घर पर माइग्रेन के दर्द से राहत पाने के प्राकृतिक तरीके | Natural Ways to Relieve Migraine Pain at Home in hindi

माइग्रेन पैन आजकल लोगों में बहुत देखा जा रहा है। माइग्रेन पैन की पहचान तब हो पाती है जब सिर में दर्द बहुत अधिक बढ़ जाता है; अर्थात असहनीय व कई दिनों तक चलने वाला दर्द होता है। आजकल के व्यस्त जीवन में सिर दर्द जैसी समस्या साधारण होने लगी है, जिसके कई कारण हो सकते हैं। परन्तु सामान्यतः इस दर्द और माइग्रेन के दर्द में एक बड़ा अंतर होता है। मुख्य अंतर यह होता है कि माइग्रेन का दर्द continuous होता है वह भी उतनी ही तीव्रता के साथ, जो कई दिनों तक लगातार चल सकता है।

 माइग्रेन क्या है?

माइग्रेन असल में सिर में कपाल के नीचे की एक माइक्रो इंफ्लामेशन होती है, जिसका बनना अनिश्चित होता है। जो कभी कभी स्वतः ही दर्द देना आरम्भ कर देती है। कभी कभी यह कुछ अन्य कारणों से भी triggered होती है; अन्य कारणों में high BP, तनाव, alergic reaction, भूख, acidity, insomnia, drugs आदि आ सकते हैं, जो या तो माइग्रेन के दर्द को शुरू करते हैं या दर्द को बढ़ाने का काम करते हैं।कई अनुसन्धानों से यह पाया गया है कि pain killers, anti piratic, antibiotic आदि माइग्रेन की समस्या को लंबे समय की बीमारी बना सकती है और स्थिति अधिक बिगाड़ सकती है।अन्य शब्दों में इसे accomodation of headache भी कहा जाता है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक लाइफस्टाइल disease है।

 क्या माइग्रेन का स्थायी इलाज है?

यह पाया गया है कि माइग्रेन की तीव्रता यदि तुलनात्मक रूप से कम है या शुरुवात की अवस्था है तो इसे एलोपैथी की दवाओं से स्थाई रूप से ठीक किया जा सकता है। अतः पहले आपको एलोपैथी के किसी अच्छे डॉक्टर के पास जाकर treatment लेनी चाहिए। माइग्रेन यदि अधिक तीव्र है या लम्बे समय से यह समस्या है तब अधिकतर मामलों में यह पाया गया है कि allopathy की दवाएँ तुरन्त तो दर्द से छुटकारा देती हैं परन्तु इसका स्थाई इलाज नहीं हो पाता और बीच बीच में एक समय अंतराल के बाद मरीज को माइग्रेन के दर्द से जूझना पड़ता है। चूँकि माइग्रेन एक माइक्रो इंफ्लामेशन होता है; अतः इसे प्राकृतिक तरीके से ठीक करने की संभावना अधिक होती है विशेषकर Aayurved व naturopathy में  यदि एलोपैथी के द्वारा आपका स्थाई इलाज न हो पाए तब आपको अन्य विकल्पों के तरफ अवश्य जाना चाहिए। साथ ही माइग्रेन दर्द होने के समय मरीज को तुरन्त राहत देने के लिए कुछ प्राकृतिक home remedies भी हैं।

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माइग्रेन का स्थायी इलाज!

माइग्रेन जैसी बीमारी को स्थायी रूप से केवल प्राकृतिक तरीके से ठीक किया जा सकता है। यदि आपके आस पास आयुर्वेद के ज्ञाता या वैद्य हैं तो सबसे अच्छा विकल्प यही है कि आप उनके पास जा कर ट्रीटमेन्ट लें। यदि आयुर्वेदिक डॉक्टर/वैद्य उपलब्ध नहीं हैं तो नेचुरोपैथी के डॉक्टर के पास जा सकते हैं। भारत में एक प्रसिद्ध specialist हैं Dr. Biswaroop roy choudhury जो इसे ठीक कर सकते हैं।

आयुर्वेद और naturopathy का यह सिद्धांत है कि ऐसी बीमारियों को आयुर्वेद और पौष्टिक प्राकृतिक आहार के माध्यम से ठीक किया जा सकता है; क्योंकि इससे हमारे शरीर में हर कोशिका व पूरे सिस्टरम में सकारात्मक परिवर्तन होने लगते हैं।आयुर्वेद अत्यधिक असरदार है परन्तु आयुर्वेद बहुत विस्तृत है; तथा इसमें प्राकृतिक जड़ी बूटियाँ उपयोग में ली जाती हैं जिनकी प्रकार व मात्रा आयुर्वेदिक डॉक्टर/वैद्य को मरीज के according तय करनी होती है। अतः इसके लिए आपको उनसे संपर्क करना होगा।

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Naturopathy में कुछ सामान्य उपाय हैं जो स्थाई इलाज कर सकते हैं, जो निम्न हैं –

  •  0.1 ग्राम केसर को 1 cup पानी के साथ उबालें जब तक घोल अत्यधिक गर्म न हो जाए तथा पानी का रंग केसरी रंग (orange like color) का न हो जाए। इस घोल को सुबह खाली पेट में व रात को सोने से पहले (भोजन के 2 घण्टे बाद) सिप सिप करके धीरे धीरे पियें। यह पाया गया है कि 21 दिनों तक इसका सेवन करने से माइग्रेन 30-40% तक ठीक हो जाता है। 3-4 महीनों तक सेवन करने से माइग्रेन पूरी तरह ठीक हो जाता है। यदि कुछ दर्द बचा हुआ हो तो इसका अधिक लंबे समय तक सेवन करना चाहिए।
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  • इसके साथ साथ हमें अपने दिनभर के आहार का 70-80% हिस्सा प्राकृतिक कच्चा आहार करना होता है। इसके सरल version के लिए आप DIP डाइट प्लान search करें। DIP डाइट प्लान Dr. Biswaroop का ही बताया गया डाइट प्लान है, जो सरल है तथा इसमें भोजन के सही समय जैसी बारीकियाँ भी सम्मिलित हैं।

 

  •  इसके साथ ही आपको नियमित व्यायाम/योग करना ही चाहिए व नियमित sun exposure लेना चाहिए इन दोनों के लिए सुबह का समय सबसे उत्तम होता है। उक्त तीनों उपायों को एक साथ करना अति आवश्यक है, क्योंकि तीनों के अलग अलग महत्व हैं और तीनों मिलकर सर्वोत्तम परिणाम देंगे।

 माइग्रेन के स्थाई इलाज के लिए योग

 निःसन्देह योग नें पूरे विश्व में millions लोगों के billions बीमारियों का इलाज किया है। योग का एक भाग है जिसे “प्राणायाम” कहा जाता है। इसकी विशेषता यह है कि इसे बच्चे से लेकर बुजुर्ग सभी कर सकते हैं एवं यह आश्चर्यजनक रूप से स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होता है। साथ ही साथ मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता है। माइग्रेन ठीक करने में इसका एक बड़ा योगदान हो सकता है यदि नियमित प्राणायाम किया जाए।

प्राणायाम में भी कई प्रकार के प्राणायाम होते हैं परन्तु कुछ प्राणायाम प्रमुख होते हैं जो माइग्रेन दर्द के स्थाई इलाज में भी अत्यधिक लाभकारी होते हैं। जो निम्न हैं –

1) अनुलोम विलोम प्राणायाम 2) कपाल भारती प्राणायाम 3) भस्त्रिका प्राणायाम 4) भ्रामरी प्राणायाम 5) उद्गीत प्राणायाम

इन सभी योगाभ्यासों को आप सर्च करके देख सकते हैं व सिख सकते हैं। भ्रामरी व उद्गीत प्राणायाम को 5-12 बार करें। तथा अन्य प्रत्येक प्राणायाम को आरम्भ में 5 मिनट व धीरे धीरे बढाते हुए 15 मिनट तक करना चाहिए। नियमित योग अभ्यास से माइग्रेन दर्द में निश्चित ही लाभ होता है तथा स्थाई रूप से इलाज हो जाता है। परन्तु कुछ लोगों को कुछ अधिक समय में लाभ प्राप्त हो सकता है। अतः प्राणायाम को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न कार्य बना कर नियमित रूप से करना चाहिए।

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माइग्रेन के तत्काल राहत के लिए home remedies

1.) Ginger + दो-तीन कालीमिर्च + तीन-चार लौंग + 2 दाल चीनी अच्छे से कूटें, फिर 100 ml पानी में मिला कर घोल को अच्छे से उबाल लें। फिर उस घोल को सम्हाल कर रखें तथा सिप करके 3-4 बार आधे-आधे घण्टे के अंतराल में पिएँ। इससे तत्काल में माइग्रेन से काफी राहत मिलेगी।

2.) High BP एक factor है जिससे माइग्रेन की समस्या बढ़ जाती है।
इसके निवारण के लिए :- एक बाल्टी में गर्म पानी लें फिर उसमें अपने पैर डूबा कर बैठें। इस बीच तापमान सन्तुलित रखें। यदि पानी कुछ ठंडा होने लगे तो उसे बदलकर गर्म पानी में पैर रख लें। इसी प्रकार 20 मिनट तक रखने से BP में 10 यूनिट की कमी आएगी। इस बीच यदि सिर में दर्द हो तो सामान्य तापमान के पानी वाले गीले कपड़े को सिर में लपेट लें। इससे BP व सिर दर्द दोनों कम होंगे।

इसके साथ हमें यह भी याद रखना चाहिए कि यदि माइग्रेन दर्द भूख के कारण होता हो तो या दर्द के समय खाली पेट हो तो हमें 2-2 घण्टे के अंतराल में कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए, अर्थात भूखे नहीं रहना चाहिए।

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