हार्ट अटैक क्या है, कारण, लक्षण एवं बचने के उपाय|Heart attack kya hai, kaaran, lakshan evam bachne ke upaye

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5 हार्ट अटैक से बचने के उपाय (How to avoid heart attack)-
5.1 1.कम से कम छः महीने (6 month) में एक बार नियमित जाँच (Routine checkup) कराएँ। 2.खाने में परहेज करें मतलब फास्टफूड, जंकफूड और फैट (Fat) वाली चीजों का ना के बराबर ही सेवन करें। 3.नियमित रूप से व्यायाम, योगा और शारीरिक गतिविधियाँ करें। 4.खाना खाने के तुरंत बाद बैठने और सोने से बचें, पाचन को सही और संतुलित रखें। 5.अत्यधिक खाना खाने से बचें। 6.सांस लेने या थोड़ा सा भी काम करने या चलने में अगर सांस फूलने लगे या सांस लेने में कठिनाई हो और आराम ना हो तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें। 7.मधुमेह और उच्च रक्तचाप को संतुलित बनाए रखना क्योंकि मधुमेह जैसी बीमारी बैड कॉलेस्ट्रोल की मात्रा को बढ़ाती है, एंटीओक्सीडेंट्स (Antioxidents) से भरपूर फलों का सेवन करना। 8.पानी का भरपूर मात्रा में सेवन करना। 9.खाने में विटामिन, प्रोटीन और फाइबरयुक्त भोजन का सेवन करें।

हार्ट अटैक क्या है, कारण, लक्षण एवं बचने के उपाय (What is a heart attack, what causes, symptoms, and ways to avoid it)

आज हमारे सामने हार्ट अटैक की कई ऐसी घटनाएँ सुनने को मिल रही है, जो हमें अंदर तक जकझोर दे रही है । कम उम्र में ही लोग आजकल इसका शिकार हो रहे हैं। इसका कारण क्या है, क्यों आज हार्ट अटैक जैसी समस्या कम उम्र के लोगों में भी देखने मिल रही है। यह एक बेहद गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है, आज सबके मन में यही सवाल है की क्यों यह कम उम्र के पड़ाव में ही देखने को मिल रहा है। हार्ट अटैक एक ऐसी जानलेवा स्थिति है जिसमें अगर जल्द ही कोई उपाय ना किए गए या सही समय पर उपचार ना मिला तो यह सीधे व्यक्ति की जान ले सकता है। हार्ट अटैक इतना आकस्मिक होता है की किसी व्यक्ति को सोचने- समझने का मौका ही नहीं मिलता, ना पीड़ित व्यक्ति को ना उसके परिवार वालों को। चंद सेकंड का समय ही कई बार हार्ट अटैक से पीड़ित व्यक्ति के लिए घातक साबित हो जाता है। आज हम इसी पर चर्चा करेंगे की हार्ट अटैक क्या है, इसके कारण, लक्षण एवं बचने के उपाय क्या-क्या हैं।

हार्ट अटैक क्या है (What is heart attack) –

हम अगर कभी सांस ना ले पाएँ तो क्या होगा , हमारी जान जा सकती है, बस इसी तरह जब हमारे हृदय को संतुलित मात्रा में रक्त नहीं पहुँच पाता या अवरोध उत्पन्न होता है , क्योंकि हमारे रक्त में ऑक्सीजन मौजूद होता है,और अगर हमारे हृदय को रक्त नहीं मिलेगा तो ऑक्सीजन भी नहीं मिलेगी, जिसकी वजह से हृदयघात या हार्ट अटैक आता है। कई बार इसकी वजह ब्लड क्लौटिंग (Blood Clotting)भी हो सकती है।

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हार्ट अटैक के कारण (Causes of heart attack)-

कई बार व्यक्ति दिखने में काफी स्वस्थ दिखता है, लेकिन कई बार यह केवल भ्रम होता है। जैसे हम अगर हृदयघात की ही बात करें तो इंसान देखने में लगता है की सब ठीक है, लेकिन वह हार्ट अटैक का शिकार हो जाता है, और तब हमारे मन में यह विचार आने लगते हैं की अरे यह कैसे संभव है, कल ही तो व्यक्ति को हमने स्वस्थ देखा था, आज कैसे यह हो सकता है। हम कई बार इसे स्वीकार ही नहीं पाते। आप ने भी हाल में ही कई ऐसे उदाहरण देखे होंगे। कौन से वह कारण हैं जो हृदयघात या हृदय रोगों को बढ़ावा देते हैं-

1.धूम्रपान (Smoking) –

अक्सर धूम्रपान या मादक पदार्थों पर एक चेतावनी लिखी होती है, जिसे हम पढ़ के भी अनदेखा करते हैं। धूम्रपान एक ऐसी आदत है जो ना सिर्फ हृदय रोगों को बढ़ावा देती है बल्कि यह कैंसर जैसे भयानक रोग का भी शिकार हमें बना देती है। सिगरेट, तंबाखू एवं अत्यधिक मात्रा में शराब का सेवन हमारे शरीर में बैड कॉलेस्ट्रोल को बढ़ावा देती है, और गुड कॉलेस्ट्रोल की मात्रा को कम कर देती है जिसकी वजह से बैड कॉलेस्ट्रोल हमारी रक्त लसिकाओं (Blood vessels) में जमना शुरू कर देता है और प्लैक (Plaque)बनाना शुरू कर देता है, और यह रक्त के प्रवाह में अवरोध उत्पन्न करने लगता है जिसको वजह से कार्डियक अरैस्ट (Cardiac arrest)की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए किसी भी प्रकार के नशे से बचें।

2.उच्च वसा (High fat) –

आज का युवावर्ग जंकफूड, फास्टफूड या फिर मसाले वाले भोजन से ज्यादा कुछ सोच नहीं पाता। मैदे से बनी चीजों का सेवन, अत्यधिक मात्रा में चीज, बटर, तेल का सेवन, हरी सब्जियाँ, साग और सादा भोजन तो जैसे भूल ही गए हों। ज्यादा फैट वाली चीजें जैसे चिकन, मटन का अधिकता में सेवन, इस प्रकार के भोज्य पदार्थ हमारे शरीर में फैट और बैड कॉलेस्ट्रोल को बढ़ावा देने के लिए बहुत है। ऐसे भोज्य पदार्थ हमें फायदे नहीं पहुंचाते अपितु हमें बीमार बनाते हैं। यह हमारे शरीर में धूम्रपान की ही तरह फैट के जमाव को बढ़ावा देते हैं, जो हमारे लिए हृदयघात का खतरा बन जाती है, क्योंकि फैट के जमाव से रक्त लसिकाओं का आकार सकरा होने लगता है जिससे रक्त को हृदय तक और वहाँ से पूरे शरीर में पहुँचने में अवरोध का सामना करना पड़ता है। और इसी अवरोध के चलते हृदय को पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं मिल पाता और ना ही ऑक्सीजन की पूर्ति हो पाती है और यह हृदयघात की एक बढ़ी वजह होती है।

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3.योगा, व्यायाम या शारीरिक गतिविधियों की कमी (Lack of yoga, exercise, or physical activity) –

जैसा की हम सभी जानते हैं की हैं हमें जितनी मात्रा में ऊर्जा की जरूरत होती है उतनी ही ऊर्जा हमें लेनी चाहिए, वैसे ही अगर आपने जरूरत से ज्यादा खाने का सेवन किया है, तो उससे ऊर्जा और अन्य पोषक तत्व भी मिलेंगे ,और अत्यधिक मात्रा में किसी भी चीज का सेवन हमारे लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए जिस हिसाब से आप खाना खाते हैं उस हिसाब से उसे पचाइए भी ताकि सारे पोषक तत्व आपके शरीर में अच्छे से अवशोषित हो सकें, और वसा, चर्बी या बैड कॉलेस्ट्रोल हमारी रक्त लसिकाओं में जमा ना हो, और हम हृदयघात के साथ ही और भी अन्य बीमारियों से बचें। अपनी दिनचर्या में नियमित रूप से योग और व्यायाम को शामिल करिए और जितनी शारीरिक गतिविधियां आप कर सकते हैं, जरूर कीजिये।

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4.उच्च रक्तचाप और मधुमेह (Blood pressure and diabetes) –

आज के समय में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कैंसर जैसी बीमारियाँ काफी आम बात हो गयी हैं, और यह साथ ही अन्य बीमारियों को भी बढ़ावा देती हैं। उच्च रक्तचाप हृदयघात को बढ़ाने में अपनी भूमिका निभा सकता है। मधुमेह में हमारे शरीर में फ्री रैडिकल्स ज्यादा मात्रा में बनते हैं, जो हमारी स्वस्थ कोशिकाओं को काफी नुकसान पहुँचाती, जिसकी वजह से हम कई बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं, क्योंकि अगर हमारी कोशिकाएं स्वस्थ नहीं होंगी तो वह काम भी अच्छे से नहीं करेंगी और हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली भी कमजोर पड़ जाती है, जो बीमारी की वजह बनती हैं।

5.जीवनशैली (Routine) –

हमारी जीवनशैली , हमारा रहन-सहन और हमारा खान-पान हमें स्वस्थ रखने में बहुत ही महत्वपूर्ण भुंकीय निभाता है। आजकल लोगों के खाने का समय गलत हो गया है, जंकफूड, फास्टफूड अधिकता में खा रहे, जिसके लिए ना कोई समय देखते हैं ना मात्रा। शास्त्रों के अनुसार हमें सूरज उगने से लेकर ढलने तक खाने के समय और मात्रा का ध्यान देना चाहिए। आपको यह पता होना चाहिए की कब कसी समय पर क्या खाना चाहिए क्या नहीं। खाने के बाद तुरंत सोना, खाने के बाद तुरंत कुर्सी पर बैठ जाना या कोई भी शारीरिक गतिविधियां ना करना, अवश्य ही बीमारियों को बढ़ावा देती हैं, अब जिस मात्रा में आपने भोजन लिया है अगर वो सही तरीके ना पचे तो उसका जमाव कहीं ना कहीं तो शरीर में होगा ही। इसलिए अपनी जीवनशैली को अच्छा रखे, धूम्रपान से दूर रहें, योगा और व्यायाम अवश्य करें, जुंकफूड, मैदे से बनी चीजों के सेवन से बचें, जितना संभव हो सके हरी सब्जियों, फलों, दालों और फाइबरयुक्त भोजन को अपने खाने में जगह दें।

6.रक्त का जमाव (Blood clotting)-

धमनियों में रक्त का जमाव या Blood clotting होना हृदयघात का एक कारण हो सकता है, क्योंकि इसकी वजह से भी हृदय (Heart) को पर्याप्त मात्रा में रक्त (Blood)
नहीं मिल पाता, और यह भी हृदय घात (Heart attack) का कारण हो सकता है।

7.अत्यधिक खाने का सेवन (Overeating) –

अत्यधिक मात्रा में खाने का सेवन भी हमारे शरीर में मोटापे और कॉलेस्ट्रोल (Cholesterol) की मात्रा को बढ़ा सकता है , जो हृदयरोग को बढ़ावा देते हैं। इसलिए खाना सीमित एवं संतुलित मात्रा में ही खाएँ।

इसके अलावा कुछ अन्य कारण जैसे रक्त (Blood) में ऑक्सीजन की कमी होना, किसी तरह का शॉक जैसे रक्तचाप का अचानक कम हो जाना और हृदय को संतुलित मात्रा में रक्त और ऑक्सीजन का ना मिलना।

हार्ट अटैक के लक्षण (Symptoms of heart attack) –

हमारा शरीर कई बार हमें संकेत देता है, जब हमें कोई बीमारी होती है या किसी बीमारी से हम ग्रसित होने वाले होते हैं तो, लेकिन कई बार हम इसे अनदेखा कर देते हैं। कई बार हम हृदयघात के लक्षणों को गैस या एसिडिटि के लक्षण समझ कर अनदेखा कर देते हैं, क्योंकि हृदयघात के कुछ लक्षण कब्ज, गैस और एसिडिटि के लक्षणों से मिलते हैं। इसलिए हमें इन लक्षणों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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1.बाएँ हाथ से दर्द उठते हुए सीने तक दर्द जाना।
2.सीने में दर्द होना या दर्द बने रहना।
3.सीने में जकड़न महसूस होना, दबाव बने रहना ।
4.थोड़ा सा चलने में सांस ना ले पाना, या सांस फूलने लगना।
5.पसीना आना, बैचेनी महसूस होना।
6.चक्कर जैसा महसूस होना।
7.सांस लेने में तकलीफ होना या कठिनाई महसूस होना।
8.चिड़चिड़ापन या गुस्सा आना।

हार्ट अटैक से बचने के उपाय (How to avoid heart attack)-

हृदयघात या हार्ट अटैक (Heart attack) से बचने के लिए सबसे पहले शुरूआत हमें अपनी जीवनशैली से करनी पड़ती है, क्योंकि हमारी जीवनशैली ही हमें रोगों से बचाती है, इसलिए सबसे पहले हमें अपनी जीवन शैली को संतुलित करना होगा, इसके अलावा-

1.कम से कम छः महीने (6 month) में एक बार नियमित जाँच (Routine checkup) कराएँ।
2.खाने में परहेज करें मतलब फास्टफूड, जंकफूड और फैट (Fat) वाली चीजों का ना के बराबर ही सेवन करें।
3.नियमित रूप से व्यायाम, योगा और शारीरिक गतिविधियाँ करें।
4.खाना खाने के तुरंत बाद बैठने और सोने से बचें, पाचन को सही और संतुलित रखें।
5.अत्यधिक खाना खाने से बचें।
6.सांस लेने या थोड़ा सा भी काम करने या चलने में अगर सांस फूलने लगे या सांस लेने में कठिनाई हो और आराम ना हो तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें।
7.मधुमेह और उच्च रक्तचाप को संतुलित बनाए रखना क्योंकि मधुमेह जैसी बीमारी बैड कॉलेस्ट्रोल की मात्रा को बढ़ाती है, एंटीओक्सीडेंट्स (Antioxidents) से भरपूर फलों का सेवन करना।
8.पानी का भरपूर मात्रा में सेवन करना।
9.खाने में विटामिन, प्रोटीन और फाइबरयुक्त भोजन का सेवन करें।

प्राथमिक उपचार (First aid)-

कई बार व्यक्ति समझ नहीं पता की उसे हृदयघात या हार्टअटैक आने वाला है, लेकिन उसे सीने में दर्द उठना, पसीना आना, जी मिचलाना या अजीब लगना, सांस लेने में तकलीफ महसूस होना अगर ये सब लक्षण दिखें सबसे पहले उसे खुले स्थान पर जहाँ हवा पर्याप्त मात्रा में हो ले जाएँ, पानी पीने को दें, अगर चिकित्सक ने आपको एस्प्रिन (Asprin) या नाइट्रोग्लिसरीन (Nitrogylcerin या NTG)की टैबलेट दी हो तो तुरंत देर न करते हुए उस व्यक्ति को दें, और सीपीआर (CPR) देना तुरंत शुरू कर दें ताकि रक्त का प्रवाह बना रहे और कोशिकाओं को रक्त मिलता रहे, साथ ही एमेरजेंसी नंबर डायल कर या अपनी सुविधा से मरीज को तुरंत नजदीकी हॉस्पिटल में उपचार के लिए लेकर जाएँ। कई बार व्यक्ति को पहली बार में पता नहीं चल पता के उसे क्या हुआ , लेकिन शरीर में किसी भी प्रकार की तकलीफ अगर बनी हुई है तो उसे पहचाने और आवश्यक होने पर जाँच भी कराएँ।

बीमारी कोई भी हो उसकी शुरुवात हमारे रोजमर्रा की गतिविधियों से ही होती है इसलिए आहार से लेकर व्यवहार तक संतुलित रहें और खुद को स्वस्थ रखें।

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