ध्यान मस्तिष्क और शरीर में जीन की अभिव्यक्ति को बदलता है | Meditation alters the expression of genes in the brain and body

ध्यान मस्तिष्क और शरीर में जीन की अभिव्यक्ति को बदलता है (Meditation alters the expression of genes in the brain and body)-

किसी भी काम को करने के लिए हमारा उस काम में मन लगना या ध्यान केन्द्रित होना बहुत ही आवश्यक है , और इसके लिए सबसे आवश्यक हमारे मस्तिष्क का स्वास्थ्य और एकाग्रचित्त मन है। आपने कहावत तो सुनी ही होगी की “मन चंगा तो कठौती में गंगा” से तात्पर्य है की अगर मन अच्छा तो आप जहाँ जो चाहें वहाँ वह मिल जाता है , चाहे तीर्थ हो , मंदिर हो या सफलता या अच्छा स्वास्थ्य। यह एक कटु सत्य है की अगर हमारा मन अच्छा हो तो हम हर कार्य अच्छे से कर सकते हैं, और हमारे शरीर की हर एक कोशिका भी अच्छे से कार्य करेगी साथ ही यह हमारे सोचने के तरीके और हमारे जींस (Genes) की अभिव्यक्ति को भी बदलता है। अगर हमारा मस्तिक अच्छा है , तो हमारा हर कार्य भी अच्छा होगा अब चाहे वह हमारे शरीर से जुड़ा कार्य हो, या फिर हमारे शरीर में मौजूद वह अंश जिसे हम जींस कहते हैं और व्यक्ति हो या पेड़-पौधे या पशु सबमें उनके अपने गुणों के लिए जिम्मेदार

ध्यान का जींस अभिव्यक्ति पर प्रभाव (Effect of Meditation on Jeans Expression) –

ध्यान हमारे मष्तिस्क को एकाग्रचित्त रखता है , यह हमारे जींस की अभिव्यक्ति को नियमित रूप से नियंत्रित करने वाले तंत्र या यह कह लें की सिस्टम (system) को अच्छी तरह से चलाती है, साथ ही यह हमारे शरीर में तनाव लेने , या चिंता और अवसाद की वजह से उठने वाले उत्तेजनाओं या कह लें तो पूर्व भड़काऊ अभिक्रियायों (pre-inflammatory response) को नियंत्रित करने और रोकने में प्रभावी होता है। इसका मतलब यह है की ध्यान हो या योगा दोनों ही हमारे जींस की अभिव्यक्ति को संतुलित बनाए रखने और उसे और अच्छी तरह कार्य करने के लिए प्रेरित करता है। ध्यान एक ऐसी अवस्था है जिसमें आप किसी एक चीज के बारे में अपने पूरे एकाग्रचित्त मन से सोच सकते हैं, और उसका परिणाम भी बहुत अच्छा होता है, जैसे कहते है ना की अगर हम किसी काम को मन से करें तो वह काम बहुत अच्छा होता है। ध्यान हमारे शरीर की कोशिकाओं में मौजूद जींस के या कहें आनुवांशिक स्वरूप को बादल सकता है।

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ध्यान के साथ अपने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के 5 तरीके (5 ways to improve your mental health with meditation) –

कई बार हम इतनी चिंता में , तनाव या अवसाद में होते हैं की हमें कुछ समझ नहीं आता, कोई रास्ता दिखाई नहीं देता, हम किसी कार्य को लेकर सही फैसला नहीं कर पाते हैं। यह सब क्यों होता है, इसका कारण केवल और केवल हमारा मस्तिष्क होता है, कैसे, जैसे की आपने कई बार लोगों से सुना होगा या कोई विडियो देखा होगा की जैसा हमारा दिमाक सोचता है वैसे ही हम बन जाते हैं। उदाहरण के तौर पर अगर किसी व्यक्ति या पड़ोसी या अधिकारी ने हमें बोल दिया की यह काम तुम्हारे बस का नहीं है, यह तुम्हें नहीं आता तो हम उस वक्त अपने आप को छोटा महसूस करने लगते हैं, और हमें खुद भी लगने लगता है की सच ही तो हमें कुछ नहीं आता और उसी वातावरण में
हम रोज कम करते हैं और दिन -प्रतिदिन हमारा आत्मविश्वास कम होने लगता है और हम स्वयं में मन लेते हैं की हम दूसरों से कम हैं, लेकिन यही एक दूसरा पहलू यह की अगर हम इस बात को सकारात्मक रूप से सोचें तो हम  मस्तिष्क पर इस चीज को हावी नहीं होने देंगे और पहले से और सकारात्मक्ता (Positivity) से कम करेंगे और आगे बढ़ेंगे और ऐसी बातों को पीछे छोड़ कर उस हर काम को सीख के आगे बढ़ने की कोशिश करेंगे।

यह है हमारे मस्तिष्क की शक्ति, इसे बेहतर करने के कुछ ऐसे तरीके हैं जिनसे मस्तिष्क तो बेहतर होगा ही साथ ही स्वास्थ्य भी बेहतर होगा-

1. योग या ध्यान (yoga or meditation) –

योगा या ध्यान एक सबसे अच्छा और सरल तरीका है जिससे आप अपना ध्यान तो बेहतर कर ही सकते हैं साथ ही मानसिक स्वस्थ्य को भी बेहतर कर सकते हैं। यह तरीके आपको बीमारी से तो दूर रखेंगे ही साथ ही स्वस्थ्य को भी बेहतर रखेंगे। अगर आप नियमित रूप से योगा करते हैं तो यह आपके ध्यान और एकाग्रता को बढ़ाता है , जिससे आप हर परिस्थिति में बेहतर सोचने और बेहतर करने की क्षमता रखेंगे। ध्यान (meditation),यह एक ऐसा तरीका जिससे आप दुनिया की सारी समस्त परेशानी दूर कर सकते हैं, ध्यान का मतलब यह होता की अगर आपके आसपास सुई गिरे तो उसकी आवाज तक कान में सुनाई ना दे। यह दोनों तरीके दुनिया के सबसे बेहतरीन तरीके हैं जिनसे आपका ध्यान भी अच्छा रहेगा, और मस्तिष्क के विचार भी अच्छे रहेंगे।

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2.संगीत (Music)-

संगीत एक ऐसा तरीका है जिससे हम अपनी हर तरह की भावना को जता सकते हैं, चाहे फिर वह भावना दूसरे के लिए हो या फिर खुद के लिए। संगीत एक ऐसा तरीका है जिससे आपके मन में चल रही समस्याओं को कुछ पलों में ही दूर किया जा सकता है। संगीत एक ऐसा साधन है जिससे हम दुनिया की कई मुश्किलों को हरा सकते हैं। संगीत हमारे मन में चल रही हलचलों को शांत करता है। कई बार आपने खुद महसूस किया होगा की अगर किसी को ज्यादा सोचने की वजह से अगर नींद ना आए तो उसे संगीत सुनने से जल्दी नींद आ जाती है। संगीत आपके ध्यान और एकाग्रता को बढ़ाने का कार्य करता है।

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3.खेल (Sports)-

खेल शरीर को स्वास्थ्य और मन दोनों को अच्छा रखता है। आप अपने किसी भी पसंदीदा खेल को रोज खेल कर अपने स्वास्थ्य और मन दोनों को अपने काबू में रख सकते हैं, क्योंकि खेलते वक्त आपका ध्यान केवल खेल पर होता है, और उस समय आपकी सारी इंद्रिया भी सक्रिय हो जाती हैं, आपके शरीर में रक्त का प्रवाह भी तेज हो जाता है, जिससे शरीर की सारी क्रियाएँ भी संतुलित रहती हैं और यही एक वजह है की खेल की वजह से शरीर स्वस्थ रहता है।

4.शौक (Hobbies) –

आपका पसंदीदा शौक या कह लें हॉबी भी आपको आंतरिक खुशी प्रदान करती है। और किसी काम को करके अगर मानसिक शांति की अनुभूति हो तो यह भी हमारे मन को अच्छा रखता है, चिंता और तनाव से दूर रखता है। जैसे अगर किसी व्यक्ति को घूमने का शौक हो उसे अगर कोई घूमने की जगह मिल जाए तो वह खुश हो जाता है और उसे मानसिक शांति मिलती है, और उसके बाद उसे कोई भी कार्य दें तो वह उस कार्य को बड़ी एकाग्रता और ध्यानपूर्वक करता है। इसलिए हमें हर वह कार्य करना चाहिए जिससे हमारा मन शांत रहे और हम अवसाद और चिंता से दूर रहें और हर कार्य में हमारा मन लगे।

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5.मंदिर (Temple) –

इसे हम एक धार्मिक तरीका कह सकते हैं, क्योंकि कई लोग नास्तिक होते हैं उन्हें मंदिर जाना पसंद नहीं होता, लेकिन जो मंदिर जाते हैं उन्हें मंदिर जाते ही मानसिक शांति मिलती है। जब हमें कोई तकलीफ होती है ,कोई समस्या होती है तभी हम भगवान के पास जाते हैं, लेकिन अगर हम बिना किसी कारण भी मंदिर जाएँ तो भी हमें शांति मिलेगी, चित्त स्थिर रहेगा और हम हर काम अच्छे से कर पाएंगे, क्योंकि मंदिर में भजन चलते हैं, जो मन को शांति प्रदान करते हैं और आरती जो हमारे मन को एक जगह स्थिर करके हमारे ध्यान को किसी काम के प्रति बढ़ाती है।

इन तरीकों में से जो भी तरीके आपको सरल लगें उन्हें आप अपना सकते हैं, और अपने मन को अवसाद, चिंता और तनाव से दूर रख सकते हैं।

ध्यान का दैनिक अभ्यास कैसे शुरू करें-

हमें ध्यान की शुरुवात करने के लिए एक निश्चित समय बनाना होगा, इसका मतलब है की दिनभर की दिनचर्या सुबह होते ही शुरुआत योगा या ध्यान (Meditation) से करें और एक समय बांध लें के इस समय पर मुझे इन चीजों से लिए समय निकालना है। शुरुआत में 1 मिनट , फिर 2 मिनट ऐसे कराते हुए अपने हिसाब से आप समय सीमा बढ़ाएँ और प्रतिदिन इसका पालन करने की पूरी कोशिश करें। आप खुद आपके स्वास्थ्य और मन में हो रहे परिवर्तन को महसूस करेंगे।

तो बस इसी लिए कहा गया है, की मन अच्छा तो सब अच्छा। इसलिए अपने मन को अच्छा रखिए तो सारी चीजें अच्छी रहेंगी और आपका ध्यान भी काम में अच्छे से लगेगा।

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