वैक्सीन्स मनुष्य के शरीर में कैसे काम करती हैं |How do vaccines work in the human body

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2 वैक्सीन क्या है (what is vaccine)-

वैक्सीन्स मनुष्य के शरीर में कैसे काम करती हैं (How do vaccines work in the human body in Hindi)-

दुनिया में हर व्यक्ति कभी ना कभी बीमार पड़ता है, दवाइयों का सेवन करता है और ठीक होता है लेकिन कई बीमारियाँ ऐसी भी होती हैं जिनसे बचाव के लिए पहले ही वैक्सीन (Vaccine) ले चुके होते हैं, और बीमारी से बच जाते हैं या अगर बीमारी हो भी जाए तो जल्दी ठीक हो जाते हैं या बीमारी का कोई घातक प्रभाव हम पर नहीं पड़ता है। अब सवाल यह की वैक्सीन को कैसे पता चलता है की उसे कब , किस बीमारी के लिए कैसे काम करना है। बहुत ही महामारी (Pandemic) हमारे देश में आयी और गईं, कुछ की वैक्सीन्स भी आयी और लोगों को राहत भी मिली और बचाव भी हुआ, लेकिन कई बार हम कई चीजों के लिए तैयार नहीं होते हैं, और वो अगर अचानक सामने आ जाए तो संभलना थोड़ा मुश्किल होता है, बस यही समस्या वैक्सीन्स के साथ होती है। अचानक से कोई बीमारी अगर महामारी का रूप ले ले और उसके लिए किसी प्रकार की वैक्सीन पहले से ना बनी हो ना कोई दवाई बनी हो तो इंसान कैसे उससे बचेगा। वैक्सीन हमारे लिए बिल्कुल वैसे ही काम करती है जैसे के बच्चे को भूख लगने से पहले उसकी माँ को पता लग जाता है की बच्चे को भूख लगी है। मैं सबसे यही कहना चाहूंगी की अब तक हमारे शरीर के लिए जो भी वैक्सीन्स बीमारी से बचाव के लिए बनी हैं वो उम्र के अनुसार जरूर लगवाएँ ताकि किसी घातक परिस्थिति से बचें।

वैक्सीन क्या है (what is vaccine)-

वैक्सीन हम किसी भी ऐसे पदार्थ को बोलते हैं जो हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune system) को मजबूत करती है, किसी विशेष प्रकार की बीमारी से बचाव के लिए एंटिबॉडीस (Antibodies) का निर्माण करती हैं और उस बीमारी से बचाव के लिए हमारे शरीर में काम करती है। वैक्सीन लगवाने की प्रक्रिया (Process) को वैक्सीनेसन या इमम्यूनाइजेसन (Vaccination or immunization) कहते हैं।

वैक्सीन कितने प्रकार की होती हैं और कैसे बनती हैं (How many types of vaccines are there and how are they made)-

वैक्सीन समान्यतः सात प्रकार की होती हैं –

1.लाइव, एटेनुएटेड वैक्सीन (Live, attenuated vaccine)
2.इनएक्टिवेटेड वैक्सीन (Inactivated vaccine)
3.मैसेन्जर आरएनए वैक्सीन (m- RNA vaccine)
4.टोक्सोइड वैक्सीन (Toxoid vaccine)
5.कंजूगेट वैक्सीन (Cojugate vaccine)
6.डीएनए वैक्सीन (DNA vaccine)
7.रिकोम्बिनेंट वैक्सीन (Recombinent vaccine)
8.सबयूनिट वैक्सीन (Subunit vaccine)

1.लाइव, एटेनुएटेड वैक्सीन (Live, attenuated vaccine) –

जैसे आपने सुना ही होगा की लोहे को लोहा काटता है, बस इसी प्रकार यह वैक्सीन भी बनती है। किसी भी बीमारी को पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों (Microorganisms)से ही यह वैक्सीन बनाई जाती है। इसमें सूक्ष्मजीवों की सक्रियता (Activity) को कमजोर या क्षीण (Attenuated) कर दिया जाता है और उसी बीमारी के विपरीत उपयोग में लाया जाता है जो उस सूक्ष्मजीव ने पैदा की थी। सक्रियता कम होने के बाद ऐसे सूक्ष्मजीवों द्वारा बीमारी पैदा करने की संभावना ना के बराबर हो जाती है और यही हमें बीमारियों से बचाते हैं। जैसे एमएमआर- मिसल्स, मम्प्स, रूबेला (MMR-Measles, Mumps, Rubella)और चिकनपौक्स(Chicken pox) की वैक्सीन्स इसका उदाहरण हैं।

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2.इनएक्टिवेटेड वैक्सीन (Inactivated vaccine) –

इनएक्टिवेटेड वैक्सीन में किसी बीमारी के सूक्ष्मजीव को गर्मी (Heat), रासायनिक पदार्थ (Chemical substances)या फिर रेडिएसन (Radiation) से पूरी तरह
मार दिया (Kill) जाता है, और इस प्रकार की वैक्सीन्स बहुत ही सुरक्षित (safe) और स्थिर (Stable) होते हैं और ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मरने के बाद किसी भी सूक्ष्मजीव में म्यूटेसन (Mutation) की संभावना काफी कम हो जाती है जो की बीमारी का कारण दोबारा नहीं बन सकते हैं। इसके उदाहरण हैं जैसे रेबीज (Rabies), हेपटाइटिस ए (Hepatitis A), इंफ्लुएंजा वैक्सीन (Influenza vaccine)और पोलियो (Polio)वैक्सीन

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3.मैसेन्जर आरएनए वैक्सीन (m- RNA vaccine)-

कोरोना महामारी (Corona pandemic) के बाद इस प्रकार की वैक्सीन के बारे में सभी जानने लगे हैं। इस प्रकार की वैक्सीन में आरएनए (RNA) अणु (Molecule) लिया जाता है जो की हमारे शरीर में प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune system) को मजबूत करता है, इस आरएनए (RNA) अणु (Molecule)को इस प्रकार बनाया जाता है जिससे यह हमारे शरीर में मौजूद प्रतिरक्षा कोशिकाओं (Immune cells)में प्रोटीन बनाने का कम करते हैं, अगर हम किसी बीमारी से ग्रसित होने वाले होते हैं तो। मतलब यह है की यह मैसेन्जर आरएनए वैक्सीन का उपयोग कर किसी वाइरस के बाहर के विदेशी (Foreign) प्रोटीन का निर्माण करने का निर्देश देता है। इसका वर्तमान उदाहरण कोरोना वैक्सीन (Corona vaccine) है।

4.टोक्सोइड वैक्सीन (Toxoid vaccine) –

इस वैक्सीन का निर्माण बैक्टीरिया (Bacteria) में पाये जाने वाले विषाक्त पदार्थों को निष्क्रिय करके किया जाता है, जो की व्यक्ति के शरीर में बीमारी उत्पन्न करते हैं। इस प्रकार के वैक्सीन का निर्माण केवल उन बीमारियों के सुक्ष्म्जीवों के लिए किया जाता है, जिनमें विषाक्त पदार्थों (Toxic) पदार्थों का निर्माण होता है, इसलिए इसे टोक्सोइड (Toxoid) भी कहा जाता है। इसके उदाहरण डिप्थिरिया और टिटनस (Tetanus) है।

5.कंजूगेट वैक्सीन (Conjugate vaccine)-

जैसा की हम जानते हैं की कोई भी ऐसे तत्व या यूँ कह लें बैक्टीरिया या कोई भी ऐसे तत्व जो हमें एलर्जी (Allergy) उत्पन्न करते हैं वह एंटीजन (Antigen) कहलाते हैं।
कंजूगेट वैक्सीन (Conjugate vaccine)सूक्ष्मजीवों के कुछ हिस्सों को लेकर बनाया जाता है , बहुत से बैक्टीरिया ऐसे होते हैं जिनकी कोटिंग (Coating) पॉलीसेकेराइड
(Polysaccharide) नामक शुगर (Sugar) होती और यह इसलिए होती है ताकि इन्हें पहचानना मुश्किल हो जाए मतलब बैक्टीरिया जो की एंटिजेन्स (Antigens)
हैं उन्हें हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune system) पहचान ना पाये। इसी वजह से छोटे बच्चे या ऐसे व्यक्ति जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत नहीं होती है तो वह इन कोटेड (Coated) बैक्टीरिया को पहचान नहीं पाती । इसलिए यह कंजूगेट वैक्सीन (Conjugate vaccine) ऐसे ही बैक्टीरिया पर प्रभावी होता है।

6.डीएनए वैक्सीन (DNA vaccine) –

डीएनए (DNA) वैक्सीन को बनाने के लिए वायरस (Virus) के ही डीएनए (DNA)का कुछ हिस्सा लिया जाता है, और यह उम्मीद की जाती है की इस डीएनए (DNA) के हिस्से से ही डीएनए (DNA)की कॉपियाँ बनाई जाएँ, यह भी माना जाता है की यह जीवित वायरस के टीके की तरह सुरक्षित और बेहतर होगा। इसमें बीमारी पैदा करने की संभावना काफी कम होगी क्योंकि इसमें बीमारी पैदा करने वाले वायरस की हिस्से को नहीं लिया जाता है, जिसकी वजह से यह बीमारी का कारण भी नहीं बनेगा । वर्तमान में कई बीमरियों से बचाव के लिए इस प्रकार के टीके के लिए अध्ययन किया जा रहा है।

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7.रिकोम्बिनेंट वैक्सीन (Recombinant vaccine) –

रिकोम्बिनेंट वैक्सीन (Recombinant vaccine)बिल्कुल डीएनए वैक्सीन (DNA vaccine)की तरह होता है बस इसमें फर्क इतना होता है की इसमें किसी कमजोर या क्षीण जीवित (Live attenuated)सूक्ष्मजीव को डीएनए (DNA)को रखने के लिए उपयोग में लाया जाता है और इसका उपयोग कोशिकाओं (Cells) में प्रवेश (Enter) करा कर प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune system) की मजबूती को उत्प्रेरित या प्रोत्साहित (Stimulate) किया जाता है।

8.सबयूनिट वैक्सीन (Subunit vaccine)-

इस वैक्सीन को भी वायरस के कुछ हिस्सों को लेकर बनाया जाता है , लेकिन इसमें वायरस के उसी हिस्से को लिया जाता है जो की बीमारी को उत्पन्न करता है। और यह जो वायरस का हिस्सा होता है वह प्रोटीन से बना होता है , जो की व्यक्ति के शरीर में एंटिजन (Antigen) का काम करता है। यह लगभग एक से बीस एंटिजंस (Antigens)से बना होता है, मतलब की सबयूनिट वैक्सीन एक या एक से अधिक एंटिजन से बन सकता है। यह अत्यधिक शुद्ध प्रोटीन या पेपटाइड से बनाए जा सकते हैं, और यह सिंथेटिक बनाए जाते हैं मतलब की लेबोरेटोरी (Laboratory)में बनाए जाते हैं। यह वैक्सीन व्यक्ति के शरीर में एंटिजन के विपरीत एंटिबोडिस (Antibodies) बनाने का काम करती है, और प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune system)को मजबूत बनाने में सहायक है। अगर हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली इस प्रोटीन को पहचान ले तो यह एंटिबोडिस (Antibodies)का निर्माण शुरु कर देती है।

वैक्सीन्स मनुष्य के शरीर में कैसे काम करती हैं-

जैसा की हमने देखा की वैक्सीन लगभग 8 प्रकार की बनाई जाती हैं, सभी वैक्सीन में बैक्टीरिया, वायरस या उनके हिस्से उपयोग में लाकर बनाए जाते , लेकिन अब बात यह आती है की यह वैक्सीन्स काम कैसे करती हैं और इनकी जरूरत हमें क्यूँ पड़ती है।

1.प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune system) –

भगवान ने हमें एक ऐसी प्रणाली बना के दी है जिससे हम कई छोटी-मोटी बीमारियों से बच जाते हैं, या बहुत जल्दी ठीक हो जाते हैं इसे प्रतिरक्षा प्रणाली कहा जाता है, जिसमें कई ऐसी कोशिकाएं मौजूद होती हैं जो हमें बीमारियों से बचाती हैं, बैक्टीरिया, वायरस से बचाती हैं और उन्हें ढूंढ के मारने का भी काम करती हैं और हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाती है। जैसे की –

1.मैक्रोफेजेस (Macrophages)-

मैक्रोफेजेस (Macrophages)कोशिकाएं हमारे शरीर में पाये जाने वाली श्वेत रक्त कणिकाओं (White blood vessels) का एक प्रकार है जो हमारे शरीर में सूक्ष्मजीवों (Germs) को खाने और निगलने का काम करती है जिसे हम फैगोसाइटोसिस (Phagocytosis) के नाम से जानते हैं,इसका मतलब किसी कोशिका को खाना होता है और पिनोसाइटोसिस (Pinocytosis) का मतलब कोशिकाओं को पीना होता है और यह दोनों काम मैक्रोफेजेस (Macrophages)का है और इसी क्रियाविधि से यह हमारा बचाव सूक्ष्मजीवों (Germs) और उनसे होने वाली बीमारियों से करते हैं। अब यह मैक्रोफेजेस (Macrophages)कोशिकाएं हमारे शरीर में प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में योगदान देती हैं।

2.बी- लिम्फोसाइट्स (B-lymphocytes) –

यह भी हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली में मौजूद एक रक्षात्मक कोशिका है जिसे हम श्वेत रक्त कणिकाओं (White blood vessels)के नाम से जानते हैं। यह कोशिकाएं हमारे शरीर में सूक्ष्मजीवों (Germs)से लड़ने एवं उनसे बचाव के लिए काम करती हैं और एंटिजन से लड़ने के लिए एंटिबॉडीस (Antibodies) का निर्माण करती हैं।

3.टी-लिम्फोसाइट्स (T-lymphocytes) –

यह भी हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली में मौजूद एक अन्य रक्षात्मक कोशिका है जो की श्वेत रक्त कणिकाओं (White blood vessels)का ही एक प्रकार है। यह हमारे शरीर में परिचित सूक्ष्मजीवों को पहचानने का काम करती है जब हमारा शरीर दोबारा उस सूक्ष्मजीव के संपर्क में आता है तो जैसे उदाहरण के तौर पर अगर किसी को रेबीज हो जाए तो एक बार टी-लिम्फोसाइट्स (T-lymphocytes)इनके संपर्क में आएँगी और दोबारा अगर फिर कभी इसके सूक्ष्मजीव(Germ)शरीर में प्रवेश (Enter) करते हैं तो यह टी-लिम्फोसाइट्स (T-lymphocytes) इसे आसानी से पहचान जायेंगे और उनसे बचाव के लिए प्रक्रिया शुरू कर देगा।

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इन तीनों ही कोशिकाओं को मिलाकर हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली बनती है , जो की हमें किसी भी तरह की बीमारी से बचाने का कम करती हैं और हर तरह के बैक्टीरिया, वायरस या फंगी (Fungi) से लड़ने का काम करती हैं। अब जब तक हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली स्वस्थ्य है , मजबूत है तब तक आप सर्दी से लेके कैंसर जैसी बीमारी से लड़ने और बचने तक की क्षमता रखते हैं। मतलब की अगर आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत है तो आप हर प्रकार के रोगों से बचेंगे और अगर किसी रोग से प्रभावित हो भी जाते हैं तो भी आपको यह मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली आपको

2.वैक्सीन का काम (Work of vaccine) –

जब तक हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत है , तब तक हमारे शरीर में बीमारियों के लिए रोगप्रतिरोधक क्षमता (Immunity) भी मजबूत रहेगी और किसी भी रोगाणु या विषाणु (germ or virus) जो की हमारे शरीर के लिए एंटिजंस (Antigens) हैं और इनसे बचाव के लिए हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune system)इन एंटिजंस (Antigens)के विपरीत एंटिबॉडीस (Antibodies) का निर्माण खुद ब खुद प्राकृतिक (Naturally) तरीके करेगी और इन रोगाणु या विषाणु (germ or virus)पर हावी होकर हमें बीमारी से बचाएगी और अगर हम बीमार हो भी जाते हैं तो हमें बीमारी से जल्दी उबरने और स्वस्थ करने में अपना योगदान देगी है। अब दुनिया में बहुत से लोग हैं जिनमें से कुछ की रोगप्रतिरोधक क्षमता (Immunity) काफी मजबूत होती है लेकिन कुछ लोगों की काफी कम तो जब ऐसे लोगों, जिनकी रोगप्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बहुत ही कमजोर होती है तो एंटिजन से बचाव के लिए एंटिबॉडीस का निर्माण काफी कम हो जाता है जिससे यह एंटिजंस (Antigens)मतलब रोगाणु या विषाणु (germ or virus)व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली पर हावी होने लगते हैं और बीमारियों को और बढ़ाने लगते हैं , तब आपको जरूरत पड़ती है ऐसे रोगों से बचाव से वैक्सीन्स की ताकि यह एंटिजन का प्रभाव हमारे शरीर में बहुत कम कर दे और एंटिबॉडीस का निर्माण बढ़ा दे, ताकि व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली फिर से मजबूत हो जाए और रोगाणु या विषाणु (germ or virus)से लड़ सकें और शरीर को बीमारियों से बचाए।

3.वैक्सीन की बूस्टर डोज (Booster dose of vaccine) –

वैक्सीन की एंटिबॉडीस बनाने की क्षमता कुछ विशेष समय के लिए होती हैं जैसे कई बार आपने यह खुद अनुभव किया होगा की वैक्सीन की कम से कम दो डोज (Dose)कुछ समय अंतराल (Time interval)में लगती है जैसे एक डोज लगा हो उसके बाद दूसरी खुराक छः महीने या साल भर बाद लगे यह तो बात हुई सामान्य खुराक की जो की अपने एक विशेष काल (Life period) में सक्रिय रहेगी और एंटिबॉडीस का निर्माण करेगी रोगाणुओं और विषाणुओं से और रोगों से बचाव करेगी, लेकिन कुछ समय बाद इन खुराकों(Doses)की सक्रियता कम होती जाएगी जो की हमारी प्रतिरक्षा को मजबूती प्रदान करना बंद कर देगी । इसके लिए दोनों खुराखों की सक्रियता वापस बनाए रखने के लिए वैक्सीन की बूस्टर डोज दी जाती है।

अब इन बातों से साफ है की बीमारियों से बचाव में सबसे बड़ा योगदान हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune system) का ही होता है तो आप अपने शरीर को जितना सेहतमंद रखेंगे उतना ही आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत रहेगी और आप बीमारियों और उनके कारकों से हमेशा बचेंगे। इसलिए अच्छे भोजन का और फलों का सेवन करें जिससे आपकी रोगप्रतिरोधक क्षमता (Immunity) किसी बीमारी के लिए काफी मजबूत हो। अपने शरीर को हर वो पोषक तत्व (Nutrients)दें जिससे आपकी रोगप्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़े और आप हर बीमारी से जंग जीत के आगे बढ़ें।

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