October 5, 2022

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Antigen – Antibody Reaction in Hindi| एंटीजन और एंटीबॉडी प्रतिक्रिया

Antigen Antibody Pratikriya
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Antigen – Antibody Pratikriya in Hindi

एंटीजेन (Antigen) और एंटिबॉडी (Antibody) क्या है, प्रतिरक्षा प्रणाली में इसकी भूमिका, एंटीजेन-एंटिबॉडी रिएक्शन का उपयोग-

हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune system) में Antibodies की बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जब कोई बाहरी या अंतिरिक तत्व हमारे शरीर पर आक्रमण करते हैं, जिन्हें हम Antigen के नाम से भी जानते हैं, जो हमें कई संक्रामक रोगों से ग्रसित कर सकते हैं और जब यह Antigen हमारे शरीर के किसी भी हिस्से पर अपना प्रभाव डालते हैं, तब हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली तुरंत उन्हें पहचान कर , सक्रिय होकर Antibodies बनाने का काम शुरू कर देती हैं, और यही Antibodies हमें कई संक्रामक बीमारियों से बचाने का कार्य करती हैं।

प्रतिजन (Antigen) – प्रतिजन या Antigen हमारे शरीर के बाहर एवं अंदर पाए जाने वाले ऐसे रासायनिक पदार्थ या कारक होते हैं, जो हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय होने के लिर प्रेरित करते हैं, और हमारी प्रतिरक्षा रक्षा तंत्र, प्रतिविष या प्रतिरक्षी (Antibody) का निर्माण कार्य शुरू कर देती है और यह Antibody हमें प्रतिजन (Antigen) द्वारा होने वाले संक्रामक रोगों से बचाने का कार्य करता है।अब यह प्रतिजन या कारक कुछ भी हो सकते हैं जैसे सूक्ष्मजीव (बैक्टीरिया, वायरस)किसी प्रकार के कीट, एल्गी, फंगी यह सभी हमारे लिए एंटीजन का कार्य करते हैं। कुछ Antigen हमारे शरीर में विषैले पदार्थ छोड़ने का काम करते हैं जिन्हें हम विषाक्त पदार्थों (Toxin) के नाम से जानते हैं,यह कुछ प्रोटीन, छोटे अणु और पेप्टाइड से मिलकर बने होते हैं, यह हमारे शरीर में कोशिकाओं के साथ मिलकर रोग उत्पन्न करने का कार्य करते हैं।

विषाक्त पदार्थ या जीवविष(Toxin) – Toxins भी हमारे लिए प्रतिजन ही हैं जो दो प्रकार के होते हैं-

1.बाहिरजीवी विष (Exotoxin)- यह हमारे शरीर (Host Cell) के लिए बाहरी Exotoxin या Antigen होते हैं, जैसे अगर परागकणों (Pollen grains) के द्वारा हमें किसी प्रकार की एलर्जी (Allergy) होती है, तो यह हमारे लिए Exotoxin या Exogenous antigen कहलाते हैं।

2.अन्तरजीविविष (Endotoxin)- जब कभी हमारे शरीर के अंदर पाये जाने वाले सूक्ष्मजीव जैसे बैक्टेरिया या वाइरस Replicate होने लगते हैं और हमारे लिए संक्रामक हो जाते हैं, तब यह हमारे लिए Endotoxin या Endogenous antigen कहलाते हैं।

प्रतिजन (Antigen) के प्रतिरक्षा विज्ञानी गुण (Immunologic properties)-

प्रतिजन (Antigen) के प्रतिरक्षा विज्ञानी गुण (Immunologic properties) के आधार पर उन्हें वर्गीकृत कर सकते हैं-

1.इम्युनोजेनिक (immunogenic) प्रतिजन –

यह वह तत्व हैं, जिनमें प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करने की क्षमता होती है, अब चाहे वह Humoral (Antibody से उत्पन्न प्रतिक्रिया) या Cell mediated (T-cell(T-लिंम्फोसाइट्स) ) से उत्पन्न प्रतिक्रिया हो।

2.एंटिजेनिक (Antigenic) प्रतिजन –

यह वह तत्व हैं जो प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के अंतिम उत्पादों के साथ सयुंक्त होने की क्षमता रखते (antibodies या Cell surface- Receptor ) हैं।

3.ऐलेरोजेनिक (Allergenic) प्रतिजन –

जैसा के नाम से ही पता चल रहा की यह तत्व या कारक जो विभिन्न प्रकार की allergic प्रतिक्रियाओं को सक्रिय या प्रेरित करने की क्षमता रखता है, यह एक प्रकार के प्रतिरक्षाजन (Immunogen) हैं जो विशिष्ट प्रकार के Humoral (Antibody से उत्पन्न प्रतिक्रिया) या Cell mediated (T-cell(T-लिंम्फोसाइट्स) ) प्रतिक्रिया को सक्रिय करने का काम करती हैं।

4.टोलेरोजेनिक (Tolerogenic) प्रतिजन –

यह ऐसे सहनशील तत्व हैं जो विशिष्ट प्रकार के Immunologic non-responsiveness को प्रेरित करने की क्षमता रखते हैं, चाहे वह Humoral (Antibody से उत्पन्न प्रतिक्रिया) हो या Cell mediated (T-cell(T-लिंम्फोसाइट्स) ) हो।

यह सभी प्रकार के प्रतिजन जब हमारे शरीर पर आक्रमण (Attack) करते हैं, तो हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली तुरंत सक्रिय होने लगती और Antibodies का निर्माण करती हैं,जो हमें संक्रामक रोगों से तो बचाती ही साथ ही बीमारियों से लड़ने की क्षमता भी रखती है।

प्रतिजनी निर्धारक (Antigenic determinants)एवं इनकी भूमिका –

इम्युनोजेनिक (immunogenic) अणु प्रायः प्रतिरक्षा कोशिकाओं द्वारा नहीं पहचाने जाते हैं, या फिर इनके साथ क्रिया नहीं करते लेकिन लिंम्फोसाइट्स (White blood cells) macromolecules पर असतत (Discrete site ) स्थान को हम प्रतिजनी निर्धारक (Antigenic determinants) कहते हैं। इन्हें हम Epitopes के नाम से भी जानते हैं, यह Epitopes प्रतिरक्षतात्मक रूप से प्रतिरक्षाजन (Immunogen) के सक्रिय क्षेत्र हैं, जो विशेषकर लिंम्फोसाइट्स (White blood cells) पर Antigen के membrane receptor से जुड़ जाते हैं, या antibodies को स्त्रावित करने का कार्य करते हैं। लिंम्फोसाइट्स (White blood cells) हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली का एक बहुत ही अहम हिस्सा है, जो मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं-

Antigen Antibody Pratikriya

1.B-लिंम्फोसाइट्स- यह Antibody को उत्पादन करने का कार्य करती हैं।
2.T-लिंम्फोसाइट्स- यह Antibody के उत्पादन को सक्रिय करने का कार्य करती हैं।

B-लिंम्फोसाइट्सऔर T-लिंम्फोसाइट्स कोशिकाएं एक दूसरे से मूलभूत अंतर प्रदर्शित करती हैं। B-लिंम्फोसाइट्स घुलनशील Antigens को पहचानने का कार्य करती हैं, जब यह अपने झिल्लीबद्ध (Membrane bound)antibody से बंध जाती है तब। दूसरी ओर T-लिंम्फोसाइट्स Antigen प्रदर्शित करने वाली कोशिकाओं की सतह पर MHC (Major histocompatibility complex- class-i और class-ii प्रोटीन ) अणुओं से जुड़े संसाधित (Processed) peptides को पहचानने का कार्य करती है, और स्वयं की कोशिकाओं को बदल देती है। MHC प्रोटीन प्रतिरक्षा प्रणाली की एक अनुकूली शाखा में एक महत्वपूर्ण भूमिका प्रदर्शित करते हैं।

इनके द्वारा निर्मित Antibodies हमारे शरीर में प्रतिजन (Antigen) के रूप में हमला करने वाले बैक्टीरिया, वाइरस और Toxins पर हमला कर के हमें संक्रामक रोगों से बचाती है। जब कभी हम किसी बाहरी या आंतरिक Antigens से प्रभावित होते हैं, तो हमारे शरीर में उपस्थित लिंम्फोसाइट्स उन्हें पहचान कर उन्हें खत्म करने में लग जाता है, साथ ही हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली के साथ मिलकर Antibodies का निर्माण शुरू कर देती है और हमें रोगों से बचाने का कार्य करती है।

एंटीजेन और एंटिबॉडी रिएक्शन एवं उपयोग-

एंटीजेन -एंटिबॉडी रिएक्शन एक प्रतिरक्षा प्रणाली से संबन्धित क्रिया है, जो की प्रोटीन का जल्दी पता लगाने के लिए उपयोग में लाया जाता है। जैसा की हमने देखा की Antibodies किसी भी विशिष्ट प्रोटीन आधारित संरचना को पहचान लेती है और antigen के किसी छोटे हिस्से से बंध जाती है जिसे हम epitopes के नाम से जानते हैं।

एंटिबॉडी के प्रकार – Antibodies को हम Immunoglobulin के नाम से भी जानते हैं, इनके पाँच प्रकार होते हैं-

1.IgG – यह रक्त,लसिका और आंतों में उपस्थित होता है, और यह phagocytosis toxins और वाइरस को बेअसर करता है, साथ ही भ्रूण और नवजातों में सुरक्षा को बढ़ाता है।

2.IgM – यह रक्त, लसिका और B-लिंम्फोसाइट्स में पाया जाता है। यह वाइरस, बैक्टीरिया, फंगल और पैरासाइटिक infection से बचाने का कार्य करती हैं।

3.IgA – यह रक्त, लासिका और secretions (saliva milk) में होता है, यह सुरक्षा की पहली पंक्ति (First line defence) मानी जाती है, यह श्लेष्मा सतह (Mucosal surface) पर स्थानीय सुरक्षा प्रदान करने का कार्य करती हैं।

4.IgD – यह B-लिंम्फोसाइट्स की सतह, रक्त और लासिका में मौजूद होती है, इसकी भूमिका उतनी साफ नहीं ह अब तक लेकिन B-लिंम्फोसाइट्स में IgD का कार्य B-लिंम्फोसाइट्स को सक्रिय करने का कार्य करती हैं, ताकि यही प्रतिरक्षा प्रणाली में शरीर की रक्षा करने के लियरे हिस्सा ले सके।

5.IgE- यह पूरे शरीर और रक्त में mast cells और basophil सेल्स से बंधती हैं। यह प्रायः स्तनधारियों में ही पायी जाती है। यह allergic reactions के खिलाफ अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के दौरान WBC(White blood cells)और प्रतिजन के B-लिंम्फोसाइट्स द्वारा निर्मित Antibodies के बीच एक विशिष्ट रासायनिक क्रिया होती है, जिसे Antigen-antibody reaction (Ag-ab reaction) कहा जाता है। Antigen-antibody reaction का उपयोग सूक्ष्मजीवों का पता लगाने के लिए किया जाता है । बीमारियों का पता लगाने के लिए भी इस रासायनिक क्रिया का उपयोग किया जाता है, जैसे सिफलिस के लिए VDRL test, एचआईवी का पता लगाने के लिए ELISA testउपयोग में जाता है। यह सभी परीक्षण Ag-ab reaction का उदाहरण हैं। जब हमारी बॉडी में प्रतिजन के रूप में कोई कारक अपना प्रभाव डालता है, तब उसके विरूद्ध हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली एवं लिंम्फोसाइट cells Antibody का निर्माण करने लगती हैं, और यही Antigen-Antibody रिएक्शन है। यही प्रक्रिया किसी भी बीमारी के परीक्षण के लिए भी अपनाई जाती है, हमारे blood, saliva का नमूना लेकर बीमारी का पता लगाया जाता है।

एंटिजन और एंटिबॉडी में क्या अंतर है(What is the difference between Antigen and Antibody)-

एंटिजन हमारे शरीर में रोग उतपान करता है, एंटिजन कुछ भी हो सकते हैं जैसे धूल के कण (Dust particles), परागकण (Pollen grains), या फिर कोई सूक्ष्मजीव (Microorganism) जो की हमें बीमार करते हैं, जब यह सभी हमारे शरीर पर आक्रमण (Attack) करते हैं, तो इन्हें एंटिजन बोला जाता हैं और इनसे होने वाले संक्रमण या बीमारी से बचने के लिए जो रसायन हमारे शरीर में प्रतिरक्षक कोशिकाओं (immune cells) बनाती हैं, उसे ही हम एंटिबॉडी के नाम से जानते हैं। एंटिजन हमारे शरीर में रोग उत्पन्न करते हैंऔर एंटिबॉडी हमें इनसे बचाते हैं। कई बार यह जरूरी नहीं है की बाहर से ही कोई एंटिजन आकार हमारे शरीर में आकार हमला करे कई बार हमारे शरीर की कुछ कोशिकाएं एवं सूक्ष्मजीव भी हमारे लिए एंटिजन बन जाती हैं।

एंटिजन और एंटिबॉडी और उनके कारण होने वाली प्रतिकूल क्रियाएँ (Antigens and antibodies and their adverse reactions)-

एंटिजन और एंटिबॉडी के आपस में क्रियाएँ (Reactions) करने की वजह से हाइपरसेन्स्टिविटी अभिक्रिया (hypersensitivity reaction) होती है। ज्यादा जानने के लिए हमारी हिन्दीबीज वैबसाइटपर पढ़ें “हाइपरसेन्स्टिविटी अभिक्रिया क्या है, इसके प्रकार, इनसे होने वाली एलर्जि “(What is hypersensitivity reaction, its types, allergies caused by them)।

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