October 5, 2022

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थायराइड क्या है, इसके प्रकार और प्रबंधन | What is thyroid, Its types, And Management

Thyroid in hindi
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थायरॉइड क्या है (What is thyroid) –

थायरॉइड हमारे गले में उपस्थित एक प्रकार की एंडोक्राइन ग्लैंड (ग्रंथि) है , जिसकी संरचना बिलकुल एक तितली की तरह दिखाई देती है | थायरॉइड ग्रंथि की कोशिकाएं Thyroxine (T4) और Triiodothyronine (T3) हार्मोन्स का निर्माण करती हैं, और इसका निर्माण करने के लिए यह ग्रंथि हमारे द्वारा खाये गए भोजन से आयोडिन का अवशोषण करती हैं और उसके बाद इसे हमारी रक्त कोशिकाओं (Blood vessels) तक पहुंचातीं हैं, जिससे ये हार्मोन्स हमारे पूरे शरीर में पहुँच कर हमारी सभी कोशिकाओं में चयापचय (मेटाबोलिस्म) को नियंत्रित करने का काम करतीं हैं | साथ ही यह हमारे शरीर की वृद्धि, रक्तचाप, हड्डियों के विकास, पेशियों तथा मानसिक वृद्धि को नियंत्रित करता है| थायरॉइड हार्मोन हमारे शरीर में सबसे महत्वपूर्ण रसायन है, जिसके अनियंत्रित होने से हमारे शरीर में बहुत से विकार उत्पन्न हो जाते हैं, इसलिए इसका हमारे शरीर मे संतुलन अतिआवश्यक है| साथ ही हमारी pituitary gland(पीयूष ग्रंथि) में TSH( Thyroid stimulating hormone)भी उपस्थित होता है, जो की Thyroxine(T4)और Triiodothyronine (T3)  को प्रेरित करने का काम करता है और थायरॉइड के स्तर को संतुलित रखता है | थायरॉइड की समस्या प्रायः महिलाओं को ही अधिक होती है और हार्मोन्स के असंतुलित होने की वजह से बहुत सी समस्याएँ महिलाओं को झेलनी पड़ती हैं|आप ये भी कह सकते हैं की ये एक साइलेंट किलर है हमारे लिए , जो बहुत धीरे -धीरे हमें अपनी गिरफ्त मे लेता है और हमे खुद पता नहीं चल पाता की हम कब इससे ग्रसित हो चुके हैं |

थायरॉइड के प्रकार (Types of thyroid) –

थायरॉइड की बीमारी दो प्रकार की होती है –

1.हाइपरथाइरौइडिस्म(Hyperthyroidism) –

इस प्रकार में थायरॉइड ग्रंथि के अधिक सक्रिय हो जाने की वजह से Thyroxine(T4) और Triiodothyronine(T3) का अधिक निर्माण होने लगता है और इसका स्तर बढ़ जाता है, हाइपर का मतलब ही है किसी चीज का अधिक होना या बढ़ जाना|

2. हाइपोथाइरौइडिस्म(Hypothyroidism) –

इस प्रकार में हमारी थायरॉइड ग्रंथि निष्क्रिय हो जाती हैं और उसकी वजह से पर्याप्त मात्रा में Thyroxine(T4)और Triiodothyronine(T3)कर निर्माण नहीं हो पाता जिसकी वजह से TSH(Thyroid stimulating hormone) का स्तर बढ़ने लगता है | मतलब की जब हमारे शरीर में Thyroxine(T4) और Triiodothyronine(T3) की अधिकता होगी तब हम इसे हाइपरथाइरौइडिस्म (Hyperthyroidism) कहेंगे और जब TSH(Thyroid stimulating hormone) की अधिकता होगी तो इसे हाइपोथाइरौइडिस्म (Hypothyroidism) कहेंगे |

थायरॉइड होने के कारण (Reasons of thyroid) –

इस बीमारी के होने के कई कारण हो सकते हैं-

1. आयोडिन की कमी (Iodine deficiency) –

जैसा के मैंने पहले से ही आप लोगों को बताया की थायरॉइड हार्मोन्स के निर्माण के लिए हमारी कोशिकाओं को आयोडिन की जरूरत होती है जो की थायरॉइड हार्मोन के संतुलन के लिए अति आवश्यक है | और अगर इसकी कमी होती है या अधिकता, तो ये भी इस बीमारी का एक कारण हो सकता है |

2. ऑटोइम्यून डिसिस ( Autoimmune disease) –

ये बीमारी ऑटोइम्यून भी हो सकती है मतलब की ऑटोइम्यून डिसिस में हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) ही हमारे शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं पर आक्रमण करने लगती है और इस बीमारी के लिए जिम्मेदार होती है |

3. मानसिक तनाव (Mental stress)

अगर आप किसी विषय के बारे में बहुत ज्यादा चिंता कर रहे हैं, सोच रहे है और उसके चलते आप हर दिन एक तनावपूर्ण जिंदगी जी रहे हैं तो ये भी आपको इस बीमारी से मिला सकता है |

4. आनुवांशिकता (Heredity)

कई बार यह रोग आनुवांशिक हो सकता है मतलब अगर हमारी पिछली पीढ़ी के लोगों को भी रहा हो, तो हमें भी ये हो सकता है |

5. गर्भावस्था (Pregnancy) –

महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान भी ये बीमारी हो सकती है क्योंकि इस समय महिलाओं मे कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं,जिसकी वजह से थायरॉइड हार्मोन में असंतुलन देखने को मिलता है |

6. खान-पान (Food And Drink) –

हमारा गलत खान-पान भी इस बीमारी के लिए जिम्मेदार होता है और हमारी लाइफ स्टाइल भी | खाने में अगर हम विटामिन , प्रोटीन और रेशेयुक्त भोजन को शामिल नहीं करते और फास्टफूड,जुंकफूड का ज्यादा सेवन करते है तो ये भी एक बड़ा कारण हो सकता है |

7. अन्य कारण (Other Reason) –

कुछ अन्य रोग भी हैं जिनकी वजह से हमें थायरॉइड की समस्या हो सकती है –

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1. थायरॉइड ग्रंथि मे सूजन आ जाना –

थायरॉइड ग्रंथि में सूजन आ जाने की वजह से शुरू शुरू मे इस हार्मोन का अधिक निर्माण होने लगता है, लेकिन बाद मे इसमें कमी आ जाती है और ये प्रायः महिलाओं मे गर्भावस्था मे देखा जाता है |

2. विटामिन B12-

कई बार विटामिन B12की कमी भी इसका कारण हो सकता है |

3. ग्रेव्स रोग(graves disease) –

यह रोग प्रायः वयस्कों में थाइरौइडिस्म(Hyperthyroidism) होने मुख्य कारण होता है, ग्रेव्स रोग(graves disease)मे हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली ही ऐसे antibodies का निर्माण करने लगती है जो की TSH( Thyroid stimulating hormone)का स्तर बढ़ाने लगती है, और यह एक आनुवांशिक रोग है जो की एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में होती है |

4. गंडमाल रोग(goitre) –

इसे हम घेंघा रोग भी कहते हैं |

5. हाशिमोटो रोग( hashimoto disease) –

यह रोग हमारे थायरॉइड ग्रंथि के किसी एक हिस्से या भाग को निष्क्रिय बना देता है |

महिलाओं में थायरॉइड के लक्षण (Symptoms of thyroid in females)

1.हाइपरथाइरौइडिस्म(Hyperthyroidism) के लक्षण-

1. हाइपरथाइरौइडिस्म(Hyperthyroidism) में थायरॉइड हार्मोन की अधिकता की वजह से चयापचय(metabolism) की क्रिया तेज़ी से होने लगती है और हमारे शरीर मे हर क्रिया की दर बढ़ जाती है |
2. इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति का वजन घटने लगता है |
3. चिड़चिड़ापन होता है |
4. ज्यादा मात्रा में पसीने का स्त्राव होने लगता है |
5. बाल झड़ने लगते हैं और पतले हो जाते हैं |
6. शरीर मे थकावट रहती है, कमजोरी एवं दर्द भी रहता है |
7. अनिद्रा और हाथ में कंपन भी शुरू हो जाता है |
8. गले के आसपास सूजन बनी रहती है |

दोनों ही बीमारी के लक्षण कुछ हद तक समान ही होते हैं |

2. हाइपोथाइरौइडिस्म (Hypothyroidism) के लक्षण-

1. इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति का वजन बढ़ने लगता है|
2. इसमें भी बाल पतले हो के झड़ने लगते हैं |
3. शरीर में थकावट बनी रहती है |
4. शरीर से कम पसीना निकलता है |
5. सामान्य मौसम में भी कई बार ठंडक महसूस होती हैं
6. चेहरे पर सूजन आ जाती है|
7. मासिक धर्म का अनियमित होना,या बहुत अधिक ब्लीडिंग होना, या होने पर पेट के निचले हिस्से में बहुत ज्यादा दर्द होना |
8. पेट साफ न होना, हमेशा कब्ज बने रहना |
9. कब्ज की वजह से कभी कभी स्टूल का कड़ा हो जाना और उसकी वजह से गुदाद्वार(Anus Bleed)से खून का गिरना और दर्द होना |
10. खाना न पचना और खाने के बाद खट्टी डकार का आना |
11. त्वचा बहुत रूखी हो जाती है |

थायरॉइड से होने वाले खतरे (Hazards of thyroid diseaes) –

कई बार इस बीमारी का पता जल्दी नहीं लग पाता या फिर आप अपने शरीर में इससे होने वाले लक्षणों कई बार नज़रअंदाज़ कर जाते हैं, तो आपको PCOD( Polycystic ovary syndrome)होने का भी खतरा हो सकता है,जिसकी वजह से अक्सर महिलाओं को बाँझपन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है साथ ही आप कैंसर जैसी बीमारी के भी शिकार हो सकते हैं | और मोटापे की वजह से भी आप और कई और बीमारियों से ग्रस्त हो सकते हैं,इसलिए कभी भी आपको अगर अपने शरीर में किसी भी तरीके के परिवर्तन नजर आ रहें हैं, और समय के साथ ये परिवर्तन और बढ़ते जा रहें हैं तो कृपया कभी इन्हे नज़रअंदाज़ ना करें |

थायरॉइड का पता कैसे लगाएँ (How to detect thyroid) –

स्वयं में आपको दिये ऊपर गए लक्षणों में से अगर किसी भी लक्षण का अनुभव हो तो आप कुछ टेस्ट के द्वारा इसका पता लगा सकते हैं
1. T3और T4प्रोफ़ाइल टेस्ट
2. TSH प्रोफ़ाइल टेस्ट
3. अगर आपके शरीर में इस बीमारी के सारे लक्षण मौजूद हैं फिर भी ऊपर दिये गए टेस्ट में थायरॉइड का स्तर सामान्य दिख रहा तो आप Anti-TPO (Thyroid Peroxidase antibody)टेस्ट करवा कर इसका पता लगा सकते हैं |

खान-पान कैसा हो, किस प्रकार के खाने से बचें (How about food, what types of food should be avoided) –

थायरॉइड को अगर आप नियंत्रित करना चाहते हैं तो सबसे पहले चिंता को और तनाव को अपने दिमाक से बाहर कर दें, और सकारात्मक ऊर्जा और दृढ़इच्छाशक्ति के साथ ये ठान लें की आपको इसे अपने वश में करना है बस | जिस दिन आप ने चिंता करना और तनाव लेना कम कर दिया उस दिन से आप इसे नियंत्रण में लाना शुरू कर देंगे |इसके लिए आपको सुबह से लेकर शाम तक की दिनचर्या में कुछ बदलाव करने होंगे और ये बदलाव आपको इससे तो दूर रखेगा ही साथ ही आप
और रोगों से भी दूर रहेंगे, तो आपको करना है –

1. सुबह जल्दी उठें और नित्यक्रिया के बाद योगा और व्यायाम करें, और उसी योगा और व्यायाम से शुरुआत करें जो आपके लिए शुरुआत में सरल हो, क्योंकि इस बीमारी मे हमें पहले से ही थकावट रहती है, तो शुरुआत सरल योगा और व्यायाम से करें,
अगर आपके पास थोड़ा ज्यादा समय है तो आप एक घंटे मॉर्निंग वॉक के बाद एक घंटा योगा या व्यायाम कर सकते हैं, नहीं तो सिर्फ योगा और व्यायाम कर सकते हैं, और जो लोग जॉब करते हैं या घर के काम में बहुत उलझे रहने की वजह से समय नहीं निकाल पते तो उन्हें समय निकालना होगा, आप जिस शरीर से अपने दिनभर का इतना काम करते हैं उसके लिए एक घंटा अवश्य निकाल सकते हैं |और धीरे-धीरे करके विभिन्न प्रकार के योगा और व्यायाम की शुरुआत (जिसमे पसीना निकले) करें और रस्सी भी कूद सकते हैं | व्यायाम और योगा उतना ही करें जीतने में आपके शरीर को थकावट न हो, कहने का मतलब शरीर के साथ जबरदस्ती न करें , अगर आपके शरीर थकावट लग रही तो, धीरे- धीरे करके योगा और व्यायाम का समय बढ़ाएगा |

2. सुबह योगा और व्यायाम के बाद कुछ ड्राइफ्रूइट्स घर पर हो तो वो खाएं , बादाम अगर आप खा पाये तो ये आपके लिए बहुत अच्छा साबित होगा इस बीमारी में, और साथ में एक गिलास कुनकुने पानी का नींबू के रस के साथ सेवन करे, और दिनभर में आप जितना ज्यादा से ज्यादा पानी पी सकते हैं पीये, इससे जो भी हानिकारक तत्व आपके शरीर में मौजूद होंगे वो बाहर होंगे और आपका शरीर हाइड्रेट भी रहेगा |

3. फिर सुबह खाने में (11 से 12 बजे के बीच) भूख के हिसाब से ही खाना लें, रोटी खाएं और चावल एक कटोरी खाएँ, आप सभी प्रकार का खाना खाते हुए भी अपना वजन कम कर सकते हैं, बस सही समय पर सही तरीके का खाना खाएँ, अगर खाने के बाद आप मीठा खाने के शौकीन हैं तो सिर्फ एक टुकड़ा या एक हिस्सा ही खाएँ, चाय के शौकीन हैं तो एक कप सुबह की चाय से ही काम चलाएं और मीठा बंद नहीं किन्तु खाना कम कर दें | दोपहर मे फिर अगर आपको भूख सी महसूस होती तो आप कोई फल, ढोकला , पोहा या ओट्स ले सकते हैं , जो आपको पसंद आए, लेकिन सिर्फ एक छोटी कटोरी में बस नाश्ते के रूप में, और आप अलसी(Flaxseed)को पीस कर उसे ओट्स मे या दलिया में भी मिला कर खा सकते है, या उसका पाउडर(अलसी के बीज को थोड़ा भून के पीस लें) हल्के कुनकुने पानी मे मिलाकर भी इसका सेवन कर सकते हैं, ये आपके थायरॉइड को नियंत्रित करने में आपकी सहायता करेगा, और रात में खाना न के बराबर हो मतलब एक कटोरी दलिया या एक से दो रोटी बस अपने हल्की भूख के हिसाब से और अगर आप को दलिया पसंद है तो आप सुबह के खाने में चावल की जगह भी दलिया खा सकते हैं |

4. खाने के बाद हो सके तो छाछ का सेवन करें, भोजन पचाने में आसानी होगी |

5. खाने में ऐसा खाना खाये जो जल्दी पचे जैसे रोटी, दाल, हरी सब्जियाँ, चावल | खाने में आप सब खा सकते हैं जो भी खाना आसानी से पचे और पोषक तत्वों से भरपूर हो | लेकिन अगर आप streetfood,fastfood,junkfood के शौकीन हैं तो इसे कम कर दीजिये, हाँ थोड़ा मुश्किल होगा परंतु नामुमकिन नहीं, आप सप्ताह के 6 दिन सादा भोजन करें, कम तलीभुनी चीजें , कम मिर्च वाले खाने का ही सेवन करें और सप्ताह के सातवें दिन आप अपनी मनपसंद की कोई भी एक चीज खा सकते हैं वो भी सीमित मात्रा में,मतलब अगर आप पहले 20-20 पानीपूरी एक बार में खा जाते थे, तो उसे सिर्फ 5 कर दीजिये बस उससे ज्यादा नहीं , इससे आपका मन भी रह जाएगा और सप्ताह के 6 जो दिन आप अपने थायरॉइड को और अपने वजन को नियंत्रित करने के लिए कर रहे हैं वह भी बेकार नहीं जाएगा |

6. पानी जब भी पीयें तो घूंट -घूंट करके पीये और हो सके तो हल्के कुनकुने पानी का ही सेवन करें|

7. किसी भी प्रकार के नशे से बचें |

8. अंडे के सफ़ेद भाग का सेवन करें, आप इसे सुबह नाश्ते के रूप में भी ले सकतें हैं, मछ्ली का सेवन करें यदि आप माँसाहारी हैं तो और अगर शाकाहारी हैं तो जितना हो सके हरी सब्जियों का सेवन करें, सलाद, फल और जूस का सेवन करें, प्रोटीन और फाइबर युक्त भोजन करें |

9. रात को देर तक न जागे | सही समय पर सोयें और सही समय पर उठें |

10. किसी भी प्रकार के Packed और Processed फूड से बचें|

11. दुग्ध उत्पादों ( dairy products)को अपने भोजन में सम्मिलित करें |

12. चाय, कॉफी का सेवन कम कर दें, अगर आप इन पेय पदार्थों के प्रेमी हैं तो |

दोस्तों अगर धैर्य के साथ बस इतनी सी चीजें नियमित रूप से आप अपनी दिनचर्या में शामिल करके इसका सही तरीके पालन करने लगेंगे, तो कुछ ही समय मे आपको इसका सकारात्मक परिणाम देखने को मिलगा साथ ही आपका इस बीमारी से बढ़ा हुआ वजन भी नियंत्रित होने लगेगा। बस ये सारी चीजें आपको कोई नकारात्मक विचार मन में लाये बिना नियमित रूप हमेशा करनी हैं चाहे आप किसी भी बीमारी से ग्रसित हो या ना हो, एक स्वस्थ और निरोगी शरीर के लिए ये दिनचर्या हमेशा अपनानी चाहिए | और इन सब के साथ-साथ अगर आपको थायरॉइड के ऊपर दिये हुए लक्षणों में से कुछ लक्षण दिखें तो डॉक्टर की सलाह भी लें सकते हैं |

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