October 5, 2022

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कुछ महत्वपूर्ण औषधीय पौधे एवं रोगों  के उपचार में उनका उपयोग | Kuch mahatvapurn aushadhiya paudhe evam rogo ke upchar mein unka upyog

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कुछ महत्वपूर्ण औषधीय पौधे एवं रोगों  के उपचार में उनका उपयोग | Some important medicinal plants and their use in the treatment of diseases

Kuch mahatvapurn aushadhiya paudhe evam rogo ke upchar mein unka upyog

वैज्ञानिकों के शोधों के अनुसार हमारे देश में लगभग 8000 ऐसे औषधीय पौधों की पहचान हुई जिनका उपयोग कई गंभीर बीमारियों के उपचार में किया जाता है। हमारे देश में औषधीय पौधों के द्वारा बीमारियों के उपचार की पद्धति काफी प्राचीन समय से चली आ रही है और आज वर्तमान में भी औषधीय पौधों का उपयोग बीमारियों के उपचार के लिए प्रचलन में हैं। हम इन औषधीय पौधों का उपयोग Crude Drug (कच्चे दवा) के form में या किसी Meidicinal Dosage form के रूप में मतलब Powder, Tablet या Soulution के form में भी कर सकते हैं। आज हम कुछ ऐसे ही औषधीय गुणों वाले पौधों के बारे में चर्चा करेंगे, साथ ही हम देखेंगे की उन्हें किन-किन नामों से जाना जाता है, उनका जैविक स्त्रोत् (Biological Source) क्या है एवं किन -किन बीमारियों के उपचार में इनका उपयोग किया जाता है।

कुछ ऐसे ही औषधीय पौधे हैं-

1.अश्वगंधा (Ashwagandha)
2.राऊवोल्फिया (Rauwolfia)
3.डीजीटालिस (Digitalis)
4.सिनकोना (Cinchona)
5.विनका (Vinca)
6.गुग्गुल (Guggul)
7.टेरोकार्पस (Pterocarpus)
8.पपाया (Papaya)
9.गिलोय (Giloy)
10.गोखरू (Gokhru)
11.अर्जुना (Arjuna)

1.अश्वगंधा (Ashwagandha) –

साधारण नाम (Common name) – अश्वगंधा, इंडियन जिन्सेंग, पोईजन गूसबेरी, विंटर चेरी (Aswagandha, Indian ginseng, poison gooseberry,winter cherry)

जैविक स्त्रोत् (Biological Source )- यह क्रूड ड्रूग विथानिया सोमनीफेरा (Withania Somnifera) नामक पौधे की सुखी हुई जड़ो एवं तनों से बनता है और यह सोलानेसी (Solanaceae) परिवार (Family) से संबन्धित है।

उपयोग (Uses) – यह बहुत ही प्राचीन औषधि है जो उच्च रक्तचाप को कम करने में सहायक है, यह कोर्टिसोल (cortisol)होर्मोन की मात्रा को संतुलित रखता है, पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) होर्मोन को बढ़ावा देता है जिससे यह पुरुषों में प्रजनन को बढ़ाने का कार्य करता है। यह मानसिक तनाव को भी कम करने का कार्य करता है साथ ही हमें डिप्रेशन जैसी समस्याओं से दूर रखता है। यह Thyroid के नियंत्रण को बनाए रखता है, रक्त में शुगर की मात्रा को संतुलित करता है, हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है, कैंसर जैसे खतरनाक बीमारी से लड़ने में सहायक है, वजन को संतुलित रखने एवं कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को संतुलित रखता है और मांसपेशियों की वृद्धि और ताकत को बनाए रखता है। इसे पाउडर form में या herbel formulation के रूप में उपयोग में लाया जाता है।

2.राऊवोल्फिया (Rauwolfia) –

साधारण नाम (Common name) – सर्पगंधा, इंडियन स्नेक रूट, चन्द्रभागा, छोटाचाँद, डेविल पीपर (sarpgandha, indian snake root, chandrabhaga, chotachand, devil peeper)

जैविक स्त्रोत् (Biological Source)- यह राऊवोल्फिया सर्पेंटिना (Rauwolfia serpentina) नामक पौधे की जड़ से प्प्राप्त किया जाता है,इसकी जड़ें साँप की तरह दिखती हैं इसलिए इसे स्नेकरूट भी कहा जाता है, यह एपोसायानेसी (Apocynaceae) परिवार (Family) से संबन्धित है।

उपयोग (Uses)- यह मुख्यतः हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) को नियंत्रित करने के लिए उपयोग में लाया जाता है। यह भी पुराने समय से उपयोग में लायी जानी वाली औषधि है, चूंकि यह उच्च रक्तचाप को प्रभावी रूप से नियंत्रित करता है, इसलिए यह उच्च रक्तचाप की वजह से होने वाली दिल की बीमारियों के खतरे को भी कम करता है। साथ ही इसका उपयोग बुखार वाले आंतों के रोगों, यकृत की बीमारियों, सांप और सरीसृप के काटने, बुखार, कब्ज, मिर्गी, जोड़ों में दर्द (गठिया), एडिमा (Edema), नींद ना आने और सामान्य दुर्बलताओं के लिए टॉनिक के रूप में भी किया जाता है।

3.डीजीटालिस (Digitalis) –

साधारण नाम (Common name) – फॉक्सग्लोव लीफ, डीजीटालिस लीफ

जैविक स्त्रोत् (Biological Source) – यह डीजीटालिस लनाटा (Digitalis lanata) और डीजीटालिस परपिउरिया (Digitalis purpurea) नामक पौधों की पत्तियों से प्राप्त होता है, पत्तियों को sun dry करके इसका उपयोग दवाई के लिए किया जाता है। यह स्क्रोफुलेरीएसी (Scrophulariaceae) परिवार (Family) से संबन्धित है।

उपयोग (Uses) – यह एक कार्डिओटोनिक (Carditonic)औषधि है, जिसका उपयोग हार्ट के संकुचन एवं उसकी दक्षता बढ़ाने में उपयोग किया जाता है। यह प्रायः कंजेस्टीव हार्ट फेल्युर (CHF), एडिमा (Edema)और हार्ट के रिदम (Rhythm) मतलब अराइथिमिया (Arrhythmia) जैसी दिल के बीमारियों एवं समस्याओं में बहुत ही प्रभावी है। जब कभी किस व्यक्ति का दिल सही तरीके से कार्य नहीं कर पता, या सही रिदम नहीं होती तो इसे उपयोग में लाया जाता है, Allopathy में यह tablet के रूप में आती है।

4.सिनकोना (Cinchona) –

साधारण नाम (Common name) –कुनैन, रेड बार्क, क्राउन बार्क, पेरुवियन बार्क, जेसुइट बार्क (Quinine, red bark, Crown bark, Peruvian bark, Jesuit’s bark)

जैविक स्त्रोत् (Biological Source)- यह एक छाल है जो की सिनकोना ओफिसिनेल (Cinchona officinale), सिनकोना सक्सिरुब्रा (Cinchona succirubra), सिनकोना लेडरजियाना (cinchona ledergiana) और सिनकोना कैलीसाया (Cinchona Calisaya ) नामक पेड़ की छाल से प्राप्त किया जाता है। यह रूबीएसी (Rubiaceae) परिवार से सबंधित है।

उपयोग (Uses) – इसे कुनैन की छाल के नाम से भी जाना जाता है, यह क्रूड ड्रूग प्राचीन समय से ही मलेरिया के उपचार में इस्तेमाल होती आ रही है। यह मलेरिया में आने वाले बुखार में दर्द कम करने का काम भी करती है, यह एक Anti-malarial और Anti-pyretic drug(दर्द कम करने वाली) है। साथ ही इसमे मौजूद रासायनिक घटक हमारी मांसपेशियों को रिलैक्स करने में, इनकी ऐंठन को कम करने में सहायक है। साथ ही यह Abortifacient भी है।

5.विनका (Vinca) –

साधारण नाम (Common name) – सदाबहार, पेरीविंकल, कैथेरैनथस , मदागासकर (Sadabahar, Periwinkle, catharanthus, Madagascar )

जैविक स्त्रोत् (Biological Source)- यह कैथेरैनथस रोसिअस (Catharanthus roseus)नामक पौधों के aerial parts का उपयोग करके प्राप्त किया जाता है। यह एपोसायानेसी (Apocynaceae) परिवार से संबन्धित है। यह समान्यतः सभी जगह आसानी से मिल जाता है।

उपयोग (Uses)- यह मुख्यतः कैंसर रोग के उपचार के लिए उपयोग में लाया जाता है, साथ ही यह शुगर और उच्च रक्तचाप को भी कंट्रोल करने के लिए उपयोग में लाया जाता है।

6.गुग्गुल (Guggul) –

साधारण नाम (Common name) – गम गुग्गुल, गुगुल, मुकुल मिरह ,सलाई गूगल (Gum guggul, gugul, mukul myrrh, Salai-google)

जैविक स्त्रोत् (Biological Source)- यह एक Gum-resin है जो दिखने में पीले रंग का होता है जो की कोम्मिफोरा मुकुल और कोम्मिफोरा वाइटी (Commiphora mukul and Commiphora wightii) नामक पेड़ों की छालों में चीरा लगाकर gum exudate को इक्कठा करके प्राप्त किया जाता है। यह बुरसेराएसी (Burseraceae) नामक परिवार से संबंध रखता है।

उपयोग (Uses) – यह भी एक प्राचीन आयुर्वेदिक औषधि है जिसका उपयोग एथेरोस्केलेरोसिस (atherosclerosis) में किया जाता है साथ ही उच्च कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करने, त्वचा रोगों, दांतों की बीमारी, मुहांसों में, पुरानी टॉन्सिलिटिस और गले के अल्सर में गरारे करने में किया जाता है। साथ ही वजन कम करने में भी इसका उपयोग किया जाता है।

7.टेरोकार्पस (Pterocarpus) –

साधारण नाम (Common name) – मालाबार कीनो ट्री, इंडियन कीनो ट्री, विजयासर, बीजासर (Malabar kino tree, indian kino tree, vijayasar,bijasar)

जैविक स्त्रोत् (Biological Source) – यह टेरोकार्पस मारसुपियम (Pterocarpus marsupium) नामक पेड़ के तनों को चीरा लगा कर उसका juice निकाल कर उसे सूखा कर औषधि के रूप में उपयोग में लाया जाता है। यह लेग्युमिनोसी (Leguminosae)नामक परिवार से संबंध रखता है।

उपयोग (Uses) – यह मुख्यतः शुगर level को कंट्रोल करने में उपयोग में लाया जाता है, साथ ही स्किन इन्फ़ैकशन, fat को कम करने के उपयोग भी आता है। यह anti-inflammatory गुण भी मौजूद होते हैं।

8.पपाया (Papaya) –

साधारण नाम (Common name)- पपीता, पावपाव, पपाव (papita, pawpaw, papaw)

जैविक स्त्रोत् (Biological Source)- यह कैरिका पपाया (Carica papaya) नामक पेड़ के फलों एवं पत्तियों से प्राप्त होता है, इसकी पत्तियों का extract एवं fruit औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है। यह कैरिकाएसी ( Caricaceae) परिवार से संबन्धित है।

उपयोग (Uses) – पपीते का फल पाचन शक्ति बढ़ाने, पाचनतंत्र को मजबूत रखने में उपयोगी है। यह विटामिन C और antioxidants का एक अच्छा स्तोत्र है, अपच, आंतों और गैस्ट्रिक विकारों के उपचार के लिए किया जाता है। त्वचा संबंधी रोगों से दूर रखता है, कैंसररोधी गुण , उच्च रक्तचाप में उपयोगी होता है। पपीते की पत्तियों का extract डेंगू से पीड़ित मरीज में platelets count बढ़ाने का कार्य करता है, इसलिए इसका उपयोग डेंगू में भी किया जाता है।

giloy

9.गिलोय (giloy)-

साधारण नाम (Common name)- गूदुची, मूनसीड, गिलोय (Guduchi, Moonseed, Giloy)

जैविक स्त्रोत् (Biological Source)- यह टिनोस्पोरा कोर्डीफोलिया (Tinospora cordifolia) नामक पौधों की ताजी पत्तियों से बनता है, साथ ही इसकी stem का उपयोग भी औषधि के रूप में किया जाता है। इसे अमृत भी कहा जाता है। यह मेनीस्पेर्माएसी (Menispermaceae) नामक परिवार से संबन्धित है।

उपयोग (Uses)- गिलोय में प्रचुर मात्रा में Antioxidants होता है, इसे अमृत भी कहा गया गया है क्योंकि एक गिलोय ही अपने आप में कई बीमारियों के इलाज में उपयोग में लाया जाता है। इसे हम संजीवनी भी कहते हैं, यह हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाती है, हमें रोगों से दूर रखती है। गिलोय शुगर कंट्रोल करने में, उच्च रक्तचाप में, आर्थेराइटिस में, अस्थमा और कफ में, त्वचा से संबन्धित रोगों में, शरीर से toxins को बाहर करने में, ऑटोइम्यून Disorder में, प्लेटलेट्स count को बढ़ाने में, बालों के लिए उपयोग में लिया जाता है। साथ ही श्वसन तंत्र के infection में, तनाव को कम करने में, वजन कम करने में और विभिन्न प्रकार के फीवर जैसे टाइफाइड, डेंगू, मलेरिया में भी उपयोगी है।

10.गोखरू (Gokhru)-

साधारण नाम (Common name)- गोखरू, पंक्चर वाइन, छोटा गोखरू, बड़ा गोखरू, गोकसूर (Gokhru, Puncture wine, Chota gokhru, Bada gokhru, goksur)

जैविक स्त्रोत् (Biological Source)- यह दो प्रकार का होता है-छोटा गोखरू और बड़ा गोखरू । छोटा गोखरू ट्राईबुलुस टेररेस्टरिस(Tribulus terrestris)नामक पौधों के बीजों को सूखा कर प्राप्त किया जाता है, और बड़ा गोखरू पेडालियम मिउरेक्स( Pedalium murex) नामक पौधों से प्राप्त किया जाता है। यह (Zygophyllaceae) परिवार से संबन्धित है।

उपयोग (Uses)- यह ऑस्टियोआर्थराइटिस , गठिया और यौन समस्याओं, पेशाब में कठिनाई, मूत्र पथ संक्रमण, पथरी (Urinary calculi), डाइसुरिया (dysuria-painful or difficult urination) के उपचार में उपयोग में लाया जाता है। साथ ही यह यौन कामेच्छा को बढ़ाने का कार्य करता है।

11.अर्जुना (Arjuna)-

साधारण नाम (Common name)- Arjun, Arjuna

जैविक स्त्रोत् (Biological Source)- यह टर्मिनेलिया अर्जुना (terminalia Arjuna) नामक पेड़ की छाल से प्राप्त किया जाता है। यह कोम्ब्रिटाएसी (Combretaceae) नामक परिवार से संबन्धित है।

उपयोग (Uses)- प्राचीन शोधों के अनुसार यह Cardiotonic के रूप में congestive heart failure में, angina pectoris के दर्द में, उच्च रक्तचाप को कम करने में ,मूत्रवर्धक के लिए उपयोग में लाया जाता है। इसका उपयोग दवाओं की स्वदेशी प्रणालियों में विभिन्न हृदय रोगों के उपचार में किया जाता है। यह cholesterol को संतुलित करने में भी उपयोग में लाया जाता है।

हमारे देश में पाये जाने लगभग हर पौधे में औषधीय गुण मौजूद होता है, चाहे अब वो पालक की भाजी हो, मेथी हो, हल्दी हो अदरक हो बहुत से ऐसे भाजी, पौधे एवं उनके फल या पत्तियाँ होती हैं, जिनका उपयोग हम खाना बनाने में भी करते हैं साथ ही जो हमें बीमारियों से भी दूर रखते हैं।

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