सिजोफ्रेनिया – एक खतरनाक मनोरोग|Schizophrenia – a dangerous psychosis

सिजोफ्रेनिया – एक खतरनाक मनोरोग(Schizophrenia – a dangerous psychosis in Hindi)

मेरे प्यारे मित्रों आशा करती हूँ के आप सभी कुशल होंगे और हमेशा कुशल रहें यह भी। आज हम एक ऐसी गंभीर स्थिति के बारे में या कह लूँ बीमारी के बारे में बात करेंगे जो की दुर्लभ (Rare) भी होती है लेकिन जिसे होती उसके लिए तो यह घातक है ही साथ में उनके आसपास रहने वाले लोगों के लिए भी घातक है, अब आपको लग रहा होगा क्या मैं किसी फैलने वाली बीमारी के बारे में बात कर रही हूँ, जी नहीं बिल्कुल भी नहीं। यह बीमारी भारत में अगर मैं कहूँ तो एक हजार में से लगभग हर तीन व्यक्तियों को होती है। अब फिर आप सोच रहे होंगे की जब हजार में सिर्फ तीन लोगों को होती है तो खतरनाक कैसे, तो मैंने पहले ही बोला यह होने वालों के साथ-साथ उनके साथ रहने वालों के लिए भी खतरनाक है, अब कैसे वो हम आगे चर्चा करते हैं।

सिजोफ्रेनिया क्या है(What is schizophrenia-)-

सिजोफ्रेनिया एक ऐसा मनोरोग है जिसमें इंसान की सोचने-समझने की शक्ति और उसकी भावनाओं के बीच पूरी तरह रिश्ता खत्म कर देता है। व्यक्ति के बोलने, रहन-सहन, व्यवहार और बात करने के तरीके में बहुत बदलाव आ जाता है। सिजोफ्रेनिया में व्यक्ति अपनी एक अलग दुनिया में खो जाता है, और यह उसके स्वयं के द्वारा बनाई गयी दुनिया होती है, जिसमें उसे ऐसी चीजें दिखाई देती हैं और ऐसी आवाजें सुनाई देती हैं जिसका वास्तविकता से कोई रिश्ता ही नहीं होता है। और यह एक बहुत ही गंभीर बीमारी है, इसमें आप व्यक्ति के मानसिकता का बिल्कुल भी पता लगा सकते हैं, की व्यक्ति क्या बोलेगा, क्या करेगा, कब करेगा। सिजोफ्रेनिया से ग्रसित व्यक्ति को रह-रह कर दौरे आएंगे, मतलब वो कभी बहुत ज्यादा गुस्सा दिखा देगा, कभी बहुत प्यार दिखाएगा मतलब आप समझ नहीं पाएंगे के व्यक्ति का क्या व्यक्तित्व है।

हैलूसिनेशन (Hallucinations)- सिजोफ्रेनिया का एक प्रकार (Hallucinations – a type of schizophrenia)

आप सबने तमिल की एक मूवी जो की अलू अर्जुन की है जिसमें हमारे साउथ के महान कोमेडियन (Comedian)ब्रम्हानन्द जी सबको कई बार बोला करते थे, यह हैलूसिनेशन (Hallucinations)है और वह इसका चरण (Stage) भी बता कर कहते थे की जो होता है वो दिखता वो होता नहीं, और जो होता है वह दिखता नहीं मतलब की अगर मैं एक शब्द में कहूँ तो भ्मतिभ्रम। कई बार हमें भी भ्रम होता है, लेकिन वो क्षणिक होता है, लेकिन सिजोफ्रेनिया से ग्रसित व्यक्ति के लिए यह एक खुद के द्वारा निर्माण की गयी एक अलग दुनिया होती है, जिसमें उसे खुद के बनाए हुए लोग, खुद की बनाई हुई चीजें दिखती हैं, पर बाहर की जो दुनिया है जिसे भगवान ने बनाया है वो उसे ना ही दिखती है ना ही समझ आती है।

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यह स्थिति समान्यतः किसी खुशबू को लेकर हो सकती है, किसी तरह की आवाजों को लेकर हो सकती है या फिर किसी चीज को देखने मतलब दृष्टि के बारे में हो सकती है, लेकिन यह सब उसी व्यक्ति के साथ होगा जो की सिजोफ्रेनिया से ग्रसित होता है। जैसे की उदाहरण के तौर पर किसी ग्रसित व्यक्ति को किसी रोने की आवाजें हमेशा आती हों लेकिन एक सामान्य व्यक्ति जिसमें सोचने- समझने की क्षमता ना तो उसे यह आवाज नहीं सुनाई देती। तो बस यह एक सिजोफ्रेनिया से ग्रसित व्यक्ति की दुनिया हो सकती है , जिसमें वह धीरे-धीरे अपनी एक अलग दुनिया का निर्माण करने लगता है, जितना यह सुनने में अजीब, डरावना और घातक लग रहा है, असल जीवन में यह उससे भी खतरनाक सिद्ध हो सकता है।

सिजोफ्रेनिया के लक्षण (Symptoms of Schizophrenia)-

सिजोफ्रेनिया के लक्षणों को हम कई प्रकार से विभाजित कर सकते हैं जैसे-

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1.भ्रांति (Delusions)
2.मतिभ्रम या हैलूसिनेशन (Hallucinations)
3.असंगठित सोच या अत्यधिक असंगठित सोच (Disorganized thinking or Extremely Disorganized thinking)
4.नकारात्मक सोच या लक्षण (negative thinking or symptoms)

1.भ्रांति (Delusions)-

यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति को किसी ऐसी चीज पर विश्वास हो जाता है जो की असल जीवन में होता ही नहीं, मतलब की वास्तविकता से इसका दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं होता है। उदाहरण के तौर पर व्यक्ति को लगनेलगता है की उसे कोई नुकसान पहुँचा रहा, कोई उसे मारना चाहता है, कोई उससे प्यार करता है (व्यक्ति विशेष), या वह बड़ा आदमी बन गया है या फिर उस पर कोई बड़ी विपत्ति आने वाली है यह कुछ भी हो सकता है जो की भ्रांति (Delusions)के लक्षण हो सकते हैं।

2.मतिभ्रम या हैलूसिनेशन (Hallucinations)-

मतिभ्रम में व्यक्ति को कुछ विशिष्ट आवाजों का सुनाई देना या फिर कुछ चीजें दिखाई देना शामिल है, और यह सिजोफ्रेनिया ग्रसित व्यक्ति में हो होते हैं लेकिन इस प्रकार में व्यक्ति के पास भावना और सोचने-समझने की क्षमता होती है, लेकिन शरीर में मौजूद किसी एक इंद्री (senses) की वजह से यह चीजें व्यक्ति के साथ होती हैं। अगर हम देखें तो सबसे आम मतिभ्रम आवाजों का सुनाई देना है।

3.असंगठित सोच या अत्यधिक असंगठित सोच (Disorganized thinking or Extremely Disorganized thinking)-

हमें भगवान ने सोचने-समझने की शक्ति प्रदान की है, जिससे हम किसी व्यक्ति की बातों से उसके व्यवहार का कुछ हद तक अंदाजा लगा सकते हैं। सिजोफ्रेनिया से ग्रसित मनोरोगी की बातें कई बार आपको समझ नहीं आएँगी, मतलब बात करते समय अर्थहिन (Meaningless) शब्दों का उपयोग, किसी सवाल का जवाब कुछ हद तक या पूरी तरह उस जवाब से बिल्कुल भी संबन्धित ना हों। कई बार कोई कोई बात एक बार में बोलते हुए कई अर्थहिन शब्दों क उपयोग जो की बिल्कुल भी एक सामान्य व्यक्ति की समझ से परे हो। यह तो हो गया असंगठित सोच का बारे चर्चा बस इसी तरह अत्यधिक असंगठित सोच के भी कुछ लक्षण हैं, और यह सीधे हमारे न्यूरॉन्स (Neurons)
या मोटर (Motor system) से संबन्धित रहता है। इसमें बच्चों की तरह हरकतें करना, कोई अप्रत्याशित कार्य कर देना या अचानक उत्तेजित हो जाना , किसी की बातों का विरोध करने लगना, किसी अभद्र या गलत मुद्रा में रहना और साथ ही बेकार की बातें करना यहाँ तक की उग्र होकर कुछ भी अपशब्द बोलना जिस पर कोई संतुलन नहीं होता है।

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4.नकारात्मक सोच या लक्षण (Negative thinking or symptoms)-

इसे हम तनाव या डिप्रेसन का दूसरा रूप भी बोल सकते हैं, इसमें व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति पूरी तरह क्षीण (कम) हो जाती है। इसे ग्रसित व्यक्ति अपने काम पर ध्यान केन्द्रित नहीं कर पाता, लोगों के लिए मन में आक्रोश बढ़ने लगता है, बदले की भावना पलने लगती है, काम में रुचि कम होना, चीजों में आनंद ना आना और दूसरों की उपेक्षा करना और कई बार तो व्यक्ति इतना निराश हो जाता है किसी को मारने या खुद मरने पर उतारू हो जाता है। कई बार इंसान की सोच एक सामान्य व्यक्ति की सोच से बिल्कुल ही अलग हो जाती है, जैसे हम उदाहरण के तौर किसी साइको किलर (Psyco killer) को ले सकते हैं, जिसमें एक गलत चीज के लिए जुनून सवार
हो जाता है जो की एक सामान्य व्यक्ति से बिल्कुल अलग होता है और यह दुनिया के लिए भी खतरनाक साबित होता है।

इन लक्षणों से आप समझ ही गए होंगे की यह व्यक्ति के लिए भले दुर्लभ मनोरोग है लेकिन साथ ही यह अन्य व्यक्तियों के लिए भी उतना ही खतरनाक क्योंकि आप किसी व्यक्ति की मानसिकता का पता नहीं लगा सकते हैं।

सिजोफ्रेनिया के कारण (Causes of schizophrenia)-

किसी भी अध्यनों में सिजोफ्रेनिया के सटीक कारणों का अब तक पता नहीं लग पाया है और ना ही वैज्ञानिक इसके सटीक कारणों के बारे में अब तक कोई खोज कर पाएँ हैं। लेकिन क्कुह अध्यनों से यह पाता चला है यह व्यक्ति को आनुवांशिक, मानसिक, शारीरिक या फिर हमारे वातावरण या पर्यावरण में मौजूद कारकों के साथ की वजह से हो सकता है।

इसके अलावा देखा जाए तो यह एक तनावपूर्ण जीवन का भी परिणाम हो सकता है, अगर मैं विज्ञान की भाषा में कहूँ तो हमारे खाने, सोने, जागने, सोचने, खेलने, कूदने, हंसने या कोई भी शारीरक क्रिया बिना न्यूरोट्रांसमीटर्स (Neurotransmitters) के बिना नहीं होती है और ना ही बिना होर्मोंस (Hormones) के तो यह एक सामान्य व्यक्ति की सामान्य दिनचर्या को प्रभावित कर सकते हैं जैसे की उदाहरण के तौर पर डोपामिन (Dopamine) जो की एक न्यूरोट्रांसमीटर है , जो की हमारी याददाश्त, सोचने समझने की शक्ति, कम करने की शक्ति , एकाग्रता या आंदोलन करने जैसी चीजों को संतुलित करने का काम करता है, लेकिन अगर आनुवांशिक, मानसिक, शारीरिक या फिर हमारे वातावरण में मौजूद कारकों या तनाव की वजह से इसका संतुलन बिगड़ जाए तो व्यक्ति के साथ सिजोफ्रेनिया की स्थिति उत्पन्न होने लगेगी।

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इसलिए मानसिक रोग के एक महत्वपूर्ण कारकों में से हम एक कारक तनाव को भी मन सकते हैं।

उपचार (Remedy -) –

हम उपचार के तौर पर व्यक्ति को दवाइयाँ तभी दे सकते हैं जब सिजोफ्रेनिया का कारण कोई न्यूरोट्रांसमीटर या कोई हॉर्मोन्स हों तब हम इनके बारे में पता लगा कर इनके संतुलन को बनाए रखने के लिए चिकित्सक से परामर्श ले सकते हैं, लेकिन अगर यह आनुवांशिक या मानसिक हो तो आपको दवाइयों से ज्यादा अपने आप को तनाव से दूर रखने की जरूरत है और मेडीटेसन (Meditation) करने की जरूरत है , साथ ही अपनी दिनचर्या में सुधार जरूरी है, व्यायाम और योगा जरूर शामिल करें जिससे शरीर की सभी कोशिकाएं संतुलित और स्वस्थ रहें और मन में सकारात्मक्ता (Positivity) बनें रहे और व्यक्ति के सभी न्यूरोट्रांसमीटर्स (Neurotransmitters)संतुलित रहें ताकि व्यक्ति सिजोफ्रेनिया जैसे मनोरोग से बच सके।

मेडिटेसन की शक्ति (The power of meditation)-

मेडिटेसन के बारे में मैं आपको अपने अनुभव से कहना चाहूंगी की इसमें बहुत ज्यादा शक्ति है, अगर आप इसे सुबह या शाम में शांत मन से करें तो आपके शरीर के आधे से ज्यादा रोग खत्म हो जाएंगे। मेडिटेसन की वजह से आपको हर व्यक्ति अच्छा ही लगेगा, आप लोगों में बुराइयाँ खोजना बंद कर देंगे, आप अपने जीवन में आनंद महसूस करने लगेंगे और जब यह सब समस्याएँ ही नहीं रहेंगी तो आपके भी न्यूरोट्रांसमीटर्स (Neurotransmitters) संतुलित रहेंगे और किसी भी तरह के मानसिक रोग से बचेंगे। अगर आपके आसपास कोई ऐसा व्यक्ति हो जिसका व्यवहार बदल रहा हो जो की आपको अनुचित लगे उसे मेडिटेसन करें की सलाह अवश्य दें, आप उसमें बदलाव
खुद देखेंगे।

बाकी ऐसे लक्षणों को देखते हुए भी नजरअंदाज ना करें, और चिकित्सक के परामर्श को लेते हुए जीवन शैली में बदलाव करें, तनाव से बचें और योग, व्यायाम और मेडिटेसन की सलाह अवश्य दें और खुद भी इसे अपनाएं।

कई बार हमें हमारी गलत आदतें ही हमारे लिए बीमारियों का कारण बनती हैं, अगर हम हमारी दिनचर्या को सही रख कर और साथ में योगा, व्यायाम और मेडीटेशन करें तो हम एक स्वस्थ्य जीवन और लंबी उम्र पा सकते हैं।

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