October 5, 2022

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कब्ज क्या है, इसके कारण, जटिलताएँ और उपचार |What is Constipation, Causes, Complications and Treatment in Hindi

What is constipation causes complications and treatment in hindi

कब्ज क्या है, इसके कारण, जटिलताएँ और उपचार (What is Constipation, Causes, Complications and Treatment in Hindi)-

सबसे पहले सुबह उठते ही हम मल-त्याग (Excretion)करने का कम करते हैं , फिर कोई अन्य काम। अगर पेट पूरी तरह साफ हो जाता है तो हम दिनभर ऊर्जा से भरपूर महसूस कराते हैं, हमारा हर काम में ध्यान लगता है, कोई हमसे गुस्से से बात करे या बुरी बात भी बोल दे तो हमें जल्दी गुस्सा नहीं आता, ना ही बुरा लगता है। लेकिन कभी गलती से भी हमारा पेट साफ ना हुआ हो तो दिनभर हमारा मन काम में नहीं लगता , गुस्सा आते रहता है, कोई अच्छी चीज भी बोलता है तो बुरी लगती है, किसी की बात सुनने का मन नहीं होता है, बस दिन भर हमारा ध्यान पेट की ओर लगा रहता है की हम क्या करें की हमारा पेट साफ हो जाए, कहीं कोई बीमारी तो नहीं है, कहीं यह सब हमारे लिए बीमारी की जड़ तो नहीं है, हमारे मन में इसकी वजह से बहुत से बुरे भी आने लगते हैं, हम बहुत परेशान भी रहते हैं, और चिंता और अवसाद भी हमें घेर लेती हैं। हम दिनभर इसी में उलझे रह जाते हैं की कैसे हम इससे निजात पाये , कैसे हमारा पेट साफ हो , कैसे हम कब्ज से निजात पाएँ।

क्या ऐसे कारण हैं जिसकी वजह से हम कब्ज जैसी समस्या से जूझते हैं, क्यों हम संतुष्ट नहीं हो पाते। अक्सर हमने देखा है की जब भी हमारा पेट साफ नहीं होता हमें लगता रहता है की हम संतुष्ट नहीं हैं, दिनभर हमारा ध्यान इसी पर जाता है, की हमें लगा रहा के हमें शौचालय (Toilet) जाना है, पेट साफ नहीं है, और इसी की वजह से बार-बार हमारा ध्यान पेट की तरफ रहता है और हमारा मन काम में नहीं लगता है। क्या ऐसे कारण हैं कब्ज के जो हमें परेशान करते हैं-

1.खाने का अच्छे से पाचन ना होना (Poor digestion of food) –

कई बार हमारे खाने को पचाने वाले अंग (Parts)जैसे हमारा मुँह (Mouth) , गला (Oesophagus), हमारा आमाशय (stomach), अग्नाशय (pancreas) और अंतड़ियाँ (Intestines)भाग लेते हैं, जब हम खाना कहते हैं तो वह हमारे मुँह से लार (Saliva) में मिलते हुए गले से नीचे उतरता है और लार में भी एंजाइम्स (Enzymes) मौजूद होते हैं जो यही से खाने के पाचन की शुरुवात कर देते हैं, और जब यह पेट में जाता है तो वहाँ भी मौजूद एंजाइम्स (Enzymes)और एसिड (Acid) भोजन को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ देता है, जिससे भोजन आसानी से पच जाता है, लेकिन जब यही प्रक्रिया हमारे शरीर में धीमी हो जताई है तो 7 से 8 घंटे में पचने वाला भोजन (भोजन कुछ विशेष चीजों जैसे माँस, कुछ फलों और शक्कर को छोड़कर) बहुत धीमी गति से पचता और अच्छे से समय पर छोटे टुकड़ों में ना टूटने की वजह से यह आसानी से पाच भी नहीं और जो अपशिष्ट पदार्थ शरीर से बाहर किए जाते हैं और उनके बनने और निष्कासन (expulsion) में भी देरी हो जाती है जो कब्ज का कारण बनता है।

2.गैस का बनना (gas formation)-

जैसे की मैंने पहले ही बताया के कुछ विशिष्ट प्रकार के भोजन लेते हैं जिसमें बड़ी मात्रा में प्रोटीन, कार्बोहायड्रेट, फाइबर और स्टार्च मौजूद होते हैं , हमारे शरीर में बैक्टीरिया इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ते हैं , अगर यही छोटे-छोटे टुकड़ों में छोटी आंत में ना टूटे तो यह हमारी बड़ी आंत में गैस बनाने लगता है, और इस गैस की वजह से ही हमारा पेट फुला- फुला (Bloating)लगता है, और पेट के निचले हिस्से में दर्द होता है, कब्ज की समस्या बनी रहती है और पेट दर्द हमेशा बना रहता है। आप खाली पेट भी कुछ खाते हैं तो आपको ऐसा लगने लगता है की आपका पेट फूल गया है। आप कुछ भी कहते हैं तो डकार (Burp) आने लगती है। खाली पेट भी यही सिलसिला चलता रहता है।

3.पानी का कम सेवन (low water intake)-

हमारा शरीर लगभग 70 प्रतिशत पानी से बना हुआ है, और हमारे शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों और खनिज लवणों (Neutrients)को शरीर के हर भाग तक पहुँचाने में सहायता करता है, साथ ही यह हमारे खाने को भी पचाने में बहुत सहायता करता है। अगर पाचन अच्छा रखना तो पानी की मात्रा शरीर में उस 70 प्रतिशत को पूरा करने के लिए पानी भरपूर मात्रा में लेना चाहिए। यह हमें कब्ज से भी बचाता है साथ ही मल (Stool) को आसानी बाहर निकालने में भी सहायता करता है।

4.कम शारीरिक गतिविधियाँ (Less Physical Activity) –

अक्सर हम खाना तो समय से खा लेते हैं लेकिन हम इसे पचाने के लिए कुछ नहीं करते । ना सुबह उठ कर कोई व्यायाम या कसरत (Excercise)करते हैं, ना रात को खाना खाने के बाद टहलने का कष्ट करते हैं, और खाना-खाते ही सो जाते हैं, जिसकी वजह से खाना आसानी से पच नहीं पाता, क्योंकि जैसे-जैसे सूरज ढलना शुरू होता है, वैसे- वैसे हमारी पाचन शक्ति कम होने लगती है, इसलिए रात के खाने के बाद शारीरक गतिविधि भी ना करना कब्ज का कारण बन जाता है।

5.खाने की मात्रा (Food Quantity)-

कई बार जब हमें भूख लगी होती है तो हम एक साथ एकदम पेट भर के खाना खा जाते हैं, जो की काफी गलत है। एक साथ अत्यधिक मात्रा में भोजन का सेवन करने से पाचन शक्ति के ऊपर दवाब (pressure) बनता है और पाचन शक्ति एक साथ भोजन को पचाने में असक्षम (unable)हो जाती है, और हमें डकार आने लगती है, पेट फूलने लगता है और कब्ज की समस्या हो जाती है। खाने की मात्रा का ध्यान रखना काफी आवश्यक है, क्योंकि यह हमारे कब्ज का एक बड़ा कारण है। कई लोगों को खाने के प्रति काफी लालच होता है, वह खाने के बाद भी कभी जंक फूड, तो काफी फास्ट फूड, कभी बिस्किट, अकभी नमकीन कहते हैं, जो हमारे पेट में खाने की मात्रा को जरूरत से ज्यादा बढ़ा देता हैं, और हमारा पेट जलने लगता है, फूल जाता है और कब्ज की परेशानी हो जाती है, खट्टी डकार आने लगती है, और हमारा जी मिचलाने लगता है। इसलिए खाने पर नियंत्रण बहुत ही आवश्यक खासकर जबकि आपका पाचन तंत्र काफी कमजोर हो तो खाने में और परहेज करना चाहिए, संयमित और नियंत्रित भोजन ही करना चाहिए।

6.खाने का तरीका एवं फाइबरयुक्त भोजन का सेवन ना करना (Eating style and not consuming fiber rich food) –

हमारे खाने का समय और तरीका भी हमें कब्ज से राहत दिला सकता है। खाद्य पदार्थों को खाने का एक निश्चित समय होता है। जैसे हम चाहे तो सुबह गरिष्ठ (stodgy) भोजन भी कर सकते हैं, क्योंकि यह शाम तक आसानी से पच जाता है लेकिन यहीं हम बात करें रात की तो हम रात में हम रात के वक्त भारी भोजन नहीं कर सकते क्योंकि रात में हमारा पाचन तंत्र काफी धीमा होता है, जिसकी वजह से भोजन आसानी से नहीं पच पाता है, और हमें कब्ज, खट्टी डकार आने लगती है और पेट में दर्द भी होने लगता है, वैसे ही दही को आप रात में नहीं खा सकते क्योंकि रात में खाने से पाचन तो खराब होता ही , साथ ही सर्दी-ख़ासी होने की भी संभावना रहती है, इसलिए कब क्या खाना है, इसे निश्चित करें, और उसी के हिसाब से भोजन करें।

इसके अलावा अगर आप फाइबरयुक्त भोजन ना लें तब भी मल (Stool)मुलायम (Soft) नहीं होगा और इसकी वजह से भी कब्ज (Constipation) की समस्या होती है।

यह सब कुछ ऐसे कारण हैं, जो हमें कब्ज से प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए इन सबका ख्याल अवश्य रखें।

जटिलताएँ (Complications)-

अगर कब्ज काफी दिन से बना हो तो , यह हमारे लिए कई बार काफी दुखदायक होता है। कब्ज की वजह से हमें कई दिकत्तों का सामना करना पड़ता है। देखते हैं क्या समस्याएँ आती हैं हमें कब्ज की वजह से –

1.बवासीर (hemorrhoids)-

जब कभी हमें कब्ज की समस्या होती है तो पेट साफ नहीं होता और मल (Stool) भी सख्त (Hard) हो जाता है, और जब हम जब मल को बाहर करने के लिए जोर लगाते हैं तो गुदाद्वार (Anus) के आसपास की त्वचा छील जाती है, जिसकी वजह गुदाद्वार से खून आने लगता है, और कई बार दर्द भी होता है। इसकी वजह से शरीर में कमजोरी भी महसूस होती है।

2.गुदा विदर (anal fissure)-

इस समस्या में गुदाद्वार के पास छोटे -छोटे दाने जैसे या यूँ कह लें मस्से जैसे उभर आ जाते हैं, जो की मल (Stool) के कड़े (Hard) होने की वजह से होता है। और यह इस मल के द्वारा गुदाद्वार के आसपास की त्वचा फटने से होता है।

3.रेक्टल प्रोलैप्स (rectal prolapse) –

यह समस्या तब उत्पन्न होती है जब कब्ज की समस्या कई दिन से बनी हो और मल कड़ा हो, गुदाद्वार से खून आ रहा हो दर्द हो तो गुदा का कुछ भाग बाहर आ जाता है जिसे हम मस्सा (Wart) कहते हैं, यह सूजन की वजह से भी बाहर आ जाता है। कई बार यह गर्म पानी या बर्फ की सेकाई से अंदर भी हो जाता है लेकिन कई बार इसकी सर्जरी (Surgery) करा कर इसे बाहर निकालना पड़ता है।

4.फेकल इंफेक्शन (fecal impaction)-

कई बार कब्ज काफी पुरानी समस्या बन जाती है और इतनी गंभीर हो जाती है की मल आँतों (Instestines) में फसने लग जाता है, जो की खुद से बाहर नहीं आ पाता और इसके उपचार की जरूरत पद जाती है। कई बार यह समस्या अँतड़ियों (Intestine) के फटने (Perforation) का कारण बन जाता है और फिर या समाया काफी गंभीर हो सकती है।

उपचार (Treatment) –

1.गैर चिकित्सीय उपचार (Non-therapeutic treatment)-

गैर चिकित्सीय उपचार का मतलब होता है की जिसमें की हम किसी प्रकार की दवाइयों का उपयोग नहीं करते हैं और अपने खान – पान (Diet) में सुधार कर अपनी कब्ज जैसी समस्याओं को दूर करते हैं। इसमें कुछ उपचार हैं जैसे-
1. सही समय पर भोजन करना।
2. कब किस तरह के भोजन का सेवन करना है यह ध्यान में रख कर भोजन करना।
3.सुबह उठ के नियमित रूप से व्यायाम और योगा करना।
4. खाना खाने के बाद भी आवश्यक रूप से शारीरिक गतिविधियाँ करना।
5.खाने में भरपूर रूप से फाइबरयुक्त भोजन का सेवन करना।
6.खाने में विटामिन, प्रोटीन युक्त भोजन का संतुलित मात्रा में भोजन करें।
7.ज्यादा देर में पचने वाले भोजन , सब्जियाँ या फलों का सेवन भी समय देखकर सीमित मात्रा में करें।
8.पनी का सेवन भरपूर मात्रा में करें।
9.भोजन करते वक्त केवल भोजन के बारे में ही सोचे बाकी अन्य चीजों के बारे में ना सोचें।
10.खाने को कभी जल्दबाजी में ना खाएँ, अच्छे से चबाकर ही खाएँ।
11.मौसमी फलों का सेवन अवश्य करें।
12.ज्यादा एसिड बनाने वाले भोजन से बचें।
13.चाय और कॉफी जैसे पेय पदार्थों का सेवन कम से कम करें और खाली पेट तो बिल्कुल भी इन चीजों का सेवन ना करें।
14. रात के खाने के बाद तुरंत सोने या बैठने से बचें, साथ ही अन्य समयों में भी खाकर बैठने से बचें और लंबे समय तक बैठने से भी बचें।
15.गैस बनाने वाले खाद्य पदार्थों से बचें।
16.पेट साफ होने के लिए रात में खाने के बाद गुड़ का सेवन करें।

2.चिकित्सीय उपचार (therapeutic treatment)-

चिकित्सीय उपचार हम तब अपनाते हैं जब हमारे खानपान से कब्ज की समस्या ठीक नहीं होती और फिर हमें दवाइयों का सेवन करना पड़ता है। जैसे की हम कब्ज के लिए कोई लैक्सएटिव (Laxative) ले सकते हैं जैसे कोई आयुर्वेदिक पाउडर या फिर इसपगुल हस्क पाउडर (Isapghula husk powder)रात को गरम पानी में भीगा कर सोने से पहले पिये। इसके अलावा आप अपने हिसाब से चिकित्सक से परामर्श ले सकते हैं। इसके अलावा कुछ परगेटिव (puragtive) ले सकते हैं जब कब्ज बहुत ज्यादा हो और पुरानी हो तो , यह पेट को आसानी से साफ कर देता है। जैसे बाजार में डलकोफ्लेक्स (Dulcoflex) टेबलेट आती है जो की परगेटिव (puragtive) का काम करती है आप इसे रात में खाना खाने के बाद सोने से पहले कब्ज के अनुसार एक से दो टेबलेट पानी के साथ ले सकते हैं।

सर्जरी (Surgery)-

यह एक अंतिम उपाय है जब गुदाद्वार का कुछ हिस्सा बाहर आ जाता है तो सर्जरी (Surgery)करके उसे बाहर निकाला जाता है, जो को एक अंतिम उपाय है, लेकिन सर्जरी (Surgery) के बाद यह फिर से हो जाता है, इसलिए यह सर्जरी (Surgery) कराने से अच्छा है की खान-पान संतुलित रखें और व्यायाम और शारीरिक गतिविधियाँ अवश्य करें।हमारी दिनचर्या , हमारा खान-पान ही हमें बीमारी मुक्त रख सकता है।

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