October 5, 2022

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सिकल सेल एनीमिया क्या है, इसका कारण, संकेत और लक्षण, जटिलताएँ और बचने के उपाय और उपचार |What is sickle cell anemia, its causes, complications, prevention and treatment in Hindi

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सिकल सेल एनीमिया क्या है, इसका कारण, संकेत और लक्षण, जटिलताएँ और बचने के उपाय और उपचार (What is sickle cell anemia, its causes, complications, prevention and treatment in hindi)

एनीमिया जो हमें कई बार काफी साधारण अवस्था (Condition) या बीमारी लगती है , लेकिन कई बार हमारे लिए यह काफी घातक होती है। कुछ बीमारियाँ जैसे मेगालोब्लास्टिक एनेमिया (Megaloblastic anemia), सिकल सेल एनेमिया (Sickle cell anemia), थैलेसीमिया (Thalassemia) और हीमोफिलिया (Hemophilia) जैसे रोगों को हमारे हीमैटोलौजिकल डिसिस (Heamatological disease) के नाम से जानते है, जिसका मतलब रक्त संबंधी रोगों से है। यह सभी बीमारियाँ एनेमिया सहित हमारे लिए बहुत ही घातक है, कई बार यह बीमारियाँ हमारी जान भी ले सकती हैं। इसी में से आज हम बात करेंगे एक बीमारी, सिकल सेल एनीमिया की और इसके बारे में जानेंगे।

सिकल सेल एनीमिया (What is sickle cell anemia in Hindi) –

सिकल सेल एनीमिया एक आनुवांशिक , वंशागत (Inherited) या यूँ कह लें विरासत में मिला रक्त संबंधी एक ऐसा रोग है , जो की हमारे रक्त में मौजूद हीमोग्लोबिन (Haemoglobin)नामक प्रोटीन के उत्पादन (Production) को प्रभावित (Affect) करता है। हमारे शरीर में मौजूद हर एक कोशिका, ऊतक (Cell, tissue)को रक्त की संतुलित मात्रा आवश्यक होती है, ताकि यह आसानी से अपना कार्य (Work) कर सके, क्योंकि हमारे रक्त में हीमोग्लोबिन (Haemoglobin) के उत्पादन में ऑक्सीजन का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है, और जब कभी इसी ऑक्सीजन की कमी हो जाती है तो असामान्य हीमोग्लोबिन (Heamoglobin) आपस में मिल के गुच्छों (Clumps) का निर्माण करने लगते हैं, जिसकी वजह से सामान्य लाल रक्त कोशिकाओं (Red blood cells) का आकार डिस्क आकार (Disc-shape) से बादल कर अर्धचंद्राकार (Crecents)या हंसियाकार (Sickles) में बादल जाता है, और इसे ही हम सिकल सेल एनीमिया कहते हैं।

कारण (Causes)-

एनीमिया का कारण जींस (Genes) में परिवर्तन भी हो सकता है, इसके अलावा शरीर में स्वस्थ रक्त कोशिकाओं का ना बनना, शरीर में किसी प्रकार के रोग का होना और उसकी वजह से जींस (genes) में परिवर्तन होना । हीमोग्लोबिन (Heamoglobin) द्वारा ऑक्सीजन को लाल रक्त कोशिकाओं द्वारा पूरे शरीर में, फेफड़ों और हृदय में भी लाने ले जाने का कार्य करता है, लेकिन अगर यह ऑक्सीजन भी मौजूद ना हो तो हीमोग्लोबिन (Heamoglobin) का उत्पादन भी प्रभावित होता है और यह भी हीमोग्लोबिन (Heamoglobin) के आकार को असामन्य बनाता है। और यह भी सिकल सेल एनीमिया का कारण बन सकता है। साथ ही अगर हीमोग्लोबिन (Heamoglobin) के निर्माण में आवश्यक प्रोटीन भरपूर मात्रा में न हो या जरूरत से ज्यादा हो जाए तो यह भी हीमोग्लोबिन के आकार को बदल कर एनीमिया का कारण बन सकता है।

संकेत और लक्षण ( Sign and symptoms)-

हमारे शरीर में कोई भी बीमारी अचानक से नहीं होती, बीमारी की प्रक्रिया धीरे-धीरे शुरू हो चुकी होती है और हमारा शरीर इसके लिए हमें संकेत भी देता है की हमारे शरीर में किसी तरह का कोई बदलाव हो रहा है, लेकिन कई बार हम इसे नजरंदाज कर देते हैं या हम अपने से इसका उपचार करने लगते हैं और फिर अचानक ही बीमारी बढ़ जाती है। सिकल सेल एनीमिया में भी हमारा शरीर हमें कुछ संकेत और
लक्षण दर्शाता है जैसे-

1.त्वचा में पीलापन आना।
2.आँखों ले सफेद भाग का पीला होना।
3.पेट के निचले हिस्से, छाती और पैरों में दर्द होना।
4.थकावट होना और सांस लेने में तकलीफ होना।
5.किसी प्रकार का बैक्टीरियल संक्रमण (Bacterial infection)।
6.डैक्टीलाईटीस (Dactilytis)-हाथ और पैरों में सूजन का होना।
7.फेफड़ों में किसी प्रकार की चोट (Injury) या हीट इंजूरी (Heat injury) होना।
8.शरीर में दर्द बने रहना, चक्कर सा लगना और आँखों को किसी प्रकार की क्षति होना।

जटिलताएँ (Complications)-

कुछ ऐसी जटिलताएँ हैं जो सिकल सेल एनीमिया रोग को भयावह (frightening) स्थिति में पहुँचा सकती हैं, जैसे

1. किसी भी प्रकार का आघात (Stroke)।
2.छाती से जुड़े रोग (Acute chest syndrome)
3.फेफड़ों में मौजूद धमनियों में उच्च रक्तचाप (Pulmonary hypertension)।
4.किसी अंग का क्षतिग्रस्त होने लगना (Organ damage)।
5.अंधापन (Blindness)।
6.पित्त पथरी का होना (Gall stone)।

रोगजनन (Pathogenesis)-

रोगजनन का मतलब होता है की मानव शरीर में किसी रोग के उत्पन्न होने का तरीका (Manner) क्या है, इसे ही हम रोगजनन या पैथोजेनेसिस (Pathogenesis)
कहते हैं। देखते हैं सिकल सेल एनीमिया का हमारे शरीर में होने का तरीका क्या है-

1.हमारी लाल रक्त कोशिकाओं (Red blood cells) में एक प्रोटीन (Protein) मौजूद होता है, जो ऑक्सीजन (Oxygen) को कोशिकाओं एवं ऊतकों (Cells and
tissues) में ले जाने का कार्य करता है,जिसे हम हीमोग्लोबिन (Heamoglobin or Hbs) के नाम से जानते हैं।

2.जब कभी वाहक लाल रक्त कोशिकाएं(Red blood cells) अपने ऑक्सीजन को ऊतकों (Tissues) में जोड़ती या छोड़ती हैं और जब इन्ही कोशिकाओं में ऑक्सीजन की मात्रा (Amount) कम हो जाती है तब यह असामान्य हीमोग्लोबिन (Heamoglobin or Hbs), सामान्य हीमोग्लोबिन (Heamoglobin or Hbs) के विपरीत लाल रक्त कोशिकाओं में तन्तु (Filaments) के रूप में जाकर चिपक जाता है, जो की पेंचदार छड़ों (Twisted helicals) में बदल जाता है।

3.इस प्रक्रिया के बाद यह छड़ें समानान्तर बंडलों (Parallel bundles) में बदल कर आपस में गुच्छा (Cluster) बना लेती हैं, जो कोशिकाओं का आकार लंबा कर देती हैं,
और इन्हें दूर भी कर देती हैं जिसकी वजह से लाल रक्त कोशिकाएं कठोर (rigid) होने लगती हैं और हंसियाकार या अर्धचंद्र (Sickle or Crecents)का आकार ले लेती
हैं, जिसकी वजह से व्यक्ति सिकल सेल एनीमिया (Sickle cell anemia) से ग्रसित हो जाता है।

यह तीन बिन्दु या प्रक्रिया ही इस बीमारी के लिए जिम्मेदार होते हैं।

निदान (Diagnosis) –

इसके निदान के लिए हम कुछ परीक्षण (Test) करते हैं जैसे –
1.सूक्ष्मदर्शी द्वारा रक्त का नमूना देखना (Microscopic blood test)।
2.हीमोग्लोबिन इलेक्ट्रोपोरोसिस टेस्ट (Heamoglobin electroporosis test)।
3.माता-पिता का परीक्षण (Parentral diagnosis)।

उपचार (Treatment) –

1.गैर चिकित्सीय उपचार (Non-therapeutic treatment)-

आयरनयुक्त फलों का सेवन करना, पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करना, ऐसे भोजन का सेवन करना जिसमें फॉलिक एसिड (Folic acid) भी मौजूद हों। साथ ही योग या व्यायाम करना।

2.चिकित्सीय उपचार (therapeutic treatment)-

इसमें हम कुछ विशिष्ट समूहों (Special group) की दवाइयों का सेवन चिकित्सक के परामर्श से ले सकते हैं जैसे –

1. एंटिबायोटिक्स (Antibiotics) – पेनिसिलिन (Penicillin)
2.नॉन स्टेरोइडल एंटिइनफ़्लामेट्री ड्रग्स (NSAID’s)- इन समूहों का उपयोग दर्द के लिए किया जाता है जैसे एस्प्रिन, डाइक्लोफेनाक ।
3.खून चढ़ाना (Blood transafusion)।
4.बोन मैरो ट्रांसप्लांट करना (Bone marrow tarnsaplant)।

यह बीमारी हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की वजह से होती है, इसलिए हमें प्रयास करना चाहिए की हमारे रक्त को भरपूर मात्रा में जो भी तत्व उसके निर्माण में आवश्यक हैं वह मिले।

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