October 5, 2022

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मुहाँसे (Acne) क्या हैं, प्रकार, कारण एवं कुछ आसान घरेलू उपचार | What are acne, types, causes, and some easy home remedies

Muhase kya hai,prakar,kaaran evam kuch aasaan gharelu upchar
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Muhase kya hai, prakar,kaaran evam kuch aasaan gharelu upchar

दोस्तों आज के समय में कई लोग मुहाँसों के चलते बड़ी तकलीफ में रहते हैं। यह मुहाँसे हमारे चेहरे को तो खराब करते ही करते हैं, लेकिन इसकी वजह से कई बार हमारे अंदर आत्मविश्वास की भी कमी हो जाती है, क्योंकि हमारा चेहरा इन मुहाँसों की वजह से बने हुए दाग की वजह से खराब दिखने लगता है, और इसके चलते हम अपने मुहाँसों को छुपाने की कोशिश करने में लग जाते हैं और कई बार यह खुद में हीनभावना का भी कारण बन जाती है। जिस चेहरे को हम बार-बार शीशे में निहारते हैं, मेकअप से अपनी खूबसूरती में चार-चाँद लगाते हैं, लेकिन जब इसी चेहरे पर किसी तरह के दाने या मुहाँसे निकाल आए तो बड़ी तकलीफ होती है ,और इस तकलीफ के साथ- साथ हमारी मानसिक स्थिति पर भी गहरा असर होने लगता है। हमें लगने लगता है की हमें घर से कहीं बाहर जाना न पड़े, न कोई हमारा Acne या Pimples से भरा चेहरा देखे। और ये मुहाँसे किसी को भी, कभी भी 18, 21, 25 या फिर 30 साल की उम्र में भी हो सकते हैं। मुहाँसे एक ऐसे बिन बुलाये मेहमान की तरह होते हैं, जो एक बार आ जाएँ तो जल्दी जाने का नाम ही नहीं लेते और हम इस इंतज़ार में लग जाते हैं, की ना जाने तुम कब जाओगे?

मुहाँसे (Acne, Pimple) क्या हैं-

अगर हम इसे सरल भाषा में समझें तो मुहाँसे (Acne, Pimple) त्वचा से संबन्धित एक ऐसा संक्रमण(Infection)है जो हमारी त्वचा में उपस्थित तेल ग्रंथियां (Oil glands)के अधिक सक्रिय होने की वजह से छोटे छोटे दानें के रूप मे निकाल आते हैं। इन तेल ग्रंथियों से निकालने वाले तेल को हम सीबम(Sebum)के नाम से भी जानते हैं, जब ये तेल अत्यधिक मात्रा मे निकलने लगता है तो यह हमारी त्वचा में उपस्थित मृत कोशिकाओं (Dead Cell)के साथ मिलकर हमारे रोमछिद्रों (Pores) को बंद कर देता है, जिससे उस जगह पर बैक्टीरिया (Bacteria) पनपने लगते हैं और संक्रमण उत्पन्न करने लगते हैं, और यह प्रक्रिया मुहाँसों को जन्म देती है। यह आवश्यक नहीं है की सिर्फ तेल ग्रंथियों के अधिक सक्रिय होने से ही यह मुहाँसे निकलते हैं, अपितु अगर हमारी इन ग्रंथियों से समान रूप से तेल(Sebum)का स्त्राव ना हो, या बहुत कम हो तब भी ये हमारे मुहाँसों का कारण बन सकते हैं। इसलिए हमारी त्वचा में या हमारे शरीर में उपस्थित सभी प्रकार की ग्रंथियों का संतुलित रूप से कार्य करना अतिआवश्यक है। अतः अगर हमारी तेल ग्रंथियों (oil glands) का संतुलन सही ना हो तब भी हम मुहाँसों के शिकार हो सकते हैं।

मुहाँसों के प्रकार (Types of Pimples, acne) –

मुहाँसे प्रायः चार प्रकार के होते हैं-

1.कोमेडो (Comedo) –

इस प्रकार में blackheads (खुले हुए त्वचा के रोमछिद्र) या whiteheads (बंद हुए त्वचा के रोमछिद्र) या फिर हमारी त्वचा से निकलने वाले तेल की वजह से हमारे केश कूप (hair follicles) का बंद हो जाना, मृत कोशिका (Dead cells) और बैक्टीरिया (Bacteria) द्वारा संक्रमण होना कोमेडो (मुहाँसे का एक रूप) कहलाता है।

2.पुटी (Cyst) –

पुटी (Cyst) मवाद (pus) से भरी एक ऐसी संरचना होती है,जो फोड़े के समान दिखती हैं। पहले यह देखने में हल्के गुलाबी रंग के दिखते हैं और धीरे-धीरे बड़े होने लगते हैं और उनमें मवाद (pus) बनने लगता है, इसमें बहुत दर्द होता है। और यह अपना निशान भी गहरा छोड़ते हैं।

3.गाँठ (Nodule) –

यह pimplesका एक बहुत ही गंभीर प्रकार है , इसमें त्वचा पर गाँठें बनने लगती हैं और यह बहुत बड़े और कठोर होते हैं और यह भी अपना गहरा निशान छोड़ देते हैं।

4.दानें (Papules) –

यह छोटे ,उभरे हुए ठोस(hard)दानें होते हैं जो त्वचा पर बन जाते हैं, इनमें मवाद(pus)नहीं बनता लेकिन सूजन बनी रहती है।

कारण (Causes) –

वैसे तो मुहाँसे होने के कई कारण हो सकते हैं,पर उनमें से सबसे से मुख्य कारण हमारा गलत खान-पान, गलत जीवनशैली और उसकी वजह से होर्मोन्स का असंतुलित होना है।

1.हॉर्मोन्स असंतुलन (hormonal imbalance) –

हमारे शरीर में या हमारी त्वचा में कभी भी किसी प्रकार के रोग या संक्रमण होने का मुख्य कारण हमारे शरीर में उपस्थित ग्रंथियों के असंतुलित होने की वजह से भी होते हैं, जैसे अगर हमारे शरीर मे इंसुलिन (insulin) का स्त्राव सही मात्रा में ना हो तो हम sugar (diabetes) के मरीज हो सकते हैं। वैसे ही अगर हमारी तेल ग्रंथियाँ उचित रूप से तेल (sebum) का स्त्राव ना करें तो हम मुहाँसों से ग्रसित हो सकते हैं। कई बार यह गर्भावस्था के दौरान भी महिलाओं को hormonal imbalanceकी वजह से भी हो जाते हैं।

2.खान-पान एवं आहार (Diet) –

आज की हमारी जीवनशैली में हम संतुलित भोजन को छोड़कर कई बार असंतुलित भोजन जैसे मैदे से बनी हुई चीज, बहुत ज्यादा तेल में तले हुए चिप्स, मिर्च-मसालों का बहुत ज्यादा सेवन करने लगते हैं,और गलत समय पर भी कई चीजों का सेवन करते हैं जैसै रात में खाने के बाद आइसक्रीम खाना, पिज्जा,चाउमीन, मंचुरियन, बर्गर का अधिकता में सेवन करना भी हमें मुहाँसों से ग्रसित कर सकता है।

3.जीवाणु संक्रमण (bacterial infection) –

मुहाँसों की समस्या का एक मुख्य कारण हमारी त्वचा पर जीवाणुओं (bacteria)का संक्रमण भी होता है। इसकी वजह से हमारे चेहरे पर लाल दानें उभर आते हैं जो बड़े भी हो जाते हैं, और जिनको छुने से दर्द होता है।

4.मानसिक तनाव (Mental stress) –

यह भी हमारे मुहाँसे होने का एक प्रमुख कारण है, क्योंकि ज्यादा तनावपूर्ण जीवनशैली हमारे हॉर्मोन्स को असंतुलित अवस्था में पहुँचाने का कार्य करतीं हैं। यह ही नहीं आप इसके चलते और कई अन्य बीमारियों के शिकार हो सकते हैं,इसलिए तनावरहित जीवन जीयें।

5.तेल ग्रंथियों में अवरोध एवं असंतुलन (Blockage and imbalance in oil glands) –

जब तेल ग्रंथियों से तेल(sebum)का अधिकता में स्त्राव होने लगता है, तो ये हमारे रोमछिद्रों को मृत कोशिकाओं के साथ मिल कर इसे बंद कर देता है जिससे मुहाँसे निकाल आते हैं। और इन तेल ग्रंथियों के निष्क्रिय होने से भी हम मुहाँसों से ग्रसित हो जाते हैं। अतः तेल ग्रंथियों में अवरोध या असंतुलन हमारे लिए इनका कारण बन सकता है।

6.पानी की कमी (Lack of water) –

हमारे शरीर में होने वाली क्रियाओं के पश्चात बहुत से हानिकारक तत्व एवं अपशिष्ट पदार्थ बनते हैं, जिन्हें हम पानी की सहायता से बाहर करते हैं और हमारे शरीर में उपस्थित होर्मोंस के कण भी पानी में ही घुलते हैं, लेकिन पानी की कमी होने पर यह होर्मोंस के कण अच्छे से नहीं घुल पाते और न ही हमारा शरीर hydrateरहता और फिर इसकी वजह से हमारे शरीर में सभी चीजें असंतुलित होने लगती हैं।

7.भोजन का पाचन (Digestion of food) –

अगर हमारे द्वारा खाया गया खाना अच्छे से नहीं पच पा रहा और उसकी वजह से हमें लंबे समय से कब्ज की समस्या है, और पेट भी साफ नहीं हो रहा तो ये भी मुहाँसों का एक कारण हो सकता है, क्योंकि भोजन के सही पाचन से ही हमारे शरीर को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं जो हमारे हॉर्मोनल संतुलन के लिए भी अतिआवश्यक होते हैं।

8.मासिकधर्म (Menses) –

कई बार हॉर्मोन्स के असंतुलित होने की वजह से मासिकधर्म मे भी अनियमित हो जाता है, तो ये स्थिति भी हमें मुहाँसों ग्रसित कर सकती है।

दोस्तों किसी भी प्रकार की गंदगी या ये कह लें की किसी भी प्रकार के अपशिष्ट पदार्थ हमारे शरीर में ही रह जाते हैं और किसी कारणवश बाहर नहीं निकलते तो ये कई बीमारियों को भी जन्म दे सकते हैं।

उपचार (Treatment) –

यहाँ मैं आप लोगों को कुछ ऐसे सरल उपाय बताने वाली हूँ जिसे तेल ग्रंथि (sebum) के अधिक स्त्राव या कम स्त्राव दोनों की वजह से होने वाले मुहाँसों में उपयोग मे लाया जा सकता है-

1.दही (Curd) –

अगर आपकी त्वचा रूखी (Dry स्किन) है, तो आप दही का उपयोग अकेले कर सकते हैं। दही में लैक्टिक एसिड(lactic acid)मौजूद होता है जो हमारे मुहाँसों को कम करने कम करता है साथ ही यह चेहरे में नमी बनाए रखता है। आप दही लेकर इसे अपने चेहरे पर लगा कर तब इसे छोड़ दे जब तक ये सुख ना जाए, सूखने के बाद फिर यही प्रकिया 2 बार दुहराएँ और फिर सूखने पर सादे पानी से धों लें। आप इसका इस्तेमाल एक अछे क्लिंजर(cleanser)के रूप मे भी कर सकते हैं।

2.मुल्तानी मिट्टी (Fuller’s earth) –

मुल्तानी मिट्टी चेहरे पर दाग धब्बों के लिए बहुत ही अच्छा होता है, साथ ही अगर आपकी त्वचा (skin) बहुत ही ज्यादा तैलीय (oily) है तो ये आपकी लिए बहुत अच्छा साबित होता है। मुल्तानी मिट्टी सुंदरता को बढ़ाने के साथ-साथ मुहाँसों एवं sun tan को भी दूर करने का भी काम करती है। आप इसे गुलाब जल के साथ मिला कर लगा सकते हैं, गुलाब जल भी चेहरे की रंगत निखारने का कम करता है।

3.नीम की छाल (Neem bark) –

नीम की छाल जीवाणुरोधी (Antibacterial) होती है,जो हमारी त्वचा में मुहाँसे पैदा करने वाले बैक्टीरिया की वृद्धि (Growth) को रोकता है। यह मुहाँसों के लिए एक बहुत ही अच्छी औषधि है। आप नीम की छाल लेकर उसे किसी खुरदुरी सतह पर पानी या गुलाब जल के साथ रगड़ कर उसके लेप को वहाँ-वहाँ लगाएँ जहाँ मुहाँसे हैं, अगर मुहाँसों में मवाद (pus) भरा हुआ है, तब भी आप इसे उपयोग कर सकते हैं, अगर गुलाब जल के साथ जलन महसूस हो तो केवल पानी के साथ आप इसे उपयोग कर सकते हैं। ये बहुत ही ज्यादा असरदार और सरल उपाय है। आप इसे रात में भी कर सकते हैं, जहाँ-जहाँ मुहाँसे वहाँ-वहाँ इसकी एक छोटी बिंदी की तरह मोटी परत लगाकर रात भर छोड़ दें और सुबह यह आपको बहूत ज्यादा सूखा मिलेगा तो पहले इसे पानी से अच्छी तरह गीला करलें, और फिर हल्के हाथ से ही साफ करें। इस प्रकिया का असर आपको एक सप्ताह मे ही देखने को मिल जाएगा, साथ ही आप महसूस करेंगे की आपकी त्वचा जो मुहाँसों की वजह से खुरदुरी हो गयी है, वह चिकनी हो रही है, और इसका लेप मुहाँसों को ठंडक प्रदान करने का भी काम करता है। यह मुहाँसों के साथ-साथ blackheadsऔर whiteheads में भी उपयोगी है।

4.माड़,पसिया (Rice water) –

चावल पसाने के बाद जो पानी बचता है उसे थोड़ा सा कटोरी मे रख लें, ठंडा होने के बाद यह गाढ़ा हो जाता है, फिर आप इसे रुई(Cotton)की सहायता से पूरे चेहरे पर लगाएँ। और इसे सूखने क लिए 10-15 मिनट छोड़ दें। यह प्रकिया आप पानी सुविधानुसार दिन में एक या दो बार अपनाएं, यह आपके चेहरे से दाग-धब्बों को दूर करने के साथ बड़े रोमछिद्रों (Large Pores) की समस्या को भी दूर करता है और स्किन को Hydrate करने का भी कम करता है जिससे हमारी त्वचा में निखार आता है।

5.पपीता (Papaya) –

पपीता Antioxidants,Enzymesऔर विटामिन C से भरपूर होता है , इसमें Anti-Inflammatory और Antiviral गुण भी होते हैं, जो हमारी त्वचा में उपस्थित मृत कोशिकाओं (Dead cell) को हटाने का काम करता है। आप इसे अच्छे से मैश करके इसका लेप चेहरे पर लगा लें और सूखने के बाद इसे धो लें।

6.नींबू (lemon),गुलाबजल (rose water)और ग्लिसरीन (glycerin) –

इन तीनों का मिश्रण सुखी त्वचा(dry skin)के लिए बहुत अच्छा होता है। यह हमारे मुहाँसों को कम करने के साथ- साथ दाग-धब्बों को भी साफ करता है। आप इसे रात मे लगाकर रात भर छोड़ दें और सुबह धो लें।

7.मलाई (cream)और हल्दी (turmeric) –

मलाई में चुटकी भर हल्दी मिलाकर इसे चेहरे पर अच्छे से लगाकर सूखने तक छोड़ दें, यह मृत त्वचा (dead cell) को दूर करता है और साथ ही चेहरे पर निखार लाने का काम भी करता है।

8.नीम की पत्ती का पेस्ट-

ताजी नीम (Azadirachta indica) की थोड़ी पत्तियाँ लेकर इसे अच्छे से पीस लें, और इस पेस्ट को उतनी दूर लगाएँ जितनी दूर आपको मुहाँसों की समस्या है, नीम की पत्ती में Antibacterial, Anti-inflammatory और Anti-fungal गुण होते हैं, जिससे यह मुहाँसों में दर्द से भी आराम देता है, इन्हें बढ़ने से भी रोकता है और साथ ही इसे लगाने से आपके चेहरे पर निखार भी आयेगा। आप चाहें तो इस पेस्ट को एक दिन छोड़ कर हर दूसरे दिन लगा सकते हैं। इसे लगाने से आँखों में थोड़ी जलन महसूस होगी , आँसू भी आ सकते हैं तो इससे घबराएगा नहीं, इस पेस्ट को आँखों से दूरी पर लगाइएगा। आप चाहे तो नीम की पत्तियों को धूप में सूखा कर रख सकते हैं और  इसका इस्तेमाल भी पेस्ट के लिए कर सकते हैं।

यह कुछ ऐसे उपाय जो आप आसानी से घर पर कर सकते हैं और इन्हें तब तक करें जब तक आपको इसका असर न दिखने लगे किसी भी प्रकार की त्वचा संबंधी संक्रमण को ठीक होने में थोड़ा समय लगता है इसलिए बिना निराश यह सारे उपाय अपनाएं, ये काफी असरदार होते हैं बस इन्हें नियमित रूप से करें, और तनाव बिलकुल ना लें, मुहाँसों को कभी फोड़े नहीं ना ही बार-बार हाथ लगाएँ। मुहाँसों को फोड़ने से इनमें गड्ढे हो जाते हैं और बहुत ज्यादा निशान पड़ जाते है जो कई बार भरते नहीं और उनके निशान भी रह जाते हैं। खान-पान भी संतुलित रखें अपना और अगर हाथ से यह सब चेहरे पा ना लगा सकें तो कृपया रुई(cotton)का ही उपयोग करें। चेहरे को हमेशा मुलायम और साफ-सुथरे कपड़े से ही पोछें। धूप से बचें और चेहरे को किसी भी तरह के कपड़े की रगड़ से बचाएं, अक्सर तब जब हम कहीं चेहरा स्कार्फ से बांधकर धूप मे बाहर निकलते हैं। पेट में गर्मी और जलन पैदा करने वाले खाद्य पदार्थों से भी बचें।

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