October 5, 2022

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छत्तीसगढ़ में पाये जाने वाले कुछ खरपतवार पौधे और उनका बीमारियों में उपयोग|Chhattisgarh mein paye jane wale kuch kharpatwaar aur unka bimariyon men upyog

Chhattisgarh mein paaye ane wale kuch kharpatwaar aur unka bimariyon mein upyog in hindi.

छत्तीसगढ़ में पाए जाने वाले कुछ खरपतवार और रोगों में उनका उपयोग

छत्तीसगढ़ में पाये जाने वाले कुछ खरपतवार पौधे और उनका बीमारियों में उपयोग

हमारे देश में बहुत से पौधे पाये जाते हैं, जिनमें से हम कुछ को अपने घरों में सजाते हैं, कुछ को खेतों में उगा कर खेती करते हैं, कुछ को फूल की खेती करने में उपयोग में लाया जाता है, पर क्या आपने कभी सोचा है की हमारे आस-पास बहुत से ऐसे पौधे हैं, जिन्हें हम घासफूस समझते हैं और उखाड़कर फेंक देते हैं, लेकिन उनमें से बहुत से पौधों में बीमारियों को ठीक करने के गुण मौजूद होते हैं। छत्तीसगढ़ में ऐसे बहुत से पौधे या यूं कह लें रास्ते चलते या घरों के आसपास या सड़कों पर आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन कहा जाता है ना की रास्ते पर पड़ी चीजों की कदर सिर्फ उन्हें ही होती है जिनके पास वो चीज ना हो। ऐसे ही कुछ पौधों के बारे में हम बात करेंगे जिन्हें हम घासफूस समझ कर, बिना काम का समझ कर फेंक देते हैं। लेकिन दुनिया में कोई भी ऐसा पौधा नहीं जिसका कोई उपयोग नहीं है, जैसे आप घास या दुबी या दूर्वा घास को ही देख लें जिसे हम गणेश जी को चढ़ाते हैं, कथा और पूजा में उपयोग करते हैं, लेकिन इसके गुणों की अगर बात करें तो यह एसिडिटि से निजात दिलाता है, खून को साफ करता है, मोटापे में उपयोगी है। तो आज हम कुछ ऐसे ही पौधों के उपयोग देखेंगे।

1.मेघापति (Tephrosia purpurea)-

इसे छत्तीसगढ़ में मेघपति बोला जाता है और इंग्लिश में वाइल्ड इंडिगो (wild indigo) या फिश पोइसन (Fish poison) कहते हैं । मेघापति का वानस्पतिक नाम Tephrosia purpurea है। इसके अलावा इसे शरपुंखा भी बोला जाता है। इस पौधे का उपयोग बहुत सी बीमारियों में किया जाता है जैसे दमा(Asthma), कुष्ठ रोग (Leprosy), हृदय रोगों में (Heart diseases), लिवर की समस्या में (Liver problems), अल्सर (Ulcer) और ट्यूमर (Tumor) जैसे रोगों के लिए उपयोग में लाया जाता है। यह शरीर में मौजूद सारी गंदगियों और हानिकारक तत्वों को शरीर से बाहर करता है। इसके अलावा पिंपल (Pimple), डायरिया (Diarrhoea)और पेट साफ (Laxative)करने में भी उपयोगी है।

2.चित्रक (Plumbago zeylanica)-

 

इसे हिन्दी में चित्रक और इंग्लिश में लेड वार (Lead war)कहा जाता है। इस पौधे का उपयोग सर्दी- खाँसी (Cold-Cough ), गले के खराश में (Throat infection), बुखार में (Fever), सर दर्द में(Headache), दांतों की बीमारी (Dental infections) में और इसके अलावा त्वचा रोंगों (Skin diseases)और चर्म रोगों (Leukoderma) में उपयोग में आता है। यह साधारण से दिखने वाला झाड़ी के समान पौधा है, जो आसानी से हमें मिल जाता है। यह हृदय रोग (Heart diseases) और टीबी (Tuberculosis) जैसे रोगों में भी उपयोग में लाया जाता है।

3.दूधी (Euphorbia hirta)-

इसे हम खरपतवार (Weeds) बोलते हैं, और जैसा की हममें से कोई खरपतवार को अपने घर में रहने देना नहीं चाहेगा, लेकिन यही पौधा या कह लें खरपतवार कई औषधीय गुणों से भरपूर होती है। इसे दुग्धिका के नाम से भी कई जगहों में जाना जाता है। यह संभोग से होने वाली बीमारियाँ जैसे गोनोरिया (Gonorrhoea) जैसी बीमारियों के उपचार में उपयोग में आता है। इसके अलावा यह अस्थमा (Asthma), फेफड़ों के संक्रमण (Lungs infection) , गले में खराश या जलन, ट्यूमर (tumor), पीलिया (jaundice), पाचन तंत्र की समस्या हो या बच्चों में कृमि (Worms) की समस्या , सबके उपचार में यह उपयोगी है। इसके अलावा यह कामुक इच्छा (aphrodisiac) को बढ़ाने में भी उपयोग में लाया जाता है।

4.अपराजिता (Clitoria ternatea)-

यह भी एक खरपतवार है , जिसमें नीले कलर के सुंदर फूल खिलते हैं ऐसा लगता है जैसे खरपतवार नहीं बल्कि घर में सजावट वाले पौधों का प्रकार हो। यह भी त्वचा के रोगों (Skin diseases) के उपचार में, अस्थमा में , याददाश्त बढ़ाने में, तनाव (Depression) को कम करने में उपयोगी है। इसके अलावा यह टीबी (Tuberculosis)की बीमारी के उपचार में भी उपयोगी है । यह सरदर्द जैसे माइग्रेन (Migraine) की समस्या के उपचार में भी उपयोग
में लाया जाता है।

5.सत्यानाशी (Argemone mexicana)-

यह पौधा भी खरपतवार है, इसके पीले फूलों के पंखुड़ियों (Petals) को हमने सीटी बजाने के लिए भी उपयोग में लाया है। पर यह मामूली पौधा बहुत से बीमारियों के उपचार में उपयोग में लाया जाता है। यह मस्सों (Warts)को निकालने, त्वचा के रोगों (Skin disease)में , सूजन (Inflammation) में, ट्यूमर में , मलेरिया (Malaria)में, कुष्ठ रोग (Leprosy) में, गठिया (rheumatism) रोगों के उपचार में उपयोग में लाया जाता है। इसके अलावा यह सभी प्रकार के जहर में (all types of poisoning) में भी उपयोग में लाया जाता है।

6.अमरबेल ( Cuscuta reflexa)-

अमरबेल जिसे हम दूसरे पौधों का जीवन नष्ट करने के नाम से जानते हैं। यह भी एक खरपतवार है, लेकिन हम इसे बेकार ही समझते हैं, पर अमरबेल में भी बहुत सी बीमारियों को ठीक करने में उपयोग में लाया जाता है। यह त्वचा के संक्रमण (Skin disease), डाइरिया (diarrhea), तनाव (Headache), कृमि (Intestinal worms), एक्जिमा (Eczema), और कैंसर (Cancer) जैसे रोगों के उपचार में उपयोग में लाया जाता है। इसके अलावा यह पेशाब संबंधित बीमारियों (urinary tract disease) बीमारियों में भी उपयोगी है।

7.दवाना पत्ता (Hedyotis corymbosa) –

यह भी एक खरपतवार है , जो कहीं भी आपको फर्श पर, सड़क के किनारे, दरारों में कहीं भी आसानी से दिख जाता है। यह बहुत ही उपयोगी है यह भी अस्थमा(Asthma) , पीलिया (jaundice), कफ (Cough), पेट फूलने जैसे समस्या (Flatulance), कब्ज (Constipation), तनाव (Depression) और हेपटाइटिस (Hepatitis) जैसे रोगों में उपयोगी है।

यह कुछ ऐसे खरपतवार हैं, जिन्हें हम बेकार ही समझते हैं, इनमें कई बार विषाक्त पदार्थ (Toxic material) भी मौजूद होते हैं, लेकिन जैसा की आप जानते हैं की साँप काटने के बाद उपचार में साँप के जहर से ही बने एंटिवेनोम (Antivenom) दवाई का ही उपयोग किया जाता है, तो बस इसी तरह ऐसे कई खरपतवार या पौधे भी उपयोग में लाये जाते हैं, जो कई बार जहरीले तो होते हैं पर सही मात्रा में दवाई का काम करते हैं। इसलिए अगर ऐसे पौधों से बने दवाइयों का सेवन सही मात्रा में किसी अच्छे चिकित्सक से ली जाए तो यह हमारी बीमारी को दूर करने में सहायक हो सकता है। इन पौधों के प्रभाव पर काफी अध्ययन भी किए गए हैं।

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