना उसके बारे में जानना काफी अच्छा लगता है। प्रकृति ने हमें जीवन जीने के लिए सभी आवश्यक संसाधन स्त्रोत प्रदान किए हैं। जब हमारे बीच कोरोना जैसी महामारी आयी थी तब भी हम इस प्रकृति द्वारा पार्डन किए का औषधीय पौधों के विभिन्न भागों का उपयोग काढ़े के रूप में किया है जिसने हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत तो किया ही है, साथ ही हमें कोरोना जैसी महामारी से बचने में हमारी सहायता भी की है। हमारी प्रकृति में पौधों के ऐसी बहुत सी प्रजातियाँ पायी जाती हैं, जिनमें औषधीय गुण मौजूद होते हैं, पर आज हम बात करने वाले हैं कुछ ऐसे सुगंधित पौधों (Aromatic plants) की जिनमें कुछ ऐसे तेल (Essential oil) पाये जाते हैं, जिनमें प्रभावी रूप से विभिन्न प्रकार के श्वसन संक्रमण, अस्थमा और क्रोनिक ओब्सट्रकटिव पल्मोनरी डिसिस (COPD)जैसी बीमारियों से बचाने की क्षमता पायी गयी है।

1.नीलगिरी का तेल –

नीलिगरी की तेल की खुशबू किसे पसंद नहीं होती , चाहे फिर वह मेहंदी का रंग ज्यादा गाढ़ा करने में उपयोगी ही हो। लेकिन शोधों से हमें यह पता चला है की नीलगिरी का तेल जो की एक सुगंधित(Essential oil) तेल है , इसमें कुछ ऐसे तत्व पाये जाते हैं जिनमें एंटिमाइक्रोबियल, एंटिफंगल और एंटिसेप्टिक गुण मौजूद होते हैं। अपने इन्हीं गुणों की वजह से भाप का सेवन अगर नीलीगीरी के तेल के साथ किया जाए तो यह हमें कई श्वशन रोगों से जैसे अस्थमा, क्रोनिक ओब्सट्रकटिव पल्मोनरी डिसिस (COPD)से हमें बचाता है। इसके अलावा यह सौन्दर्य प्रसाधनों में , इत्र में भी उपयोग में लाया जाता है। कई शोधों और अध्ययनों से यह पता लगा है की यह खतरनाक कोविड-19 वायरस से होने वाले श्वशन तंत्र के संक्रमण से बचाता है, और साथ ही इस वायरस की वृद्धि को रोकने में भी काफी प्रभावी है। इसलिए इसका सेवन हम भाप में कर सकते हैं, जो की एक आसानी से उपलब्ध होने वाला विकल्प है। इसका उपयोग एरोमाथेरेपी में भी किया जाता है, यह स्ट्रैस को कम करने में कारगर है।

2. लहसुन –

लहसुन जो हम खाने में उपयोग में लाते हैं, आचार में उपयोग में लाते हैं, सब्जी में बिना लहसुन के स्वाद ही नहीं आता। लहसुन हमारे रक्तचाप को संतुलित रखता है। लहसुन में भी सुगंधित(Essential oil) मौजूद होते हैं ,साथ ही इसमें औरगेनोंसल्फर (Organosulfar) नमक तत्व मौजूद होते हैं। शोधों के अनुसार यह तत्व कोरोना वायरस की वृद्धि को रोकने में काफी प्रभावी है। गार्लिक ऑइल में दो तत्व एललाइल डाइ सलफाइड और (allyl disulfide and allyl trisulfide)एललाइल ट्राई सलफाइड ऐसे दो तत्व हैं, जो कोरोना वायरस को रोकने में काफी प्रभावी है। इसके अलावा लहसुन में एंटि-ट्यूमर, एंटि-कैंसर, एंटि-डायबिटिक, एंटि-माइक्रोबियल और एंटि-वायरल गुण मौजूद होते हैं। लहसुन हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को भी बढ़ाने में काफी प्रभावी है, इसलिए नियमित रूप से इसका सेवन करना चाहिए। यह शरीर में बढ़े हुए कॉलेस्ट्रोल लेवल को भी संतुलित रखता है।

3.अजवाइन –

अजवाइन पाचन के लिए काफी अच्छा होता है, साथ ही शरीर में खून को साफ रखने में भी प्रभावी है। अजवाइन के तेल को हम थाइम ऑइल के नाम से भी जानते हैं, इसमें एंटि-वायरल, एंटि-इन्फ्लामेटरी, एंटीलेशमैनियल और एंटीकैंसर गुण मौजूद होते हैं। कई शोधों में यह पाया गया है की अजवाइन के तेल में कोरोना वायरस को रोकने की क्षमता पायी गयी है। थायमोल अजवाइन में पाया जाने वाला एक मुख्य तत्व है जिसमें एंटीसेप्टिक, एंटिफंगल, एंटीवायरल, एंटीस्पास्मोडिक,एंटी-कैंसर, एंटी हाइपरलिपिडेमिक, एंटी-हाइपरग्लाइसेमिक और एंटीऑक्सिडेंट गुण मौजूद होते हैं। अजवाइन का सेवन हमारे लिए काफी फायदेमंद है, यह हमारी त्वचा को स्वस्थ रखने , वजन को कम करने में और कॉलेस्ट्रोल को संतुलित करने में प्रभावी है।

4.तेजपत्ता –

अक्सर यह हमारे घरों की रसोई में पाया जाता है। सब्जी हो या फिर पुलाव , यह हमारे खाने का भी स्वाद बढ़ाता है। तेजपत्ते की खुशबू इसमें पाये जाने वाले सुगंधित (Essential oil) तेल की वजह से होती है । शोधकर्ताओं के अनुसार तेजपत्ता में कोविड वायरस के विपरीत विषाणुनाशक (Virucidal) गतिविधि पायी गयी है। साथ ही इसमें एंटि-इन्फ्लामेटरी गतिविधि भी पायी गयी है। इन दोनों ही गतिविधियों की वजह से यह श्वशन तंत्र के संक्रमण रोगों में प्रभावशाली पाया गया है।

5. लेमन बाम-

लेमन बाम की पत्तियों का उपयोग प्रायः हर्बल दवाइयों में किया जाता है। इसकी पत्तियों में एरोमा मौजूद होता है जो की सुगंधित(Essential oil) तेल की वजह से होता है। अक्सर इसकी पत्तियों का उपयोग नींद को सामान्य रखने, दिमाक को शांत रखने और तनाव को कम करने में और पाचन को सही रखने और भूख बढ़ाने में उपयोगी है। शोधकर्ताओं के अनुसार इसकी पत्तियों में कुछ ऐसे तत्व पाये गए जिनमें कोरोना वायरस में मौजूद प्रोटीज और स्पाइक प्रोटीन के विपरीत संभावित गतिविधि देखी गयी है।

6.गुलमेहंदी –

गुलमेहंदी की पत्तियों में भरपूर मात्रा में एंटि-आक्सिडेंट पाया जाता है। शोधों के अनुसार इसमें कई समस्याओं जैसे मांसपेशियों की ऐंठन को कम करने और कॉलेस्ट्रोल को कम करने की क्षमता पायी गयी है। साथ ही इसमें एंटि-कैंसर, एंटि-वायरल, एंटि-बैक्टीरियल और एंटि-इन्फ्लामेटरी एक्टिविटी पायी गयी है। इसके अलावा शोधकर्ताओं ने कोरोना वायरस के विपरीत भी इसे प्रभावी बताया है।

हम इन सभी पौधों के सुगंधित(Essential oil) तेल को स्टीम के साथ ले सकते हैं। लेकिन कई लोगों को स्टीम के साथ इनका सेवन करने से तकलीफ महसूस होती है। तो जिसे इनसे किसी प्रकार की एलर्जी नहीं हैं वो इसका करने से पहले चिकित्सक की राय अवश्य लें। यह हमें सर्दी से भी राहत देता है, साथ ही श्वशन के संक्रमण में भी प्रभावी है अतः जो भी ऐसे संक्रमण से पीड़ित हैं वह भाप के साथ इन सुगंधित(Essential oils) तेलों का उपयोग कर सकते हैं, और यह कोरोना वायरस से होने वाले संक्रमण में भी सहायक की तरह उपयोगी है। इसके खाने में उपयोग होने वाली जैसे लहसुन, तेजपत्ता और अजवाइन का उपयोग खाने में भी करना बहुत लाभदायक है।

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