ब्रेन ट्यूमर क्या है, प्रकार , लक्षण, कारण और बचाव एवं इलाज |What is brain tumor, types, symptoms, causes and prevention and treatment in hindi

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दोस्तों आज के समय में अगर हम जीवन जीने की बात करें तो हम जीवन को कब तक जी पाएंगे और कैसे जी पाएंगे इसे कोई ना बता पाया है ना ही बता पाएगा। इसी प्रकार हम बात करने वाले हैं एक ऐसी बीमारी के बारे में जो काफी गंभीर है और जल्दी पता भी नहीं चलती है। हम बात कर रहें है ट्यूमर की , अगर सरल शब्दों में कहें तो गाँठ की, जो व्यक्ति के शरीर के किसी भी भाग में हो सकती है। कई बार हमें अपने शरीर में बदलाव नहीं दिखता या दिखता भी है तो हम उसे समझ नहीं पाते हैं और बाद में वह बाद में बीमारी का रूप ले लेती है जो हमारे कई हमारे लिए प्राण घातक सिद्ध हो जाता है। हमारे शरीर में कोशिकाओं की वृद्धि के सीमित मात्रा या यूँ कह लें एक सीमित संख्या में होती है और ट्यूमर में भी हमारे शरीर की कोशिकाएं ही जिम्मेदार होती हैं। कोशिकाएं अगर सामान्य तरीके से वृद्धि कर रही हैं तो यह सही है लेकिन जैसे ही यह असामान्य तरीका अपनाती हैं, यह एक मास (Mass) या गांठ का रूप ले लेती हैं, इसलिए शरीर के किसी भी हिस्से में अगर कोई परिवर्तन दिखाई दे रहा हो, तो उसे ध्यान दे और अगर लग रहा की यह असमान्य हो रहा तो तुरंत चिकित्सक की सलाह लें।

ब्रेन ट्यूमर क्या है (What is brain tumor)-

ब्रेन ट्यूमर हमारे मस्तिष्क के किसी भी हिस्से में कोशिकाओं के असामान्य गति से वृद्धि करने की वजह से हो सकती हैं जो बाद में एक गांठ का रूप ले लेती है और बाद में इसका आकार भी बढ़ने लगता है। कई बार ब्रेन ट्यूमर मे या किसी भी प्रकार के ट्यूमर में दर्द नहीं होता है , लेकिन जब यह बढ़ने लगता है तब हल्का- हल्का दर्द महसूस होता है। जब कोशिकाएं आपस में मास या गांठ क रूप लेने लगती हैं तो धीरे-धीरे रक्त का प्रवाह (Blood flow) रक्त लसिकाओं (Blood vessels) में कम होने लगता है, जिसकी वजह से दर्द शुरू होने लगता है और कई बार यह मस्तिष्क में हेमरेज (Haemorrhage) का कारण भी बन जाता है, अब यह इस बात पर भी निर्भर करता है की ट्यूमर का प्रकार क्या है।

ब्रेन ट्यूमर के प्रकार (Types of brain tumors) –

ब्रेन ट्यूमर का प्रकार इस बात पर निर्भर करता है की मस्तिष्क की कोशिकाएं कैंसर का रूप ना लेने वाली या कैंसर न फैलाने वलयी मतलब बिनाइन (Benign tumors) कोशिकाएं हैं या फिर कैंसर फैलाने वाली कोशिकाएं जो कैंसर का रूप ले लेती हैं। यही बात ट्यूमर के बारे में यह बता सकता है की यह कितना घातक है। धीमी गति से बढ़ने वाली कोशिकाओं द्वारा हुआ ब्रेन ट्यूमर उतना घातक नहीं होता है जितना तेज गति से बढ़ने वाली कोशिकाओं से होता है, यह आपके लिए प्राणघातक हो सकती हैं। इसके कुछ प्रकार हैं –

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1.बिनाइन ब्रेन ट्यूमर (Beningn tumor)- इसे हम कई और प्रकार में वर्गीकृत कर सकते हैं –

1.कोर्डोमास (Chordomas)-

यह धीमी गति से बढ़ने वाले ऐसे ट्यूमर हैं प्रायः मस्तिष्क अथवा खोपड़ी के नीचले स्तर या आधार पर या फिर रीढ़ के निचले हिस्से पर होते हैं। यह समान्यतः 50 से 60 वर्ष की आयु के लोगों में देखने को मिलता है। वैसे तो यह काफी दुर्लभ हैं कहने का मतलब है 10 में से दो लोगों को होने की संभावना होती है, लेकिन अगर यह हो जाए तो यह हमारी हड्डियों पर और हमारी तंत्रिका तंत्र पर काफी असर बुरा असर दाल सकते हैं।

2.क्रानियोफेरीन्जिओमास (Craniopharyngiomas)-

यह ट्यूमर काफी सामान्य होता है लेकिन यह मस्तिष्क के काफी गहरी संरचनाओं में होता जिसकी वजह से इसे निकाल पाना काफी मुश्किल होता है, जो आगे चलकर सामान्य होते हुए भी काफी गंभीर हो जाते हैं। इसका स्तोत्र एक महत्वपूर्ण ग्रंथि जिसे हम पिट्यूटरी ग्रंथि के नाम से जानते हैं को माना जाता है, और यह हमारे शरीर में होर्मोंस के संतुलन में एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं तो अगर व्यक्ति इस प्रकार के ट्यूमर से ग्रसित होता है तो उसे होर्मोन रिप्लेसमेंट लेने की आवश्यकता हो जाती है, और होर्मोन के असंतुलन से कई अन्य बीमारियाँ हो सकती हैं।

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3. माइनिंजीओमास (Meningiomas)-

जैसा की नाम से ही समझ आ रहा की यह मस्तिष्क की रक्षा करने वाली एक झिल्ली जैसी संरचना जिसे मेनिनजेस (Meninges) कहते हैं, में हो सकती है। यह भी एक सामान्य ट्यूमर होता है जिसमें मस्तिष्क नियोप्लास्म (Neoplasm) का कुछ हिस्सा मौजूद होता है, इसे इंटराक्रैनियल (Intracranial)ट्यूमर के नाम से भी जाना जाता है।

4.गैंग्लियोसाइटोमास (Gangliocytomas)-

यह काफी सामान्य तरह का ट्यूमर होता है जो की तंत्रिका तंत्र (Neoplastic nerves)की के आपस में इकट्ठा हो जाने की वजह से होता है। यह ट्यूमर ज्यादातर युवाओं में देखने को मिलता है।

5.पाइनोसाइटोमास (Pineocytomas)-

यह यह ट्यूमर भी समान्यतः वयस्कों में देखने को मिलता है, यह एक धीमी गति से बढ़ने वाला ट्यूमर है जो की घाव के रूप में पीनियल कोशिकाओं से उत्पन्न होते हैं। यह आक्रामक नहीं होते हैं, एक ही संरचना में बढ़ते हैं। धीमी गति से बढ़ने की वजह से यह काफी हद तक कम घातक होते हैं।

6.ग्लोमस जुगुलर (Glomus jugular)-

यह बहुत ही सामान्य तरह के ट्यूमर होते हैं जो की मस्तिष्क के निचले आधार पर या गले की नस में होते हैं। यह इसका सबसे आप रूप है।

7.श्वान्नोमास (Schwannomas)-

इस तरह के तरह के ट्यूमर वयस्कों में काफी आम हैं, जो की मुख्यतः तंत्रिका तंत्र की कोशिकाओं से उत्पन्न होते हैं और यह तंत्रिका तंत्र की कोशिकाएं “विद्युत रोधक ” की तरह कार्य करती हैं, मतलब के हमारे शरीर में उतेजना (Stimulation) को संतुलित बनाए रखती हैं उसमें होती हैं। यह व्यक्ति के सामान्य तंत्रिका तंत्र बिना नुकसान पहुंचाए या आक्रमण किए बिना तंत्रिका तंत्र के शेष भाग (Remaining part) को विस्थापित (displace) कर देता है। एकोस्टिक तंत्रिका ट्यूमर एक काफी आम प्रकार का श्वान्नोमास (Schwannomas)है आठवीं कपाल तंत्रिका (8th cranial nerve) या फिर वेस्टिबुलरकोकलियर (vestibularcochlear )जैसे महत्वपूर्ण तंत्रिका तंत्र से शुरू होता है। वैसे तो यह काफी सरल होते हैं लेकिन अगर आयाह बढ़ने लगें तो यह नसों पर दबाव (Pressure) डालना शुरू कर देते हैं और फिर व्यक्ति को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यह शरीर के कई अंगों तक जाने वाली तंत्रिका तंत्र कोशिकाओं को प्रभावित कर सकती है और यह आगे चलकर इतना घातक ट्यूमर सिद्ध हो
सकता है की व्यक्ति की जान भी ले सकता हैं।

यह बिनाइन ब्रेन ट्यूमर (Beningn tumor)के कुछ ऐसे सामान्य प्रकार हैं जो की काफी कम घातक होते हैं और समय से पता चल जाने पर इनका उपचार भी किया जा सकता है। लेकिन कुछ प्रकार ऐसे भी हैं जिन्हें ध्यान नहीं देने पर यह व्यक्ति के लिए काफी घातक भी सिध्द हो सकते हैं।

2.मैलिग्नेनेट ब्रेन ट्यूमर (Malignanat brain tumor) –

यह ट्यूमर के ऐसे प्रकार हैं जो व्यक्ति के लिए काफी घातक सिद्ध हो सकते हैं और कई बार इनका पता काफी देर से पता चलता है और तब इसका उपचार करना भी काफी मुश्किल हो जाता है।

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1.ग्लिओमास (Gliomas)-

यह वयस्कों में सबसे आम प्रकार का ट्यूमर है जो की लगभग 78 प्रतिशत मस्तिष्क ट्यूमर के लिए जिम्मेदार है , जो की काफी घातक होते हैं। यह मस्तिष्क की सहायक कोशिकाओं से उत्पन्न होते हैं, जिन्हें ग्लिया कोशिकाएं (Glia Cells) कहा जाता है और यह कई भागों में विभाजित होती हैं जैसे ऑलिगोडेंड्रोग्लिअल कोशिकाएं , एपेंडिमल कोशिकाएं और एस्ट्रोसाइट्स कोशिकाएं। ग्लिओमास ट्यूमर में कुछ निम्न प्रकार के ट्यूमर होते हैं जैसे-

1.एस्ट्रोसाइटोमास (Astrocytomas)-

यह ग्लिओमास का सबसे आम प्रकार है जो की हमारे प्राथमिक मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी का लगभग आधा हिस्सा है और यह ट्यूमर तारे के आकार के कुछ ग्लिया कोशिकाओं से उत्पन्न होते हैं इन्हें ही एस्ट्रोसाइटोमास के नाम से जाना जाता है। एस्ट्रोसाइटोमास मस्तिष्क की सहायक कोशिकाओं का हिस्सा है। वैसे तो यह मस्तिष्क के सभी हिस्सों में पाये जा सकते हैं लेकिन यह मस्तिष्क के सेरेब्र्म (Cerebrum) में अधिकता में होते हैं। यह मध्यम वर्ग के लोगों में अधिकता में होता है, लेकिन यह किसी भी आयु वर्ग में हो सकता है। यह प्रायः बच्चों और वयस्कों में होता है और बच्चों में यह निचले स्तर का हो सकता है लेकिन वयस्कों में काफी उच्च स्तर का हो सकता है।

2.एपेंडिमोमास (Ependymomas)-

यह ट्यूमर एपेंडिमल (ependymal )कोशिकाओं जो की वेंट्रिकुलर सिस्टम को ढकने वाली कोशिकाओं के रूप में जानी जाती हैं, इसके कैंसर में परिवर्तित होने की वजह से उत्पन्न होता है या यूँ कह लें की एपेंडिमल कोशिकाओं के नियोप्लास्टिक (Neoplastic)परिवर्तन की वजह से होता है। यह मस्तिस्क में सभी प्रकार के ट्यूमर के लिए लगभग तीन प्रतिशत तक जिम्मेदार होता है।

3. मेडुलोब्लास्टोमा (Medulloblastoma)-

यह ट्यूमर आमतौर पर मस्तिष्क के सेरेबेलम (Cerebellum)में होता है जो की अधिकांशतः बच्चों में होता है और यह काफी घातक और उच्च स्तर का होता है। यह रेडिएशन (Radiation) और कीमोथेरेपी (chemotherapy) जैसे उपचार के प्रति संवेदना प्रकट करते हैं।

4.ग्लियोब्लास्टोमा मल्टीफ़ॉर्म (GBM) (Glioblastoma multiforme)-

ग्लियोब्लास्टोमा मल्टीफॉर्म जैसा की नाम से ही पता चल रहा है मल्टीफॉर्म (Multiform) मतलब की काफी आक्रामक। यह ग्लिया ट्यूमर का सबसे घातक प्रकार जो ऊतकों (Tissues) में बहुत तेजी से फैलता और इन्हें आसानी से नहीं पहचाना जा सकता है। यह एस्ट्रोसाइट्स और ऑलिगोडेंड्रोसाइट्स जैसी अलग- अलग से कोशिकाओं से बनते हैं। यह ट्यूमर लगभग 50 से 70 वर्ष की आयु के लोगों के को प्रभावित करता है और यह सबसे ज्यादातर महिलाओं को अपना शिकार बनाता है।

यह मैलिग्नेनेट ब्रेन ट्यूमर के कुछ ऐसे प्रकार हैं जो काफी घातक होते हैं ।

ब्रेन ट्यूमर के लक्षण (Symptoms of brain tumor) –

ब्रेन ट्यूमर के लक्षण इस बात पर निर्भर करता है की ट्यूमर किस प्रकार का है, मस्तिष्क के किस भाग में हुआ है।
जैसे-

1.फ्रोंटल लोब (Frontal lobe) :-

इस भाग में अगर ट्यूमर हो तो व्यक्ति में सामाजिक और व्यावहारिक आचरण में बदलाव, मन का खराब रहना, आवाज में कमी रहना जैसे लक्षण दिखाई पड़ सकते हैं।

2.पार्श्विका लोब (Parietal lobe) :-

यह सेरेबरम (Cerebrum) का भाग है सिर के पीछे का भाग होता है, यह हमारे शरीर में संवेदनाओं जैसे की दर्द, तापमान और स्पर्श के लिए जिम्मेदार होते हैं, तो अगर इस भाग में ट्यूमर होने से व्यक्ति के शरीर के किसी भी अंग में सुन्न होने की शिकायत, जागरूकता में कमी, हाथों और आँखों में संतुलन ना होना, शब्दों को समझने बोलने या फिर लिखने में समस्या होना और शारीरक
कमजोरी होना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

3.टेम्पोरल लोब (Temporal Lobe) –

यह सेरेबरम (Cerebrum)का हिस्सा है जो हमारे कानों के पास मस्तिष्क की किनारे मौजूद होता है यह भाग हमारे सुनने-समझने की क्षमता, लोगों को पहचाने की क्षमता के लिए और हमारी याददाश्त के लिए जिम्मेदार होता है। इस भाग में ट्यूमर की वजह से व्यक्ति दूसरों की भावनाओं को सही से समझने में असक्षम महसूस करता है, सुनने में कमजोरी, बोलने में असमर्थ , अजीब से गंध महसूस करना, याददाश्त कमजोर होना और अजीब सी अनुभूतियाँ होना जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं।

4. ओक्सीपिटल लोब (occipital lobe) –

यह भाग हमारे मस्तिष्क के पीछे का भाग है जो हमारी संतुलित दृष्टि, शब्दों को पढ़ने और रंगों को पहचाने में अपना योगदान करता है। इस भाग में ट्यूमर होने पर आसपास मौजूद वस्तुओं को पहचानने में दिक्कत या कठिनाई का सामना करना पड़ता है।

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यह तो कुछ लक्षण थे इसके अलावा चलने में कठिनाई, थकावट या कमजोरी और अपने आप को स्थिर या संतुलित नहीं रख पाना जैसे लक्षण भी व्यक्ति में दिखाई देते हैं।

कारण (Cause) –

ब्रेन ट्यूमर के सटीक कारणों का पता अब तक नहीं लगाया जा सका है लेकिन कुछ ऐसे कारक जैसे की पारिवारिक जेनेटिक, आयु, वातावरण और रहन- सहन , कार्यक्षेत्र और जेंडर (Sex) को इसका कारक माना जाता है।

1.सेक्स (sex)-

कुछ ब्रेन ट्यूमर अगर देखा जाए तो महिलाओं को ज्यादा प्रभावित करते हैं, इसलिए अगर अनुपात देखा जाए तो महिलाओं की ज्यादा है।

2.पारिवारिक इतिहास या जेनेटिक हिस्ट्री (Family history or Genetic history) –

ऐसा माना जाता है की अगर कोई बीमारी किसी के परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है तो वह बीमारी आगे की पीढ़ी में भी किसी ना किसी को होगी ही।

3.कार्यक्षेत्र एवं रहन-सहन –

कई बार हमारा रहन- सहन और खान-पान भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। अगर हम किसी फैक्ट्री (Factory) में काम कर रहे हैं जहां रेडिएसन (Radiation)होता हो या फिर आप केमिकल्स (Chemicals) के बीच रेह कर कम करते हैं तो आप के लिए यह भी एक कारक सिद्ध हो सकता है।

4.आयु (age) –

यह लगभग 50 से 60 वर्ष के लोगों को ज्यादा प्रभावित करता है। लेकिन यह किसी भी आयु वर्ग के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा किसी पुरानी चोट या प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होने की वजह से भी ट्यूमर की संभावना बढ़ सकती है।

बचाव एवं इलाज (Prevention and treatment)-

जैसा की मैंने पहले की कहा है की शरीर अगर कोई भी लक्षण दिख रहे चाहे वह बुखार ही क्यूँ ना हो या फिर कोई गाँठ होनी शुरू हुई हो तो उसे ज्यादा समय देते हुए तीन दिन के अंदर अगर ठीक ना हुआ हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ, लगातार उसे नजरअंदाज ना करें क्योंकि ऐसा करने से यह आपके लिए काफी घातक सिद्ध हो सकता है। यह तो रही बचाव की बात लेकिन अगर ब्रेन ट्यूमर हो जाए तो उसका इलाज क्या है:-

1.सर्जरी (Surgery) :-

यह प्रक्रिया भी हम तभी अपना सकते हैं जब की ट्यूमर कैंसर में परिवर्तित ना हुआ हो या फिर गाँठ को निकालना खतरे में ना हो। अगर गाँठ छोटी है तो हम इसे आसानी से सर्जरी द्वारा निकलवा सकते है और यह ज्यादा खतरनाक भी नहीं होगा।

2.कीमोथेरपी (Chemotherapy):-

यह गाँठ या ट्यूमर के स्तर के हिसाब से किया जाता है। यह काफी प्रभावी होता है लेकिन उससे ज्यादा यह खतरनाक भी होता है और इसके साइड इफफ़ेक्ट्स भी ज्यादा होते हैं और कई बार कैंसर या ट्यूमर से बचने के चक्कर में यह हमारे लिए घातक भी हो सकता है।

3. टारगेटेड ड्रूग डिलिवरी सिस्टम (Targeted drug delivery system) –

विज्ञान ने काफी तरक्की कर ली जिसके चलते नए-नए तरीके से ड्रूग या दवाई को बॉडी में आसानी से वहाँ पहुंचाया जा सकता है , जहां बीमारी की जड़ हो। इसे ड्रूग डिलिवरी सिस्टम में हम ट्यूमर को ठीक करने के लिए दवाई को उसी कोशिका या ऊतकों में भेज देते हैं, जहां ट्यूमर का निर्माण हुआ है, इससे शरीर के अन्य हिस्सों को दवाई का अनचाहा सामना नहीं करना पड़ता है।

4.रेडिएसन थेरेपी (Radiation therapy)-

ट्यूमर को निकालने या गलने के लिए रेडिएसन थेरेपी (Radiation therapy)का भी सहारा लिया जा सकता है।

शरीर में किसी भी प्रकार का बदलाव अगर आपको दिख रहा है और एक सामान्य समय से अधिक समय ठीक होने में ले रहा या ठीक नहीं हो रहा है तो आपको सावधान होने की जरूरत है और इसे नजरअंदाज बंद करने की जरूरत है।

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